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कश्मीर में सभी दलों की बैठक, कर्फ्यू में ढील संभव

९ जुलाई २०१०

भारतीय राज्य जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने राज्य के गंभीर हालात को देखते हुए सोमवार को सभी पार्टियों की बैठक बुलाई है. इस बीच शुक्रवार को जुमे की नमाज के लिए श्रीनगर में कर्फ्यू में ढील देने पर विचार.

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सर्वदलीय बैठकतस्वीर: DW

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने 12 जुलाई को दोपहर में सभी पार्टियों के नेताओं को बुलाया है. बैठक में राज्य की गंभीर स्थिति पर चर्चा की जाएगी. श्रीनगर में तीन दिनों से कर्फ्यू लगा हुआ है और स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है. सभी पार्टियों की बैठक से पहले सत्ताधारी नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के नेताओं की रविवार को बैठक होने वाली है.

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कर्फ्यू में ढील की उम्मीदतस्वीर: AP

कश्मीर घाटी में लगातार विरोध प्रदर्शन और उसके बाद सुरक्षा बलों की फायरिंग में कई लोगों की जान गई. जिसके बाद राजधानी श्रीनगर में पूरी तरह कर्फ्यू लगा दिया गया है. लगातार तीन दिनों तक राजधानी कर्फ्यू में रहा. इस दौरान भारतीय सेना के जवानों ने अलग अलग हिस्सों में गश्त लगाई और लोगों को चेतावनी दी कि वे कर्फ्यू का उल्लंघन न करें.

राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों के साथ गुरुवार को बैठक की और शुक्रवार को जुमे के नमाज के दौरान कर्फ्यू में ढील देने पर विचार किया गया. उन्होंने शनिवार को भी कर्फ्यू में ढील देने पर चर्चा की क्योंकि उस दिन शबे मेराज पर्व है. आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को हालात का जायजा लेने के बाद ही कर्फ्यू में ढील देने पर आखिरी फैसला किया जाएगा. इस दौरान यह भी फैसला होगा कि क्या सेना का फ्लैग मार्च जारी रखा जाए या नहीं.

गुरुवार को सेना के 800 अतिरिक्त जवान भी कश्मीर पहुंच गए और उन्हें श्रीनगर शहर के गड़बड़ी वाले हिस्सों में तैनात कर दिया गया. इस बीच भारत सरकार ने सख्त संदेश दिया है कि जो लोग घाटी में गड़बड़ी फैलाने का काम कर रहे हैं और वहां स्थिति खराब होने के जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ सख्ती से निपटा जाएगा.

बडगाम जिले में कुछ लोगों ने सड़कों पर निकल कर प्रदर्शन करने की कोशिश की लेकिन सुरक्षा बलों ने उन्हें तितर बितर कर दिया. कर्फ्यू की वजह से पत्रकारों को भी घरों के अंदर ही रहना पड़ा और शुक्रवार को लगातार दूसरे दिन कश्मीर में अखबार नहीं निकल रहे हैं. सूत्रों ने बाताया कि सोपोर शहर और बारामूला में भी एहतियाती कर्फ्यू लगा दिया गया है. मंगलवार को सुरक्षा बलों की फायरिंग में तीन लोगों के मारे जाने के बाद श्रीनगर में बेहद सख्ती से कर्फ्यू लगा हुआ है.

नई दिल्ली में भारत के गृह मंत्री पी चिदंबरम ने उम्मीद जताई कि सेना को बहुत ज्यादा दिनों तक घाटी में नहीं रहना पड़ेगा. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे निर्देशों का पालन करें. चिदंबरम ने कहा, "जम्मू कश्मीर सरकार के अनुरोध पर सेना को तैनात किया गया है. मुझे इस बात की छूट नहीं है कि मैं बता पाऊं कि कहां कहां सेना की तैनाती हुई है. लेकिन मैं इस बात का आश्वासन दे सकता हूं कि गड़बड़ी वाले क्षेत्रों में सेना की गश्त जारी है."

श्रीनगर में भारत के गृह सचिव जीके पिल्लई ने बुधवार देर रात आला अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें निर्देश दिया कि गड़बड़ी फैलाने वाला कोई भी शख्स बच कर निकलना नहीं चाहिए. इस बैठक में जम्मू कश्मीर के डीजीपी कुलदीप खोड़ा, सीआरपीएफ के स्पेशल डीजी एनके त्रिपाठी और सेना के कई दूसरे अधिकारी भी शामिल हुए. श्रीनगर में हाल के दिनों में सैलानियों की संख्या काफी बढ़ी थी. लेकिन कर्फ्यू लगने के बाद पूरा शहर मरघट जैसा लगने लगा. सारी दुकानें बंद हैं और सड़कों पर सुरक्षा बल के जवानों के अलावा कोई जिन्दगी नहीं दिख रही है.

ऐसी खबरें हैं कि अलगावावदी संगठन के कुछ लोग घाटी में गड़बड़ी फैलाने की कोशिश कर रहे हैं और वे चाहते हैं कि प्रदर्शनों के दौरान लोगों की जान जाए, ताकि मामला गंभीर बना रहे. सूत्रों ने बताया कि ऐसे लोगों को धर दबोचने के निर्देश दिए गए हैं. हालांकि राज्य के कुछ विपक्षी नेताओं ने आनन फानन में सेना को बुलाए जाने पर सवाल खड़े किए हैं.

रिपोर्टः एजेंसियां/ए जमाल

संपादनः एम गोपालकृष्णन