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दुनिया

आतंकी हमलों के बीच क्या यूरोप में छुट्टियां बिताना ठीक रहेगा?

दुनिया भर की सरकारें अपने नागरिकों से अपील कर रही हैं कि आतंकी हमलों के मद्देनजर यूरोप घूमने का प्लान ना बनाएं. हालांकि बहुत लोग यूरोप से दूरी बना रहे हैं लेकिन कुल मिला कर टूरिज्म अब भी बढ़ रहा है.

बेल्जियम का ब्रसेल्स, फ्रांस का पेरिस, फिर नीस, और अब जर्मनी का वुर्जबर्ग. धीरे धीरे पूरा यूरोप ही आतंक की जद में आता दिख रहा है. जहां यूरोप की सरकारें इस समस्या से परेशान हैं, तो वहीं यूरोप के बाहर के देश भी कम चिंतित नहीं हैं क्योंकि इन हमलों में केवल स्थानीय लोगों की ही नहीं, विदेशियों की भी जानें गयी हैं. अधिकतर मामलों में ये विदेशी टूरिस्ट थे, जो यूरोप घूमने आए थे. अमेरिका ने मई में अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की कि अगले तीन महीनों के लिए यूरोप से दूर ही रहें तो बेहतर है. तीन महीने इसलिए क्योंकि इस तरह की चेतावनियां अक्सर छोटे समय के लिए ही जारी की जा सकती हैं. अमेरिका इस अवधि को जितना खींच सकता था, उसने खींचा.

जर्मनी में हुए हमले के बाद चीन ने भी चेतावनी जारी की है कि नागरिक जहां भी जाएं, संभल कर रहें, भीड़ भाड़ वाली जगहों से दूर रहें. हालांकि चीन का कहना है कि वह अब भी जर्मनी को "सुरक्षित जगह" मानता है, इसलिए उसने अपने नागरिकों को वहां ना जाने की हिदायत नहीं दी है. जर्मनी की लोकल ट्रेन में हुए हमले में घायल हुए चारों लोग हांगकांग के रहने वाले थे.

इससे पहले जब मार्च में ब्रसेल्स के हवाई अड्डे पर हमला हुआ, तब भारत सरकार ने भी बेल्जियम में रह रहे अपने नागरिकों से सुरक्षित जगहों पर रहने की अपील की थी. सरकार ने लोगों से अपने परिवार के संपर्क में रहने को कहा, जरूरत पड़ने पर दूतावास से भी बात करने का सुझाव दिया.

देखें: बाबा वंगा ने की थी भविष्यवाणी, बुरा होगा यूरोप के लिए 2016

ये कुछ उदाहरण हैं. पूरी दुनिया की सरकारें इसी तरह के सुझाव दे रही हैं. लेकिन क्या लोगों पर वाकई इसका असर पड़ रहा है? वर्ल्ड ट्रैवल ऐंड टूरिज्म काउंसिल के निदेशक डेविड स्कोसिल ने डॉयचे वेले को बताया कि आतंकी हमलों के बावजूद बिजनेस बढ़ रहा है, "पिछले साल हम 3.5 प्रतिशत की दर से बढ़े और 2016 में भी उसी दर से हमारा मुनाफा जारी है."

लेकिन इसकी क्या वजह हो सकती है कि बढ़ते हमलों के बावजूद लोग यूरोप का रुख कर रहे हैं? इस पर स्कोसिल कहते हैं कि टूरिज्म पर दो तरह के हमलों का असर होता है. एक वो जिनमें पर्यटकों को ही निशाना बनाया जाता है. वे बताते हैं कि 2015 में ट्यूनीशिया में हुए हमले और मिस्र में रूसी विमान हादसे के बाद टूरिज्म पर इतना बुरा असर पड़ा कि उससे उबरने में दो साल लग गए. दूसरी किस्म के हमले वो हैं, जिनमें खास तौर से पर्यटकों को निशाना नहीं बनाया जाता, जैसे कि इस साल यूरोप के अलग अलग शहरों में हुए हमले. "इन मामलों में लोग दहशत का शिकार होते हैं लेकिन जल्द ही उससे उबर भी आते हैं. आम तौर पर छह महीने का वक्त लगता है क्योंकि उसके बाद मीडिया में कहानियां छपनी बंद हो जाती हैं और लोग फिर से घूमने निकल पड़ते हैं."

अमेरिका में लोगों को ट्रैवल इंशॉरेंस बेचने वाली एक वेबसाइट के मालिक स्टैन सैंडबर्ग बताते हैं कि यूरोप में हुए हर हमले के बाद उनके पास कई लोगों के सवाल आए. सब जानना चाहते थे कि क्या यूरोप जाना सही रहेगा. लेकिन अंत में उन्होंने देखा कि इतने सवालों के बावजूद अपनी ट्रिप कैंसल करने वालों की संख्या ना के बराबर थी. स्कोसिल भी इस बात की पुष्टि करते हैं "हम बड़ी संख्या में कैंसलेशन नहीं देख रहे हैं. लोग अब भी यूरोप आ रहे हैं. बस पिछले 12 महीने में कहां कहां क्या क्या हुआ, उसके हिसाब से वो जगह बदल लेते हैं."

यूरोप में जुलाई से ले कर सितंबर तक का समय पर्यटन के लिहाज से अहम होता है. इसी दौरान यहां गर्मियां होती हैं और लोग फिल्मों के सीन जैसे यूरोप का मजा लेने यहां पहुंचते हैं. इस दौरान भारत से भी बड़ी संख्या में लोग यहां आते हैं, खास कर ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड. अगर आप भी यूरोप आने का प्लान बना रहे हैं, तो थोड़ा देख समझ कर ही अपनी बुकिंग्स करें.

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