1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

थाईलैंड की एड्स के खिलाफ लड़ाई में बड़ी जीत

थाईलैंड ने वह हासिल कर लिया है जो एशिया का कोई और मुल्क नहीं कर पाया है. यहां अब गर्भवती मां से बच्चे को एचआईवी संक्रमण नहीं होगा. डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि थाईलैंड की विजय एड्स के खिलाफ लड़ाई में एक अहम पड़ाव है.

थाईलैंड के उन स्वास्थ्यकर्मियों के लिए यह वाकई बहुत बड़ी जीत है, जो एड्स को साफ करने में जी-जान से जुटे हैं. उन्होंने एशिया के सबसे ज्यादा एचआईवी प्रभावित देश को यह उपलब्धि दिलाई है. इस जीत को अहम बताते हुए डब्ल्यूएचओ ने कहा, "एचआईवी को पहली बार महामारी के रूप में झेलने वाला थाईलैंड अब एड्स मुक्त नई पीढ़ी सुनिश्चित करने में कामयाब हो गया है."

हालांकि, बेलारूस और आर्मेनिया ने भी मां से बच्चे में एचआईवी संक्रमण पर थाईलैंड के साथ ही मुक्ति पा ली है लेकिन वहां एड्स का प्रभाव बहुत कम है. क्यूबा तो बीते साल जुलाई में ही इस लड़ाई में जीत हासिल कर चुका है लेकिन तब विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक अलग थे. नए मानकों पर सबसे पहले थाईलैंड खरा उतरा है.

मां से बच्चे को एचआईवी का खतरा काफी ज्यादा होता है. डबल्यूएचओ का कहना है कि अगर इलाज न किया जाए तो एचआईवी पीड़ित मां से बच्चे में संक्रमण जाने की संभावना 15 से 45 फीसदी तक होती है. ऐसा जन्म के बाद दूध पिलाने से भी हो सकता है. लेकिन प्रेग्नेंसी के दौरान ऐंटिवायरल ड्रग्स लेकर इस खतरे को एक फीसदी तक घटाया जा सकता है.

2000 में थाईलैंड ने इस संक्रमण के खिलाफ जंग छेड़ी. पूरे देश में एचआईवी प्रभावित गर्भवती महिलाओं को मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई गई. लगातार और नियमित स्क्रीनिंग हुई. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक साल 2000 में एक हजार ऐसे बच्चे पैदा हुए जिन्हें अपनी मां के गर्भ से एचआईवी मिला. 2015 में यह संख्या घटकर 85 रह गई. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक इस संख्या के आधार पर देश को संक्रमण मुक्त घोषित किया जा सकता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि अभी जो दवा उपलब्ध है, वह 100 फीसदी इलाज की गांरटी नहीं दे सकती.

कैसी होती है सेक्स वर्कर्स के बच्चों की जिंदगी, देखें तस्वीरों में

थाईलैंड के लिए यह बहुत बड़ा फेरबदल है. 1990 में वहां एक लाख एचआईवी प्रभावित लोग थे जो तीन साल बाद बढ़कर 10 लाख हो गए थे. थाईलैंड सेक्स व्यापार के लिए जाना जाता है और दुनियाभर से टूरिस्ट वहां आते हैं. इसलिए यह संख्या हड़कंप मचा देने वाली थी. स्वास्थ्यकर्मियों को सरकार की इस लड़ाई की शुरुआत में ही काफी वक्त लगा. 1990 के दशक में सेक्स वर्कर्स को मुफ्त कॉन्डम बांटने से यह जंग शुरू हुई थी.

यूएनएड्स के एग्जेक्यूटिव डायरेक्टर मिशेल सिदबी ने कहा, "थाईलैंड की प्रगति दिखाती है कि जब चिकित्सा विज्ञान और राजनीतिक प्रतिबद्धता मिलकर काम करते हैं तो कितना कुछ हासिल किया जा सकता है."

लेकिन यह सिर्फ एक पड़ाव है. बड़ी लड़ाई अभी बाकी है. यूएन के आंकड़ों के मुताबिक देश में पांच लाख एचआईवी प्रभावित लोग हैं. हाल के सालों में संक्रमण दर बढ़ी है, खासकर समलैंगिक पुरुषों में.

हर साल दुनियाभर में 14 लाख एचआईवी पीड़ित महिलाएं प्रेग्नेंट होती हैं. 2009 में चार लाख ऐसे बच्चे जन्मे जिन्हें गर्भ से ही एचआईवी मिला था. 2013 तक यह तादाद घटकर दो लाख 40 हजार रह गई थी.

वीके/आईबी (एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री