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दुनिया

शहर में घुस गईं भेड़ें, पुलिसवाले परेशान

स्पेन के एक शहर होजेका में 1100 भेड़ें घुस गईं. अब भेड़ों से कौन पूछे कि क्यों घुसीं? एक घंटे की मशक्कत ने लोगों को खूब मजा दिलाया.

Neuseeland Schafe

प्रतीकात्मक तस्वीर

53 हजार बाशिंदों वाला स्पेन का शहर होजेका बुधवार सुबह मुर्गों की कुकड़ू-कू से नहीं बल्कि भेड़ों की मे..मे... से जगा. और जब जगा तो लगा कि गजब नजारा था. लोग अपनी-अपनी जगहों पर रुक गए थे. पुलिस वाले इधर-उधर दौड़ रहे थे. और हमलावरों का सामना कर रहे थे. उनके और हमलावरों के बीच लुका-छिपी चल रही थी. पुलिसवाले दाएं दौड़ते तो हमलावर बाएं दौड़ जाते. वे बाएं से घेरते तो हमलावर उलटे कदम दौड़ जाते. पूरे शहर में यही मंजर था. और हमलावर भी तो सैकड़ों थे. कुछ दर्जन पुलिसवाले क्या सैकड़ों हमलावरों को इतनी आसानी से काबू कर सकते थे! आमजन हंस-हंस कर इस लुकाछिपी का मजा ले रहे थे.

ये हमलावर भेड़ें थीं जो शहर में घुस आई थीं. सैकड़ों की तादाद में. उनका निगहबान, गडरिया सो गया. और उसके सोने का फायदा उठाकर ये भेड़ें शहर में घुस आईं. शायद इसलिए कि उन्होंने कभी शहर देखा नहीं होगा. या हो सकता है कि वे गडरिये से नाराज हो गई हों. या हो सकता है कि यह एक ही भेड़ की शरारत रही हो, जिसने सोचा होगा कि शहरवासियों को मजा चखाया जाए. वह शहर की ओर चल दी होगी और बाकी भेड़ें भेड़चाल से उसके पीछे होंगी. हम इन्सान इसकी वजह शायद कभी नहीं जान पाएंगे. हम बस इतना जान पाए कि पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी.

दरअसल, हुआ यूं कि पुलिस थानों को सुबह चार बजे फोन आने शुरू हुए. लोग कह रहे थे कि भेड़ें दिख रही हैं. क्या पुलिसवालों को लगा होगा कि लोग सपना देख रहे हैं? अगर किसी पुलिसवाले ने विशाल भारद्वाज की फिल्म मटरू की बिजली का मंडोला देखी होती तो पक्का यकीन कर लेता कि सपने में दिखी भैंस असली लग सकती है तो भेड़ें भी लोगों को सपने में दिख रही होंगी. लेकिन उन्होंने शायद होजेका के पुलिसवाले मटरू, बिजली और मंडोला को नहीं जानते थे. और फिर मसला यह भी था कि एक ही जैसा सपना दर्जनों लोगों को कैसे आ रहा था. तो, कुछ पुलिसवाले देखने निकले कि क्या माजरा है. फिर उन्हें भी कुछ भेड़ें दिखीं. उन्होंने वापस थाने में बताया कि सपना नहीं सच है, भेड़ें तो आ गई हैं. कहां से, कैसे, कितनी, कब, क्यों? कोई पता नहीं. पर यह सच है कि पूरा शहर भेड़भेड़ाया हुआ है. तो पुलिस वालों की भी आंख खुली. उन्होंने फटाफट दो कारें भरकर पुलिसवाले भेजे.

उधर गडरिये की आंख खुली तो खुली की खुली रह गई. उसकी भेड़ें गायब थीं. एक हजार एक सौ भेड़ें गायब थीं. उसके तो तोते उड़ गए. वह भागा. तब तक उसे भी पता चल गया कि उसकी भेड़ों ने शहर पर हमला कर दिया है. उसने पुलिसवालों के साथ मिलकर हमलावर भेड़ों को जमा करना शुरू किया. आखिरकार करीब एक घंटे की मेहनत के बाद सारी भेड़ों को मान-मनौव्वल कर वापस लाया गया. क्या गडरिये ने पूछताछ की होगी कि शहर पर हमला करने की साजिश भेड़ों ने कैसे रची?

वीके/आईबी (एएफपी)

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