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परमाणु ऊर्जा का विरोध कर रहे संगठनों पर नकेल

२५ फ़रवरी २०१२

एक पूर्व अमेरिकी राजनयिक ने ईरान का जिक्र करते हुए भारत पर अमेरिका के साथ भरपूर सहयोग न करने का आरोप लगाया और अब भारत परमाणु ऊर्जा की राह में बाधा के पीछे अमेरिकी संगठनों का हाथ बता रहा है.

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तस्वीर: AP

भारत और अमेरिका नागरिक क्षेत्र में परमाणु ऊर्जा के इस्तेमाल पर व्यापक सहयोग के लिए समझौता कर चुके हैं, और साथ ही मंद पड़ता अमेरिका भारत के विकास से जुड़ कर अपनी आर्थिक रफ्तार वापस पाने की जुगत में है. लेकिन सहयोग बढ़ाने के बदले दोनों देश आरोप प्रत्यारोप में फंस गए हैं. ऊपरी तौर पर दोनों के बीच अविश्वास या असहयोग जैसी कोई बात नजर नहीं आती लेकिन कूटनीति के बदले कुछ बातें सार्वजनिक रूप से कही जा रही हैं.

अमेरिका परेशान है कि भारत के साथ परमाणु कारोबार बढ़ नहीं रहा है तो भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आरोप लगाया है अमेरिकी संगठनों की शह पर भारत में परमाणु ऊर्जा का विरोध हो रहा है. शुक्रवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लगाए आरोपों को प्रधानमंत्री कार्यालय का जिम्मा संभाल रहे केंद्रीय मंत्री वी नारायणसामी ने और आगे बढ़ा दिया.

नारायणसामी ने कहा कि तीन गैर सरकारी संगठनों ने विदेशों से मिले धन का इस्तेमाल कुंडाकुलम के परमाणु संयंत्र के विरोध प्रदर्शनों में किया है. बात यहीं खत्म नहीं हुई. केंद्रीय मंत्री ने तीन संगठनों की मान्यता रद्द करने की भी बात कही है. गृह मंत्रालय ने बकायदा जांच करने के बाद इन तीनों संगठनों का लाइसेंस रद्द कर दिया है. इन संगठनों पर एफसीआरए एक्ट के नियमों का पालन न करने के आरोप में कार्रवाई की गई है.

नारायणसामी ने कहा, "ये गैरसरकारी संगठन विदेशों से विकलांगों की मदद करने और बीमारियों की रोकथाम करने के नाम पर मिले पैसों का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा के विरोध में कर रहे थे." उन्होंने बताया कि सरकार को जांच के बाद पता चला है कि कुछ गैरसरकारी संगठनों को अमेरिका और स्कैंडिनेवियाई देशों से मदद मिल रही थी. नारायमसामी के मुताबिक ये संगठन बड़ी मात्रा में विरोध प्रदर्शनों पर पैसा खर्च कर रहे थे, "प्लांट के नजदीक पिछले तीन महीने से विरोध प्रदर्शन चल रहा है. लोगों को अलग अलग गांवों से ट्रकों में भर कर वहां लाया गया और फिर उन्हें खाना बांटा जा रहा है."

नारायणसामी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का इन विरोध प्रदर्शनों के बारे में बयान गृह मंत्रालय की जांच के आधार पर ही आया है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंतरराष्ट्रीय विज्ञान पत्रिका साइंस को दिए एक इंटरव्यू में कहा है कि परमाणु उर्जा कार्यक्रम मुश्किलों में घिर गया है, क्योंकि गैरसरकारी संगठन भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरत को नहीं समझते. उन्होंने इस मामले के पीछे ज्यादातर अमेरिकी गैरसरकारी संगठनों के होने की बात कही है.

तमिलनाडु का कुंडाकुलम परमाणु बिजलीघर रूस के सहयोग से तैयार हुआ है. इसे दिसंबर से ही काम करना शुरू करना था, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध प्रदर्शन के कारण ऐसा नहीं हो सका. कुंडाकुलम परमाणु बिजली घर के आस पास रहने वाले लोग फुकुशिमा परमाणु हादसे के बाद से डरे हुए हैं और अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.

रिपोर्टः डीपीए, पीटीआई/ एन रंजन

संपादनः महेश झा