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दुनिया

ट्रंप सऊदी अरब से तेल खरीदना बंद कर देंगे?

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप क्या सऊदी अरब से कच्चा तेल खरीदना बंद कर देंगे? अपने चुनाव प्रचार में तो उन्होंने कुछ ऐसा ही कहा था, लेकिन असल में इसकी संभावना बहुत कम दिखती है.

ट्रंप की अभी तक की खासियत यह रही है कि वह बोल देते हैं, अंजाम की ज्यादा परवाह नहीं करते. लेकिन राष्ट्रपति चुने जाने के बाद उनकी कही बातों पर चर्चा और विश्लेषण तो होगा ही. तकनीकी दुनिया की एक बड़ी हस्ती पीटर थील ने अक्टूबर में ट्रंप के बारे में कहा था, "मीडिया कभी ट्रंप को गंभीरता से नहीं लेता, बल्कि उनकी कही बातों को शब्दश: उठा लेता है. लेकिन मुझे लगता है कि ट्रंप को वोट देने वाले बहुत से मतदाता उन्हें गंभीरता से लेते हैं और शब्दश: नहीं.”

सऊदी अरब से तेल का आयात रोकने की बात भी ट्रंप की कही ऐसी बातों में थी, जिन्हें गंभीरता से नहीं लिया जाना चाहिए. इसका मकसद अमेरिकी तेल क्षेत्र में काम करने वाले उन मजदूरों का समर्थन हासिल करना था, जो कीमतों में गिरावट की मार झेल रहे हैं.

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ट्रंप ने कहा था कि अगर सऊदी अरब इस्लामिक स्टेट से लड़ने के लिए जमीन पर अपने सैनिक नहीं उतारेगा तो वो उससे तेल खरीदना बंद कर देंगे. उन्होंने यह भी कहा था कि अमेरिका सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों की जो सैन्य रूप से सुरक्षा करता है, उस पर आने वाला विशाल खर्च इन देशों को चुकाना चाहिए.

ट्रंप ने कहा था कि पहले अमेरिका को हर हाल में खाड़ी देशों से तेल खरीदना पड़ता था, लेकिन शेल क्रांति के बाद अब अमेरिका ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर हो रहा है. ट्रंप के मुताबकि अमेरिका के कई ऐसे क्षेत्रों में तेल मिला है, जहां उसके मिलने की उम्मीद ही नहीं थी.

जो भी हो, लेकिन इस बात की संभावना कम ही दिखती है कि ट्रंप व्यवहारिक या फिर राजनीतिक कारणों से सऊदी अरब से होने वाले तेल आयात को सीमित या बंद करेंगे. बुनियादी तौर पर कच्चे तेल और रिफाइंड ईंधन का बाजार वैश्विक है और ऐसे में ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर होने की कोई ज्यादा तुक नहीं बनती.

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वैसे भी, अमेरिका कभी मध्य पूर्व के तेल पर उतना निर्भर नहीं रहा है, जितना यूरोप के देश रहे हैं. जहां तक बात आत्मनिर्भर होने की है तो अमेरिका इससे अब भी काफी दूर है. शेल तेल और गैस के विशाल भंडारों के बावजूद अमेरिका को हर दिन 70 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात करना पड़ता है. बहुत सी अमेरिकी रिफाइनरियों को ठीक से काम करने के लिए हल्के और भारी कच्चे तेल का एक मिश्रण चाहिए होता है. चूंकि घरेलू शेल तेल ज्यादातर बहुत हल्का होता है, इसलिए सऊदी अरब जैसे देशों से भारी कच्चे तेल की जरूरत पड़ती है.

अगर ट्रंप प्रशासन सऊदी अरब से आयात बंद करता है तो फिर मध्यम और भारी किस्म के कच्चे तेल की आपूर्ति उसे अन्य उत्पादकों से लेनी होगी. इराक, ईरान, रूस या फिर वेनेजुएला से? एक्सोन और शेवरोन जैसी बड़ी तेल कंपनियां नहीं चाहेंगी कि अभी उन्हें जहां से आपूर्ति हो रही है, उसमें कोई बाधा आए. ये कंपनियां राजनीतिक रूप से भी काफी असर और रसूख रखती हैं. कई अन्य स्वतंत्र रिफाइनरी भी इसका विरोध करेंगी. इसके अलावा अमेरिका सऊदी अरब से तेल खरीद के मामले में कोई भेदभाव इसलिए भी नहीं कर सकता है क्योंकि दोनों ही देश विश्व व्यापार संगठन के सदस्य हैं.

एके/वीके (रॉयटर्स)

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