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मनोरंजन

फिल्मों ने जर्मनी को दिखाया, वैसा नहीं है भारत

जर्मनी के श्टुटगार्ट में हुए इंडियन फिल्म फेस्टिवल में कन्नड़ फिल्म थीथी रही सर्वोत्तम. 60 फिल्मों ने भारत की अनोखी छवि पेश की.

13. Stuttgart Indisches Filmfestival Manuela Bastian

मानुएला बास्टियान, फिल्मकार

भारत का मतलब बस गरीबी, गंदगी, रेप और बीफ न रहे, यह काम विदेशों में भारतीय फिल्मों ने संभाल रखा है. वे भारत की मुख्तलिफ कहानियों को, उसके विभिन्न चेहरों को और उसकी अलग-अलग आवाजों को पेश करती रहती हैं. जर्मनी का श्टुटगार्ट इंडियन फिल्म फेस्टिवल इसी काम का जरिया बना. बीते हफ्ते 13वां भारतीय फिल्म समारोह हुआ. रविवार को संपन्न हुए इस फिल्म फेस्टिवल में भारत की लगभग 60 फिल्में दिखाई गईं. और अलग-अलग कैटेगरी में पुरस्कार भी दिए गए.

राम रेड्डी की कन्नड़ फिल्म थीथी को सर्वोत्तम फिल्म चुना गया और जर्मन स्टार ऑफ इंडिया अवॉर्ड से नवाजा गया. मई में भारत में रिलीज हुई यह फिल्म ऐसे कलाकारों को लेकर बनाई गई है जो प्रोफेशनल एक्टर्स नहीं हैं. कर्नाटक के मंड्या जिले के गांवों के लोगों ने इस फिल्म में एक्टिंग की है. यह फिल्म एक परिवार की तीन पीढ़ियों के पुरुषों की कहानी है जो 101 साल के बुजुर्ग की मौत के इर्द-गिर्द घूमती है. सामाजिक ताने-बाने की गड़बड़ियों पर कटाक्ष करती इस फिल्म ने जर्मनी के लोगों को भी हंसाया. इससे पहले यह फिल्म लोकार्नो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी गोल्डन लेपर्ड अवॉर्ड जीत चुकी है. 19वें शंघाई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में भी थीथी को एशिया न्यू टैलंट कैटेगरी की बेस्ट फिल्म चुना गया था.

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शॉर्ट फिल्म कैटेगरी में पायल सेठी की फिल्म लीचिज़ ने श्टुटगार्ट में बेस्ट फिल्म का अवॉर्ड तो जीता ही, सबके जुबां पर चर्चा भी जीता. इस फिल्म का विषय बेहद संवेदनशील था और उसे उतने ही उम्दा तरीके से बयान भी किया गया था. फिल्म अरब शेखों के हाथों बिकने वाली कम उम्र भारतीय लड़कियों की कहानी है. डॉक्युमेंट्री फिल्मों की कैटेगरी में जर्मन स्टार बनी पंकज जौहर की फिल्म सेसीलिया. लीना यादव की फिल्म पार्च्ड को डायरेक्टर्स विजन अवॉर्ड मिला. ऑडियंस को सबसे ज्यादा पसंद आई पैन नलिन की फिल्म एंग्री इंडियन गॉडेसेज. इसके अलावा समारोह में एजाज सिंह की फिल्म जुबान भी दिखाई गई. राम माधवानी की चर्चित फिल्म नीरजा, नीरज घेवान की मसान और अमिताभ बच्चन अभिनीत 2010 की फिल्म तीन पत्ती भी दर्शकों को देखने को मिली. लेकिन सबसे ज्यादा भीड़ जुटी थी फिल्म निल बटे सन्नाटा के लिए. लोगों को फिल्म खूब पसंद भी आई.

श्टुटगार्ट में हर साल भारत की बेहतरीन फिल्मों का मेला होता है लेकिन इस बार एक खास बात थी कि ज्यादातर फिल्मों का विषय महिलाओं की जिंदगी के इर्द-गिर्द घूमता था. समारोह की गेस्ट ऑफ ऑनर थीं पार्च्ड फिल्म की अदाकारा तनिष्ठा चटर्जी जो एक ऐसे किरदार के लिए चर्चित रहीं जैसा भारत तो क्या विदेशों में भी देखने को कम ही मिलता है. चटर्जी ने पार्च्ड में एक राजस्थानी ग्रामीण विधवा का किरदार निभाया है जो अपनी सहेलियों और अपनी बहू के साथ मिलकर ग्रामीण औरतों की सेक्स लाइफ की चर्चा करती है.

13. Stuttgart Indisches Filmfestival Mozez Singh

मोजेज सिंह (दाएं), फिल्मकार

जर्मनी के बाडेन-वुर्टेमबर्ग फिल्म ब्यूरो संस्थान का यह आयोजन 5000 से ज्यादा दर्शकों को भारतीय फिल्मों की ओर आकर्षित करने में कामयाब रहा. लोगों ने भारत की बात की, भारत के गाने सुने. उन गानों पर झूमे और जाना कि वे भारत के बारे में जैसा समाचारों में पढ़ते रहते हैं, यह देश उससे काफी अलग है.

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