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दुनिया

यौन उत्पीड़न पर चुप्पी तोड़ने वाली महिलाएं पर्सन ऑफ द ईयर

अमेरिका की प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने यौन उत्पीड़न के खिलाफ चुप्पी तोड़ने वाली महिलाओं को 'पर्सन ऑफ द ईयर' चुना है. 2017 में महिलाओं के यौन उत्पीड़न से जुड़े कई बड़े मामले सामने आये.

टाइम पत्रिका ने बुधवार को अपने पर्सन ऑफ द ईयर का एलान किया. इसके तहत उन सभी महिलाओं के हौसले को सम्मानित किया गया है जिन्होंने अपने खिलाफ यौन हमले और दुर्व्यवहार के बारे दुनिया को खुल कर बताने की हिम्मत की. इससे ऐसे कई मामले सामने आये जिन पर या तो पर्दा पड़ा था फिर जिन्हें अनदेखा किया जा रहा था.

कैपिटल हिल पर भी यौन उत्पीड़न के मामले

100 में से 99 लड़कियां यौन उत्पीड़न पर रहती हैं खामोश

टाइम का कहना है, "लग सकता है कि यह अहसास रातों रात पैदा हुआ. लेकिन मुद्दा सालों, दशकों और सदियों से सुलग रहा है. महिलाएं अपने ऐसे बॉस या सहकर्मियों के हाथों उत्पीड़न का शिकार हुई जिन्होंने न सिर्फ सीमारेखा को पार किया, बल्कि शायद वे यह जानना ही नहीं चाहते थे कि कोई सीमारेखा है भी." पत्रिका के मुताबिक, "उन्हें दुष्परिणाम भुगतने, खारिज होने और नौकरी से निकाले जाने का डर था और नौकरी खोने के बारे में वह सोच नहीं सकती थीं."

पत्रिका ने अपने कवर पर जिन महिलाओं को को जगह दी, उनमें अभिनेत्री एशले जूड शामिल हैं. जूड हॉलीवुड के मशहूर प्रोड्यूसर हार्वे वाइनस्टीन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली कई महिलाओं में शामिल हैं. वाइनस्टीन के बेनकाब होने के बाद सैकड़ों महिलाओं ने अपने उत्पीड़न के बारे में बात की. दुनिया भर में #MeToo के महिलाओं ने साथ अपने यौन उत्पीड़न के बारे में बताया.

कई बड़े पत्रकारों, राजनेताओं और उद्योगपतियों पर भी संगीन आरोप लगे जिनमें केविन स्पेसी, जॉर्ड एच डब्ल्यू बुश, चार्ली रोज, और राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप भी शामिल हैं. टाइम पत्रिका हर साल दिसंबर में किसी ऐसे व्यक्ति, समूह या विचार को पर्सन ऑफ द ईयर चुनती है, जिसके कारण दुनिया पर अच्छा या बुरा लेकिन व्यापक असर पड़ा हो.

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