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दुनिया

ऐसे होना चाहिए खतना पीड़ित महिलाओं का इलाज

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पहली बार उन महिलाओं के इलाज के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं जिनके जननांग परंपराओं के नाम पर काट दिए जाते हैं. डब्ल्यूएचओ ने साफ तौर पर बताया है कि डॉक्टरों को पीड़ितों का इलाज कैसे करना चाहिए.

यूएन की हेल्थ एजेंसी डब्ल्यूएचओ का मानना है कि दुनियाभर में 20 करोड़ महिलाएं और लड़कियां जननांगों के काटने जैसी दर्दनाक और अमानवीय परंपराओं का शिकार होती हैं. इन महिलाओं को कई तरह की पीड़ा से गुजरना होता है क्योंकि इलाज को कोई तरीका ही नहीं है. जननांगों को काट दिए जाने के बाद बहुत ज्यादा मात्रा में खून के बहने, पेशाब करते वक्त असहनीय दर्द, सेक्स के दौरान पीड़ा इन महिलाओं की जिंदगी का हिस्सा बन जाते हैं. कुछ महिलाओं के लिए तो खतना जानलेवा तक साबित होता है. इसके अलावा प्रसव के दौरान जान पर बन आना या फिर ताउम्र एक मानसिक तनाव से गुजरना इस खतने का एक पीड़ादायक परिणाम है.

महिलाओं का खतना सबसे ज्यादा अफ्रीका में प्रचलित है. अपराध करार दिए जाने के बावजूद यहां करीब 30 देशों में ऐसी परंपराएं हैं. इसके अलावा एशिया और मध्य-पूर्व के कुछ हिस्सों से भी ऐसी खबरें आती रही हैं. इन सभी हिस्सों के डॉक्टरों का ऐसी पीड़ितों के इलाज का रिकॉर्ड काफी खराब है. लेकिन बड़ी संख्या में विस्थापन के चलते खतने की यह समस्या पश्चिमी देशों में भी पहुंच चुकी है. डब्ल्यूएचओ ने जोर देकर कहा है कि पश्चिमी डॉक्टरों को इससे निपटने के लिए तैयार रहना चाहिए.

एक बयान में संगठन ने कहा, “स्वास्थ्यकर्मी अक्सर महिलाओं के खतने के नतीजों से अनजान होते हैं. ऐसे बहुत से स्वास्थ्यकर्मी हैं जो इन नतीजों के लक्षणों को पहचानने और उनका इलाज करने के लिए प्रशिक्षित नहीं हैं. इसलिए पीड़ितों को गैरजरूरी पीड़ा से गुजरना पड़ता है.” खतरे में जीने वाले लोगों पर विशेष जानकारी रखने वालीं विश्व स्वास्थ्य संगठन की विशेषज्ञ लाले से बताती हैं कि यह समस्या दुनियाभर में फैल चुकी हैं. से कहती हैं कि अमेरिका में ही पांच लाख से ज्यादा महिलाएं और लड़कियां या तो खतने से गुजर चुकी हैं या उसके खतरे की जद में हैं. से के मुताबिक ब्रिटेन में ऐसी महिलाओं की संख्या 66 हजार के करीब है.

डब्ल्यूएचओ में मांओं और गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य के विशेषज्ञ डोरिस चो कहते हैं कि पश्चिम के डॉक्टरों को पता ही नहीं होता कि जिसका इलाज कर रहे हैं वह समस्या है क्या. जब उनके सामने खतना पीड़ित महिला लाई जाती है तो उनके पास कोई विशेषज्ञता नहीं होती जिससे जरूरी इलाज लगभग असंभव हो जाता है. चो बताती हैं कि खतने का एक परिणाम यह भी होता है कि योनि बंद हो जाती है. इस वजह से डिलीवरी के दौरान बच्चे बर्थ कनाल में फंस सकते हैं और उनकी मौत भी हो सकती है. ऐसे में डब्ल्यूएचओ एक खास तरह की सर्जरी के जरिए योनि को खोलने की सलाह देता है ताकि बच्चे का जन्म हो सके.

डब्ल्यूएचओ के एक्सपर्ट बताते हैं कि उनके पास ठोस आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं इसलिए इस बारे में दिशा-निर्देश बनाना काफी मुश्किल काम था. इसलिए यह स्पष्ट कर दिया गया है कि कुछ निर्देश बहुत कम तथ्यों पर आधारित हैं.

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