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दुनिया

अमेरिका ने सऊदी अरब को हथियारों की बिक्री रोकी

अमेरिका ने अपने सहयोगी सऊदी अरब को अहम हथियार देने पर रोक लगा दी है. यमन में सऊदी अरब की कार्रवाई के दौरान आम लोगों की मौतों पर नाराजगी के कारण यह फैसला किया गया है.

सऊदी अरब पर आरोप लग रहे हैं कि वह यमन में ईरान समर्थित हूथी बागियों के खिलाफ युद्ध छेड़े हुए है. अमेरिकी प्रशासन के एक अधिकारी ने एएफपी को बताया, "हमने साफ कर दिया है कि अमेरिकी सुरक्षा सहयोग कोई धर्म खाता नहीं है. इसीलिए हमने फैसला किया है कि हथियारों की कुछ बिक्री रोक दी जाए." अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक यह कदम यमन में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन की कार्रवाइयों को लेकर गंभीर चिंताओं के मद्देनजर लिया गया है.

एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने भी पुष्टि की है कि सऊदी अरब को लक्ष्यों को सटीकता के साथ निशाना बनाने वाले हथियारों की बिक्री रोक दी गई है. हालांकि सऊदी अरब ने इस बारे में कुछ भी नहीं कहा है. लेकिन इससे दोनों निकट सहयोगियों के बीच मतभेद एक बार फिर खुल कर सामने आ गए हैं.

परमाणु हथियारों के खिलाफ खड़ा नन्हा सा देश

यमन में जारी कार्रवाई को सऊदी अरब के युवा प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ जोड़ कर देखा जाता है, जिनका कद और दबदबा सऊदी अरब के शाही परिवार में यकायक बढ़ गया है. वैसे ईरान के साथ परमाणु समझौते पर भी सऊदी अरब को आपत्तियां रही हैं. इसके अलावा जब कांग्रेस ने 11 सितंबर 2001 के आतंकवादी हमले के लिए सऊदी अरब के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने वाला बिल पास किया, तो दोनों देशों के संबंधों में और तल्खी आई.

ओबामा ने इस प्रस्ताव पर वीटो किया था, लेकिन उसे खारिज कर दिया. ओबामा के आठ साल के कार्यकाल में यह पहला मौका था जब उनके किसी वीटो को नहीं माना गया. लेकिन अमेरिका और सऊदी अरब के रिश्तों में असली खटास उस वक्त आई जब यमन में अक्टूबर महीने में एक जनाजे के दौरान जमा लोगों पर सऊदी गठबंधन ने बम गिराए जिसमें 140 लोग मारे गए.

ये हैं सबसे ज्यादा हथियार बेचने वाली कंपनियां

इसके बाद अमेरिका ने घोषणा की कि वह इस बात की समीक्षा करेगा कि सऊदी गठबंधन की कार्वराई अमेरिकी विदेश नीति और उसके मूल्यों के अनुरूप है या नहीं. संयुक्त राष्ट्र के एक पैनल ने कहा कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का उल्लंघन था.

अमेरिका की तरफ से हथियारों की बिक्री पर रोक की घोषणा पर सऊदी अरब की तरफ से अभी कुछ नहीं कहा गया है. यमन में सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल अहमद असीरी का कहना है, "हम गुमनाम तरीके से दिए जाने वाले बयानों पर टिप्पणी नहीं करते."

सऊदी गठबंधन ने यमन में हूथी बागियों के खिलाफ मार्च 2015 में हवाई हमले शुरू किए थे. हूथी बागियों का राजधानी सना समेत देश के एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण है. सऊदी अरब और उसके खाड़ी सहयोगी यमन के निर्वासित राष्ट्रपति अब्द रब्बू मंसूर हादी की सरकार को सत्ता में बहाल करना चाहते हैं. संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यमन के संकट में अब तक सात हजार लोग मारे जा चुके हैं.

एके/वीके (एएफपी)

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