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दुनिया

रोहिंग्या मुसलमानों के कई गांवों का सफाया: मानवाधिकार समूह

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों के कई गांवों को लगभग साफ कर दिया गया है. संगठन ने उपग्रह से मिली तस्वीरों के आधार पर यह बात कही है.

इस बारे में मिल रही खबरों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना अभी संभव नहीं है क्योंकि प्रभावित इलाकों में पत्रकारों और सहायता संगठनों के लोगों के जाने पर कई तरह की पाबंदियां हैं. लेकिन ह्यूमन राइट्स वॉच का कहना है कि रोहिंग्या लोगों पर सेना की कार्रवाई के दौरान उनके 1,250 घरों को नष्ट किया गया है. बांग्लादेश की सीमा के नजदीक स्थित इस इलाके की उपग्रह से मिली तस्वीरों के आधार पर ये बात कही गई है.

इससे पहले म्यांमार की सरकार ने कहा था कि चरमपंथियों ने लगभग 300 घरों को तबाह कर दिया और "इसका मकसद सरकारी सैनिकों और आम लोगों के बीच अविश्वास के बीज बोना है."

ह्यूमन राइट्स वॉच के एशिया डायरेक्टर ब्रैड एड्म्स ने उपग्रह से मिली तस्वीरों को "खतरनाक" बताया है. सैटेलाइट सेंसरों से कई गांवों में आग लगाए जाने का भी पता चला है. उन्होंने कहा, "पांच रोहिंग्या गांवों में ये हमले चिंता का कारण है. म्यांमार की सरकार को जांच कर इसके लिए दोषी लोगों को सजा देनी चाहिए.”

म्यांमार में 11 लाख रोहिंग्या लोग हैं और इनमें से ज्यादातर पश्चिमी प्रांत रखाइन में ही रहते हैं. लेकिन म्यांमार ने इन लोगों को न तो अपनी नागरिकता दी है और न ही बुनियादी अधिकार. म्यांमार की सरकार इन्हें अवैध बांग्लादेशी प्रवासी मानती है और उन्हें देश की सुरक्षा के लिए खतरे के तौर पर देखा जाता है. लेकिन संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि रोहिंग्या लोग दुनिया के सबसे सताए समुदायों में से एक हैं. 

म्यांमार में दशकों के सैन्य शासन के बाद इस समय नोबेल शांति पुरस्कार विजेता आंग सान सू ची की सरकार है. सेना को नियंत्रित न करने के लिए उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ता है. देश में इस समय चुनी हुई सरकार है लेकिन समूची व्यवस्था में सेना का अब भी अच्छा खासा दखल है. रोहिंग्या लोगों के खिलाफ सेना की कार्रवाई पर भी सवाल उठते रहे हैं.

एके/आरपी (एएफपी, डीपीए)

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