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दुनिया

राजनीति में बढ़ता फेसबुक का दखल

दुनिया भर में रा​जनीति में फेसबुक के बढ़ते प्रभाव को लेकर चिंताएं जाहिर की जा रही हैं. ऐसी कई शिकायतें हैं जो वाकई पूरी दुनिया के राजनीतिक भविष्य पर गहरा प्रभाव डाल रही हैं.

जैसे-जैसे अमेरिकी राष्ट्रपति पद के चुनाव नजदीक आ रहे हैं, राजनीतिक विश्लेषक फेसबुक के राजनीति पर पड़ते प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं. हाल ही में हुए एक अध्ययन के अनुसार फेसबुक ने लोगों की राजनीतिक समझ को प्रभावित करने की जबरदस्त क्षमता पा ली है. इस शोध के मुताबिक फेसबुक के प्रभाव से मतदाताओं में 15 से 24 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जो कि परिणामों पर सीधा असर डालता है. यह शोध अगस्त में जर्नल ऑफ कम्युनिकेशन में प्रकाशित होना है.

वोट प्रतिशत में इजाफा, परिणाम पर सीधा असर

इस साल अमरीकी राष्ट्रपति पद के लिए हुई प्राइमरी से पहले फेसबुक रिमाइंडर ने लोगों को इस बात की जानकारी दी कि कब उनके राज्य में वोटर रजिस्ट्रेशन की अंतिम तिथि है. इसके साथ ही फेसबुक ने रजिस्ट्रेशन के लिए एक लिंक भी मुहैया कराया. कैलिफोर्निया राज्य के चुनाव प्रमुख एलेक्स पाडिला के मुताबिक इस लिंक के जरिए अकेले कैलिफोर्निया राज्य में तकरीबन 6 लाख 50 हजार नए मतदाताओं ने रजिस्ट्रेशन करवाया.

इसी तरह यूके में भी सरकारी अधिकारियों के ​मुताबिक ब्रेक्जिट के लिए हुए मतदान में रजिस्ट्रेशन की डेडलाइन के फेसबुक रिमाइंडर के चलते 1 लाख 86 हजार लोगों ने मतदान के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किया. यूनिवर्सिटी ऑफ टैक्सास में पीएचडी की छात्रा और जल्द ही प्रकाशित होने वाले इस शोध की लेखिका कैथरीन हैंशन कहती हैं, ''सामान्यतया, लोगों को मतदान के लिए बाहर निकालने में सक्षम होने भर से चुनावों के नतीजे बिल्कुल बदल सकते हैं.''

फेसबुक के दावे और पेंच

हालांकि फेसबुक बार-बार यह जताता है कि उसका राजनीति से बहुत सीमित लेना देना है. वह केवल लोगों को मतदान के लिए प्रोत्साहित करने जैसे सकारात्मक और तटस्थता वाली राजनीतिक गतिविधियां ही चलाता है. लेकिन पिछले दिनों फेसबुक पर अपने 'ट्रेंडिंग टॉपिक्स' मॉड्यूल में राजनीतिक रूप से पक्षपाती होने के आरोप लगाए गए थे. ​जिसके बाद फेसबुक ने सफाई देते हुए इस हफ्ते अपनी सारी ही महत्वपूर्ण न्यूज फीड को संचालित करने वाली कुछ गाइडलाइनें जारी की हैं.

दूसरी तरफ ठीक इसी समय फेसबुक की ग्लोबल पॉलिटिक्स एंड गवर्मेंट आउटरीच डायरेक्टर, कैटी हार्बेथ फेसबुक की इस इस बात को लेकर तारीफ कर रही हैं कि इसने राजनीति के लिए नया मंच उपलब्ध कराया है. इसके जरिए राजनीतिक आयोजन कराना आसान हुआ है और राजनीतिज्ञ और अधिक प्रभावी ढंग से अपनी बातों को लोगों के बीच ले जा सकते हैं. कैटी हार्बेथ की टीम प्रत्याशियों को फेसबुक का प्रभावशाली ढंग से इस्तेमाल करने के तरीकों के बारे में बताती है. मसलन फेसबुक लाइव का कैसे इस्तेमाल किया जाय या अपने पेजों में लोगों को कैसे रोक कर रखा जाए या उनका इंगेजमेंट बढ़ाया जाए.

चिंताएं

राजनीतिक नजरिए को आकार देने में फेसबुक की भूमिका के बारे में विशेषज्ञों की चिंताएं कम होने की संभावना नहीं दिखाई दे रही हैं. कई लोगों को वोटरों के रजिस्ट्रेशन को बढ़ाने के फेसबुक के प्रभाव पर भी ऐतराज है. मसलन इस हफ्ते विकि​लीक्स के संस्थापक जूलियन असांज ने आरोप लगाया है कि गूगल और फेसबुक ब्रेक्जिट के लिए हुए जनमत संग्रह में इस बात के लिए मतदाताओं को प्रोत्साहित कर रहे थे कि ब्रिटेन यूरोप में ही बना रहे. उनका जोर यह दिखाने में था कि न्यूमीडिया के अधिकतर यूजर युवा हैं और वे यूरोप में रहने के पक्ष में हैं.

फेसबुक और दूसरी सोशल नेटवर्किंग साइटों पर एक और आरोप है कि ये विचारों और मान्यताओं के 'ईको चैंबर' बनते जा रहे हैं. यूजर जिस तरह के विचारों को पसंद करता है इन नेटवर्किंग साइटों की उसकी वॉल पर उसी तरह की न्यूज फीड बार बार दिखने लगती है. 2015 में हुए एक अध्ययन के मुताबिक फेसबुक यूजर अक्सर उस सामग्री की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं और उस पर क्लिक करते हैं जो कि उनकी विचारधारा से मेल खाते हैं. और नेटवर्किंग साइट्स उन्हें उसी तरह की फीड्स ज्यादा दिखाती हैं.

इस हफ्ते सोशल मीडिया पर नजर रखने वाले फेसबुक के एक यूजर टॉम स्टाइनबर्ग ने अपनी एक पोस्ट में लिखा कि उन्होंने फेसबुक में यह तलाशने की कोशिश की कि कोई यूजर ब्रिटेन के यूरोपीय यूनियन छोड़ने पर जश्न मना रहा हो. लेकिन ऐसा कोई नहीं दिखाई दिया. स्टाइनबर्ग की यह फेसबुक पोस्ट ट्वीटर पर तेजी से फैल गई.

खतरा

हालांकि स्टाइनबर्ग कहते हैं कि वह खुद ब्रिटेन के यूरोप में रहने के हिमायती थे लेकिन सोशल मीडिया को ईको चैंबर बनने से रोकने के लिए तकनी​की के पुरोधाओं को कुछ करना चाहिए. उन्होंने लिखा, ''इस समस्या पर अभी कुछ नहीं करने का मतलब होगा कि हम अपने सामाजिक ताने बाने को छिन्न भिन्न करने के लिए खुद ही कोशिशें कर रहे हैं. हम ऐसे देश बनते जा रहे हैं जिसमें से एक हिस्सा दूसरे हिस्से के बारे में एकदम से कुछ नहीं जानता है.''

फेसबुक के न्यूज फीड के प्रोडक्ट मैनेजमेंट के वाइस प्रेसिडेंट एडम मोसेरी कहते हैं कि उनकी टीम यूजर्स को नए पेज फॉलो करने में भी मदद कर रही है. हालांकि उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि लोगों को उनकी फीड्स में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित करने के मकसद के ​लिए भी क्या उनकी ओर से कोई खास कोशिशें हो रही हैं.

आरजे/एमजे (रायटर्स)

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