1. कंटेंट पर जाएं
  2. मेन्यू पर जाएं
  3. डीडब्ल्यू की अन्य साइट देखें

धरती की सबसे ठंडी जगह

१० दिसम्बर २०१३

पूर्वी अंटार्कटिका का एक इलाका ऐसा है जहां तापमान माइनस 94.7 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है. वहां जिंदगी के लिए रत्ती भर जगह नहीं है. इंसान अगर वहां पहुंच भी जाए तो कुछ सेकेंडों के भीतर हमेशा के लिए जम जाएगा.

https://p.dw.com/p/1AWRt
तस्वीर: Hamish Pritchard/BAS

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा को सैटेलाइट डाटा के विश्लेषण के बाद पूर्वी अंटार्कटिका की इस जगह का पता चला. 6 से 10 किलोमीटर के दायरे में फैले इस इलाके में अगस्त 2010 में तापमान माइनस 94.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस साल 31 जुलाई में भी वहां तापमान माइनस 92.9 डिग्री तक गिरा. इससे पहले सबसे ठंडे तापमान का रिकॉर्ड माइनस 89.2 डिग्री सेल्सियस था.

सोमवार को अमेरिकी शहर सैन फ्रांसिस्को में अमेरिकी भूगर्भशास्त्र यूनियन की बैठक में वैज्ञानिकों ने यह दावा किया. बर्फ विज्ञानी टेड स्काम्बोस के मुताबिक, "यह कुछ ऐसा है जैसे आप गर्मियों में किसी दिन मंगल को देखें. मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि यह धरती की सबसे ठंडी जगह है."

हालांकि वैज्ञानिकों के दावे के बावजूद इसे गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज नहीं किया जा सकता, क्योंकि आंकड़े सैटेलाइट के हैं. दूसरी तरफ इतनी सर्दी को थर्मामीटर से मापना मुमकिन भी नहीं.

स्काम्बोस कहते हैं, "मैं वाकई यह नहीं जानता कि वहां कैसा महसूस होता होगा और ईश्वर का आभार कि मैं करने के लिए वहां जा भी नहीं रहा हूं." लेकिन इतना तय है कि इस सर्दी में जिंदा रहना नामुमकिन है. दक्षिणी ध्रुव पर काम करने वाले वैज्ञानिक अक्सर माइनस 73 डिग्री सेल्सियस का कुछ सेकेंडों के लिए सामना करते हैं, इतनी ठंड में सिर्फ तीन मिनट जिंदा रहा जा सकता है.

बाहर निकलने पर वैज्ञानिक स्नोर्कल नाम की तकनीक के सहारे सांस लेते हैं. इसकी मदद से बाहर की हवा को जैकेट के बीचों बीच बनी एक परत पर लगाया जाता है और फिर उसे अंदर ही अंदर सांस लेने लायक गर्म किया जाता है.

नासा के पूर्व वैज्ञानिक और कोलोरैडो यूनिवर्सिटी के वालिद अब्दालती कहते हैं, "यह बताता है कि धरती पर कितनी विविध परिस्थितियां हैं, कुछ तो ऐसी हैं कि जहां हम शोध भी नहीं कर सकते."

ओएसजे/एजेए (एपी)

इस विषय पर और जानकारी को स्किप करें

इस विषय पर और जानकारी