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नाइजीरिया में मौत के कुएं

२४ जनवरी २०१०

नाइजीरिया में मुस्लिम और ईसाइयों के बीच हुए संघर्ष के बाद एक गांव के कुएं और नालियों से सौ से भी ज़्यादा शव मिले हैं. ध्वस्त घर, जली गाड़ियां, घायल लोग नाइजीरिया के जोस गांव में इस हफ़्ते की हिंसा के बाद का यह दृश्य है.

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नाइजीरिया में लगातार हिंसातस्वीर: AP

नाइजीरिया में दंगों में 400 से भी ज़्यादा लोगों के मारे जाने की ख़बरें हैं.

बरसों तक लोगों को पीने का पानी देने वाले कुरु करमा के कुएं अब मौत के कुएं बन गए हैं. नाइजीरिया में जोस शहर के पास इस गांव के कुओं से अब तक 150 लाशें निकाली जा चुकी हैं, जबकि 60 लोग अब भी लापता हैं. गांव के मुखिया उमर बाज़ा का मानना है कि कुओं में अभी और भी शव हो सकते हैं. मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स वॉच ने राष्ट्रपति गुडलक जोनैथन से अपील की है कि मुस्लिम और ईसाइयों के बीच हुए संघर्ष की आपराधिक जांच की जाए.

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तस्वीर: AP

समाचार एजेंसी एएफ़पी ने ह्युमन राट्स वॉच के हवाले से लिखा है कि 121 शव कुओं से निकाले गए हैं जिनमें 22 बच्चे हैं. दर्जनों शव कुओं और नालियों में फेंक दिए गए. कुरु करमा गांव में अधिकतर मुस्लिम रहते हैं. पिछले रविवार को दो समुदायों के बीच संघर्ष की शुरुआत जोस में हुई जो धीरे धीरे आस पास के शहरों और गांवों फैल गई.

"17000 लोग विस्थापित हुए हैं उन्हें 16 अलग अलग शिविरों में रखा गया है. इनमें बहुत लोग घायल हैं. कई लोग मारे गए हैं. शिविरों में अब भी बहुत लोग हैं. हालांकि थोड़े हैं जो अपने घर लौट रहे हैं." - रेड क्रॉस के अधिकारी अब्दुल उमर

बुधवार को धार्मिक नेताओं और डॉक्टरों ने 288 शवों की गिनती की थी लेकिन अब कुरु करमा में और शव मिले हैं. जिसके बाद यह संख्या बढ़ी है. हालांकि अभी तक सरकार ने इस हिंसक संघर्ष में मारे गए लोगों की संख्या नहीं बताई है.

नाइजीरिया में पहली बार ईसाई और मुस्लिम समुदाय के लोगों के बीच संघर्ष 2008 नवंबर में हुआ था उस समय भी दो सौ लोग इसमें मारे गए थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि नेता दोनों समुदायों के बीच मतभेदों को सुलझाने में विफल रहे हैं और इसी कारण यह मामला इतना गंभीर रूप में सामने आया है.

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तस्वीर: AP

राष्ट्रपति जोनैथन ने कहा है कि जो भी इस हिंसा के लिए जि़म्मेदार हैं उन्हें कटघरे में खड़ा किया जाएगा. राष्ट्रपति ने सेना को सुरक्षा संभालने का आदेश दिया है और संवेदनशील इलाक़ो पर नज़र रखने को कहा है.

रिपोर्टः एजेंसियां/आभा मोंढे

संपादनः ए जमाल