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दुनिया

असल में खुश तो प्लास्टिक बनाने वाले हैं

भारत हो या चीन, हर ओर से प्लास्टिक उद्योग के लिए अच्छी खबरें आ रही हैं. मांग में इतनी ज्यादा बढ़ोतरी की उम्मीद पहले कभी नहीं थी.

भारत की अगले छह साल में 10 करोड़ से ज्यादा टॉयलेट बनाने योजना है. चीन नई सिल्क रोड बना रहा है ताकि एशिया के शहरों में करोड़ों लोगों की आवाजाही हो सके. इन खबरों से सबसे ज्यादा खुश प्लास्टिक बनाने वाले हैं. खासकर एशियाई पेट्रोकेमिकल्स निर्माताओं की तो बांछें खिली हुई हैं. उन्हें उम्मीद है कि उनका व्यापार दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की करने वाला है.

बैंक कार्डों से लेकर पाइपों तक में इस्तेमाल होने वाले पीवीसी यानी पॉली विनाइल क्लोराइड के वायदा भाव इस साल 80 फीसदी से भी ज्यादा बढ़ चुके हैं. तेल उद्योग में पेट्रोकेमिकल्स का हिस्सा एक विशेष तबके के पास होता है जो ज्यादा बड़ा नहीं है. इस वक्त जितनी भी चीजें दुनिया में बनाई जा रही हैं उनमें से 70 फीसदी में प्लास्टिक का इस्तेमाल होता है. मोबाइल फोन से लेकर योगा पैंट्स तक और कारों से लेकर फूड पैकेजिंग तक हर चीज प्लास्टिक पर टिकी है. इस वजह से प्लास्टिक और इससे जुड़े सारे उद्योगों की मांग में लगातार इजाफा हो रहा है. इथाइलीन की सालाना मांग तो आने वाले दशक में 10 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावनाएं हैं. भारत के स्वच्छ भारत अभियान जैसी योजनाओं को इसका श्रेय जाता है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2022 तक खुले में शौच को पूरी तरह खत्म करने की योजना बनाई है. इस योजना का भारतीय पेट्रोकेमिकल उद्योग ने प्लास्टिक उद्योग के लिए वरदान बताते हुए स्वागत किया है क्योंकि इस योजना के लिए करोड़ों टॉयलेट्स बनाने होंगे. इनमें पाइपों का इस्तेमाल होगा जो प्लास्टिक से बनेंगी.

इंडियन ऑइल कॉरपोरेशन के चेरमैन बी. अशोक कहते हैं, "प्रति व्यक्ति उपभोग बहुत कम है इसलिए पेट्रोकेमिकल्स की मांग में भारी बढ़ोतरी की गुंजाइश है. प्लास्टिक का इस्तेमाल तो हर चीज में होता है." दक्षिण कोरिया में युआंता सिक्यॉरिटीज में बतौर विश्लेषक काम कर रहे ह्वांग क्यू-वोन कहते हैं कि सिर्फ टॉयलेट्स की वजह से ही मांग नहीं बढ़ रही है. वह कहते हैं, "भारत में यूं भी पीवीसी की सप्लाई कम है. इसलिए दक्षिण कोरिया जैसे देशों से आयात हो रहा है और यह आयात बढ़ रहा है. इसलिए कोरियाई निर्यात में भी वृद्धि हो रही है."

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प्लास्टिक उद्योग के लिए चीन से भी अच्छी खबरें आ रही हैं. चीन की योजना है वन बेल्ट, वन रोड. इसके तहत चीन, मध्य एशिया, अफ्रीका और यूरोप के बीच रेल लाइनों, जहाजरानी और फैक्ट्रियों का विशाल नेटवर्क खड़ा होना है. केमिकल मार्केट रिसर्च इंक के मुख्य सलाहकार लूना किम कहते हैं कि इस योजना के लिए करोड़ों टन प्लास्टिक की जरूरत होगी.

वीके/ओएसजे (रॉयटर्स)

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