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विज्ञान

महज 4 सालों में पिघल गई ग्रीनलैंड की 1,000 अरब टन बर्फ

महज पिछले 4 सालों में ग्रीनलैंड की 1 हजार अरब टन बर्फ पिघल गई है. इससे समुद्र जलस्तर में पिछले दो दशकों की तुलना में दोगुना इजाफा हुआ है.

यूरोपीय स्पेस एजेंसी की ओर आए नए आंकड़ों के ​मुताबिक उत्तरी ध्रुव के पास अटलांटिक और आर्कटिक महासागरों के बीच स्थित ग्रीनलैंड में पिछले 4 सालों में 1,000 हजार अरब टन बर्फ पिघल गई है.

2011 की शुरुआत से लेकर 2014 के अंत तक ग्रीनलेंड में पिघली इस बर्फ ने अकेल ही समुद्र के जल स्तर को हर साल 0.75 मिलीमीटर बढ़ाया. यह पिछले दो दशकों में समुद्र के जल स्तर में हो रहे औसत इजाफे का तकरीबन दो गुना है.

इन ताजा आंकड़ों को स्पेस एजेंसी के क्रोयोसेट उपग्रह और स्थानीय जलवायु मॉडल की साझा सूचनाओं के आधार पर ग्रीनलैंड की बर्फ की चादर के द्रव्यमान का नक्शा बनाकर जुटाया गया है. क्रोयोसेट में एक रडार अल्टीमीटर लगा हुआ है जो कि बर्फ की परत की उंचाई को सटीक अंदाजे के साथ नाप सकता है.

इसके जरिए वैज्ञानिक बर्फ की परत में हुए परिवर्तनों को अप्रत्याशित रूप से सटीक तरीक से माप पाए हैं. इस शोध में काम कर रहे वैज्ञानिकों के ​मुताबिक यह ग्रीनलैंड में पिघली बर्फ की सबसे सटीक तस्वीर है और यह बेहद चिंता की भी बात है.

ग्लोबल वार्मिंग के चलते हो रहे पर्यावरणीय बदलावों से चिंतित वैज्ञानिकों और अन्य लोगों के लिए यह आंकड़ा चौकाने वाला है. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की ओर से जारी वैश्विक पर्यावरणीय पूर्वानुमान (जीईओ-6) क्षेत्रीय आकलन रिपोर्ट में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन का सबसे खराब असर प्रशांत और दक्षिण व दक्षिण-पूर्व एशिया में पड़ने का अंदेशा है. इसके तहत 2050 तक समुद्रतल का स्तर बढ़ने की वजह से पूरी दुनिया में जिन दस देशों की आबादी सबसे ज्यादा प्रभावित होगी उनमें से सात देश एशिया प्रशांत क्षेत्र के ही हैं. इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले देशों की सूची में भारत का नाम सबसे ऊपर है.

आरजे/ओएसजे (रॉयटर्स)

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