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दुनिया

अब मोटे लोगों को भी मिलेगी स्विस आर्मी में जगह

स्विट्जरलैंड की सरकार ने कहा है कि मोटे लोगों को भी सेना में जगह मिल सकती है. सरकार के एक आयोग ने फैसला सुनाया है कि सेना को मोटे लोगों को भी भर्ती करना होगा.

फिलहाल नियम यह है कि तय सीमा से ज्यादा वजन के लोगों को सेना में प्रवेश नहीं मिलता जबकि देश में सैन्य सेवा अनिवार्य है. लेकिन मोटे लोगों को प्रवेश नहीं दिया जाता.

सुरक्षा नीति पर संसदीय आयोग ने कहा है कि सेना को ऐसे लोगों के लिए भी खोलना चाहिए जो शारीरिक रूप से कुछ हद तक अक्षम हैं. इनमें ऐसे लोग शामिल हैं जिन्हें सुनने में दिक्कत होती है या फिर वे लोग जो मामूली रूप से विकलांग हैं. साथ ही मोटे लोगों को भी बात की गई है.

वेबसाइट लोकल के मुताबिक सांसद एमपी मार्सेल ने कहा कि ऐसे लोग डेस्क-जॉब जैसे काम तो कर ही सकते हैं. उन्होंने कहा, "आप किसी ऐसे आईटी स्पेशलिस्ट की मिसाल लीजिए जो मोटा है. सिर्फ इसलिए उसे अयोग्य मान लिया जाता है क्योंकि वह शारीरिक अपेक्षाएं पूरी नहीं करता. लेकिन साइबर सुरक्षा के लिए उसे हथियार तो नहीं चलाना है. उसके मामले में शारीरिक क्षमताएं गैरजरूरी है."

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स्थानीय समाचार पत्र 20 मिनुटेन से बातचीत में मार्सेल ने कहा कि कंप्यूटर साइंस और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों में योग्यातओं का समुचित इस्तेमाल जरूरी है जबकि ये क्षेत्र लोगों की कमी से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा, "कोई उत्साहित है लेकिन उसे अयोग्य मान लिया जाता है जबकि वह एक निरुत्साहित लेकिन शारीरिक रूप से योग्य व्यक्ति से बेहतर काम कर सकता है."

स्विस आर्मी में फिलहाल उन लोगों को नहीं लिया जाता जिनका बॉडी मास इंडेक्स यानी बीएमआई 40 से ज्यादा है. अगर किसी का बीएमआई 30 से ज्यादा है और वह अच्छी शारीरिक स्थिति में नहीं है तो उसे भी सेना में भर्ती नहीं किया जाता. इस कारण साल 2012 में 672 लोगों की अर्जी खारिज हुई थी.

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आयोग की इस रिपोर्ट का कई हलकों में स्वागत हुआ है. स्विस ओबेसिटी फाउंडेशन के अध्यक्ष हाइनरिष फोन ग्रुनिगेन ने कहा है कि एक मोटे लेकिन मजबूत व्यक्ति को सेना में अपनी उपयोगिता साबित करने का मौका देना अच्छी बात होगी.

सेना के एक कर्नल वेर्नेर साल्जमान ने भी माना है कि मौजूदा नियम ज्यादा ही सख्त हैं. उन्होंने कहा, "बहुत से लोग तो छोटी-मोटी समस्याओं के कारण ही खारिज हो जाते हैं. हमें उनके लिए कुछ उपयोगी काम खोजना चाहिए."

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