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विज्ञान

कतर के मजदूरों को मिलेंगे पंखे वाले कूलिंग हेल्मेट

कतर में फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए स्टेडियम बना रहे प्रवासी मजदूरों को गर्मी से बचाने वाले हैट्स दिए जा रहे हैं. प्रतियोगिता के आयोजकों का कहना है कि मजदूरों को हीट स्ट्रोक से बचाने के लिए ये कूलिंग हैट्स दिए जा रहे हैं.

कतर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने ये हैट्स बनाए हैं. ये हैट्स सोलर पावर से काम करते हैं. इस कदम का मकसद मजदूरों के काम करने के हालात को बेहतर बनाना है. 2022 वर्ल्ड कप के लिए कतर में खासा काम हो रहा है लेकिन मानवाधिकार संगठन मजदूरों की बदहाली को लेकर कतर की तीखी आलोचना करते रहे हैं.

मजदूरों को जो हेल्मेट दिए गए हैं उनमें ऊपर की ओर एक पंखा लगा हुआ है जो चेहरे पर हवा फेंकता है. इससे त्वचा का तापमान बढ़ नहीं पाता है. कतर यूनिवर्सिटी के इंजीनियरिंग प्रोफेसर सऊद गनी कहते हैं कि यह पंखा शरीर की त्वचा का तापमान 10 डिग्री के आसपास रखता है. गनी कहते हैं, "हमारा मकसद था कतर और आसपास के इलाकों में काम कर रहे मजदूरों को हीट स्ट्रोक के खतरे से बचाना."

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नेपाल, भारत और बांग्लादेश से आए लगभग 5100 मजदूर इस अमीर देश कतर में 2022 फुटबॉल वर्ल्ड कप के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर बना रहे हैं. लेकिन इनके काम के हालात इतने खराब रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कतर को खासी आलोचना झेलनी पड़ी है. मानवाधिकार संस्थाओं का कहना है कि ये मजदूर बहुत खराब हालात में रह रहे हैं. इनके काम करने की परिस्थितियां खतरनाक और अमानवीय हैं.

कतर में गर्मियों में तापमान 50 डिग्री तक पहुंच जाता है. इस भयंकर गर्मी में मजदूर कई कई घंटे बाहर खुले में काम करते हैं. हालांकि कतर सरकार ने गर्मियों में खुले में काम करने पर प्रतिबंध लगा रखा है लेकिन मजदूर हीट स्ट्रोक की शिकायत कर चुके हैं. दोहा में भारतीय दूतावास की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 2015 में भारत से आए 260 मजदूरों की जान चली गई. इस साल मई में एक भारतीय मजदूर दोहा में एक स्टेडियम में काम करते हुए दिल के दौरे से मारा गया.

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ऐसे हालात में कतर द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे हेल्मेट्स को एक सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है. अगली गर्मियों से ये हेल्मेट हर मजदूर को उपलब्ध होंगे. कतर में वर्ल्ड कप के आयोजन का कामकाज देख रही सुप्रीम कमेटी फॉर डिलीवरी एंड लेगसी के एक अधिकारी ने बताया कि वर्ल्ड कप के लिए बनाई जा रही हर इमारत में काम करने वाले मजदूरों को दिन में चार घंटे के लिए ये हेल्मेट दिए जाएंगे.

वैसे, इस तरह की तकनीक पर आधारित आइस हैट्स का इस्तेमाल अमेरिकी खिलाड़ी करते रहे है्ं. लेकिन पहली बार है जब निर्माणकार्य में इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होगा.

वीके/एमजे (रॉयटर्स)

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