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दुनिया

तुर्की के कानून पर ट्वीट से फंसीं स्वीडन की विदेश मंत्री

तुर्की में बच्चों के शोषण से जुड़ा एक कानून इन दिनों सुर्खियों में है. कानून में संशोधन होना है और अब तक यह साफ नहीं है कि बदलाव बच्चों के हक में होने जा रहा है या शोषण करने वालों के.

स्वीडन की विदेश मंत्री मारगॉट वालस्ट्रोम ने तुर्की के नए कानून के बारे में ट्वीट करते हुए कहा, "तुर्की को 15 साल से कम उम्र के बच्चों के साथ सेक्स को जायज बताने का अपना फैसला बदलना होगा. बच्चों को हिंसा और यौन शोषण से और भी ज्यादा सुरक्षा की जरूरत है, इसे कम करने की नहीं." वालस्ट्रोम के इस ट्वीट पर तुर्की ने तीखी प्रतिक्रया दी और कहा कि उनके देश के कानून को तोड़-मरोड़ कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा रहा है. स्वीडन के साथ साथ तुर्की ऑस्ट्रिया पर भी भड़का क्योंकि राजधानी विएना के हवाई अड्डे पर एक न्यूज टिकर में भी इसी तरह की हेडलाइन चली. दोनों ही देशों को तुर्की ने सफाई देने के लिए कहा है.

तुर्की के विदेश मंत्री मेवलुत कावुसोग्लु ने एक बयान जारी कर कहा, "तुर्की पर जो इल्जाम लगाए जा रहे हैं कि यहां 15 साल से कम उम्र के बच्चों का शोषण करने वालों को सजा नहीं दी जाती, ये बेबुनियाद हैं." साथ ही उन्होंने स्वीडन की विदेश मंत्री को "झूठ" फैलाने के लिए जिम्मेदार बताया है. उन्होंने यहां तक कहा कि विदेश मंत्री का ट्वीट और ऑस्ट्रिया की हेडलाइन "यूरोप में फैल रही इस्लाम विरोधी और तुर्की विरोधी" विचारधारा को दर्शाते हैं.

देखिए, तुर्की में तख्तापलट नाकाम क्यों हुआ

दरअसल तुर्की की एक अदालत ने पिछले महीने दंड सहिता के उस हिस्से को हटाने की बात कही जिसमें बच्चों के खिलाफ किसी भी तरह के यौन व्यवहार को अपराध माना जाता है. अदालत का कहना था कि हर मामले को अलग अलग तरह से देखना जरूरी है. कोर्ट की राय है कि चार साल की बच्ची का बलात्कार करने वाले और 15 साल की लड़की के साथ उसकी मर्जी से संबंध बनाने वाले को एक जैसी सजा नहीं दी जा सकती.

न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी कहा कि दिसंबर तक पुराने ही कानून को अमल में रहने दिया जाएगा ताकि सरकार के पास नया कानून बनाने का वक्त हो. एक सरकारी अधिकारी ने समाचार एजेंसी डीपीए को अपना नाम ना बताने की शर्त पर कहा है कि सरकार के पास नए कानून का मसौदा तैयार है. अधिकारी के अनुसार नए कानून में बच्चों के किसी भी तरह के शोषण से बचाने पर ध्यान दिया गया है और ऐसे मामलों में आठ से पंद्रह साल की कैद का प्रावधान होगा.

तस्वीरें बताएंगी, क्यों जरूरी है तुर्की

तुर्की की शिकायत के बाद विएना एयरपोर्ट पर चल रहे न्यूज स्क्रॉल से इस हेडलाइन को हटा लिया गया. इससे पहले भी तुर्की इस तरह की मांग कर चुका है. कुछ वक्त पहले इसी हवाई अड्डे पर न्यूज टिकर में लिखा गया था कि तुर्की जाने का मतलब वहां के राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एर्दोआन का साथ देना होगा. तुर्की और ऑस्ट्रिया के बीच पिछले कुछ हफ्तों से तनाव चल रहा है. देश में तख्तापलट की विफल कोशिश के बाद से ऑस्ट्रिया खुल कर एर्दोआन को तानाशाह कह रहा है और उसके यूरोपीय संघ का हिस्सा बनने के रास्ते में अटका है. बदले में तुर्की ऑस्ट्रिया को नस्लवाद को बढ़ावा देने वाला बता रहा है.

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