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दुनिया

एक अस्पताल, जहां जमकर हो रहा है नाच-गाना

अर्जन्टीना का एक मानसिक रोग अस्पताल इलाज के लिए अनोखा तरीका अपना रहा है. वहां लोग नाचते हैं, गाते हैं और खूब हंसते है.

ब्यूनोस आयर्स के साइकियाट्रिक अस्पताल को देखने से कोई सुकून नहीं मिलता. एक पुरानी सी इमारत जिसके भीतर मानसिक बीमारियां झेल रहे लोग रहते हैं, यह बात सोचकर ही मन उदास हो जाता है. लेकिन फिर, वहां से टैंगों की धुनें सुनाई देने लगती हैं. ऐसी धुनें जो मन को झूमने पर मजबूर कर दें. अंदर मरीज झूम ही रहे हैं. वे इन धुनों पर नाच रहे हैं.

अर्जेंटीना के इस बोरदा अस्पताल में अब मरीज गोलियां लेने के लिए लाइन नहीं लगाते. वे लाइन लगाते हैं डांस करने के लिए. अर्जेंटीना का मशहूर टैंगो डांस इन लोगों के मर्ज का इलाज बन गया है. महीने में दो बार टैंगो की क्लास होती है जिसका नाम है, “हम टैंगों के लिए पागल हैं.” डांस टीचर लॉरा सीगादे बताती हैं, “मानसिक बीमारियों से ग्रस्त लोग यूं तो पैसिव रिसेप्टर होते हैं लेकिन टैंगो के मामले में वे ट्रांसमीटर हो जाते हैं.”

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सीगादे बताती हैं कि हम उन्हें बीमार नहीं इंसान महसूस कराने की कोशिश करते हैं. वह कहती हैं, “लोग यहां बीमार बनकर आते हैं लेकिन जब लौटते हैं स्टूडेंट बनकर. तब उनके चेहरे पर मुस्कुराहट होती है.”

बोरदा अर्जेंटीना में पुरुषों का सबसे बड़ा मानसिक रोग अस्पताल है. लेकिन टैंगो में तो जोड़ा होता है, यानी पुरुष के साथ महिला भी होती है. डांस पार्टनर बाहर से आती हैं. ऐसी महिलाएं जिन्हें टैंगो पसंद है, यहां इन मरीजों के साथ डांस करने के लिए आती हैं. अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ गिलेर्मो होनिग कहते हैं कि टैंगो से मरीजों की रचनात्मकता और शरीर के प्रति उनकी जागरूकता का अभ्यास हो जाता है.

एक मरीज मैक्सिमिलानो कहते हैं, “मुझे लगा कि आज मैं एक बेहतर डांसर बन गया हूं. राहत भी ज्यादा है.” मैक्सिमिलानो अस्पताल में भर्ती नहीं हैं. वह सिर्फ आउटडोर मरीज हैं, डॉक्टर दिखाने आते हैं लेकिन उन्होंने क्लास में दाखिला ले लिया है, उन दर्जनों मरीजों के साथ जो अस्पताल में भर्ती हैं.

इस टैंगो वर्कशॉप की शुरुआत मनोवैज्ञानिक सिलवाना पर्ल ने की है. क्लास से पहले वह खुद मरीजों को जमा करने के लिए गलियारों के चक्कर लगाती हैं. ज्यादातर मरीज आने से मना करते हैं. जैसे कोई कहता है कि मेरे पास वक्त नहीं है. लेकिन पर्ल जानती हैं कि कैसे समझाना है. वह बताती हैं, “अस्पताल में एक रूटीन होता है. टैंगो वर्कशॉप उस रूटीन को तोड़ती है. दरअसल, हम इन सिजोफ्रेनिक मरीजों की बोरियत भरी जिंदगी में घुसपैठ करना चाहते हैं. कला उनके भीतर सोये हुए जज्बात जगाती है और उन्हें एक दूसरे से, दुनिया से जोड़ती है.”

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और जहां टैंगो क्लास चल रही है, वहां आप हंसी-ठहाके सुन सकते हैं. वहां लगता नहीं है कि जिंदगी से हार मान बैठे लोगों का जमावड़ा है. 53 साल की डांस टीचर रोके सिलेस कहती हैं, “यह किसी भी सामान्य क्लास जैसा है. हर कोई अपना पूरा जोर लगाता है और मूव्स पूरे करने की कोशिश करता है. ऐसा नहीं है कि जो बता दिया बस उतना कर लिया. ये लोग खुद से सीखते हैं. कर-कर के सीखते हैं.”

वीके/एमजे (एएफपी)

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