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दुनिया

हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में रूस ने पाक की आलोचना पर भारत को लताड़ा

पाकिस्तान और रूस की नजदीकियां एक बार फिर सामने आईं हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में. भारत के लिए यह बड़ा झटका हो सकता है. दो महीने में ऐसा तीसरी बार हुआ है जब रूस ने भारत का साथ नहीं दिया.

हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में भारत को पाकिस्तान के खिलाफ रूस का साथ नहीं मिला पाया है. पाकिस्तान पर भारत और अफगानिस्तान के आरोप को खारिज करते हुए रूस ने पाकिस्तान का साथ दिया. भारत और अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर कॉन्फ्रेंस का एजेंडा हाईजैक करने का आरोप लगाया था. रूसी राजदूत जामिर काबुलोव ने इस आरोप को खारिज किया और कहा कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि सरताज अजीज का भाषण दोस्ताना और रचनात्मक था. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आलोचना गलत है.

पाकिस्तानी अखबार द न्यूज की वेबसाइट के मुताबिक रूसी राजदूत ने कहा कि अफगानिस्तान हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन के लिए अहम बिंदु है और एजेंडा हाईजैक होने जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने भारत को सलाह देते हुए कहा कि दोस्त और समर्थक होने के नाते हमें एक दूसरे पर इल्जाम लगाने से बचना चाहिए और साथ मिलकर काम करना चाहिए. द न्यूज ने लिखा है कि काबुलोव ने कहा कि यह सम्मेलन भारत और पाकिस्तान के लिए नंबर बनाने का मौका नहीं है बल्कि युद्ध पीड़ित अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए सबको मिलकर काम करना चाहिए.

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भारत के लिए यह बड़ा झटका कहा जा सकता है क्योंकि हाल के समय में यह लगातार तीसरी बार है जब रूस ने भारत का साथ नहीं दिया है. पहले उसने पाकिस्तान के साथ मिलकर युद्ध अभ्यास किया था जबकि भारत ने उस पर विरोध जताया था. उसके बाद गोवा में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत ने कोशिश की थी कि पाकिस्तान की आलोचना हो लेकिन ऐसा नहीं हो पाया. और अब भारत के अमृतसर में हो रहे हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन में भी रूस ने पाकिस्तान का साथ दिया है.

काबुलोव अफगानिस्तान में रूस की भूमिका के लिए जिम्मेदार अधिकारी हैं. सम्मेलन के दौरान रिपोर्टर्स से बातचीत में उन्होंने भारत की अमेरिका से बढ़ती नजदीकियों का भी जिक्र किया. जब उनसे पाकिस्तान और रूस के सैन्य सहयोग के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "भारत और अमेरिका के बीच नजदीकी सहयोग है, क्या मॉस्को इस बारे में कोई शिकायत करता है? फिर पाकिस्तान के साथ हमारे इतने छोटे स्तर के सहयोग पर शिकायत क्यों?"

भारत के अफगानिस्तान में गहरे हित हैं. वहां उसके दो अरब डॉलर के प्रोजेक्ट चल रहे हैं. हार्ट ऑफ एशिया एक प्रक्रिया है जिसे युद्ध पीड़ित अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण के लिए 2011 में शुरू किया गया था. इस प्रक्रिया में भारत के अलावा पाकिस्तान, अफगानिस्तान, चीन, ईरान, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.

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