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दुनिया

नए कैदियों के लिए तुर्की ने रिहा किए 38,000 पुराने कैदी

तुर्की ने नाकाम सैनिक विद्रोह में शामिल रहे लोगों को जेल में रखने के लिए 38,000 कैदियों को रिहा किया. जर्मनी के साथ एक नए विवाद में तुर्की ने इन आरोपों का खंडन किया है कि वह इस्लामी कट्टरपंथी गुटों का अड्डा बन गया है.

तुर्की करीब 38,000 ऐसे कैदियों को रिहा कर रहा है जिन्हें असफल रहे सैनिक विद्रोह से पहले सजा सुनाई गई थी. कानून मंत्री बेकीर बोजदाग ने कहा है कि उन्हें क्षमादान नहीं दिया जा रहा है बल्कि उनकी शर्तों के साथ रिहाई की जा रही है. ये ऐसे लोग हैं जिन्होंने पहली जुलाई 2016 से पहले अपराध किया था. इनमें वे लोग शामिल नहीं है जिन्हें हत्या या यौन संबंधी अपराधों के कारण सजा मिली है.

राष्ट्रपति रेचेप तय्यप एर्दोआन ने 20 जुलाई को देश में तीन महीने के लिए आपातकाल लगाने की घोषणा की थी. उसके बाद से वे अध्यादेशों के जरिये शासन कर सकते हैं. एक अन्य अध्यादेश के जरिये 2000 पुलिसकर्मियों और सौ से ज्यादा सैनिक अधिकारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है. उनपर अमेरिका में रहने वाले तुर्क उपदेशक फेतुल्लाह गुलेन से संबंधित होने का आरोप है. तुर्की सैनिक विद्रोह की कोशिश के पीछे गुलेन का हाथ मानता है और गुलेन के आंदोलन को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुका है.

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मीडिया रिपोर्टों के अनुसार तुर्की के जेल भरे हुए हैं. सीएनएन तुर्क के अनुसार पिछली गर्मियों में तुर्की में कुल 286 जेल थे जिनकी क्षमता 184,000 कैदियों को रखने की थी. लेकिन उस समय 187,000 लोग कैद थे. अब सैनिक विद्रोह करने वालों के साथ जुड़े होने के आरोप में तुर्की ने 17,000 लोगों को हिरासत में ले रखा है.

इस बीच तुर्की ने जर्मनी में एक गोपनीय सरकारी दस्तावेज के सामने आने के बाद जर्मन सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है. इसमें कहा गया था कि तुर्की इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों का केंद्रीय मंच बन गया है. जर्मन संसद में वामपंथी संसदीय दल के एक सवाल के गोपनीय जवाब में जर्मन सरकार का कहना था कि तुर्की कदम दर कदम "इस्लामी संगठनों का केंद्रीय एक्शन प्लैटफॉर्म" हो गया है. डी लिंके संसदीय सदस्य को दिए गए जवाब में जर्मन सरकार ने मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड और फलीस्तीनी हमास संगठन के साथ तुर्की सरकार के संबंधों का हवाला दिया है. हमास को यूरोपीय संघ और अमेरिका में कट्टरपंथी संगठन घोषित किया गया है.

इस्तांबुल पर आतंकवाद का कहर

तुर्की ने जर्मनी के इस आरोप को ठुकरा दिया है कि अंकारा सरकार इस्लामी कट्टरपंथियों के साथ मिली हुई है. तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि जर्मन सरकार का यह आकलन एक बार फिर उल्टी मानसिकता दिखाता है जिसका लक्ष्य राष्ट्रपति एर्दोआन हैं. तुर्की के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि यह साफ है कि इस तरह के आरोपों के पीछे जर्मनी के राजनीतिक हलके हैं जो आतंकवाद विरोधी संघर्ष में अपने दोहरे रुख के लिए जाने जाते हैं, जिसमें प्रतिबंधित कुर्द पार्टी पीकेके के खिलाफ संघर्ष भी शामिल है. सैनिक विद्रोह के बाद जर्मनी के साथ तुर्की के संबंध लगातार खराब होते जा रहे हैं.

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