1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

दुनिया

डॉ. अफरीदी को नहीं रिहा करेगा पाकिस्तान

ओसामा बिन लादेन को मरे हुए पांच साल से भी ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन उसकी मौत के बाद पाकिस्तान और अमेरिका के बीच पनपी तनातनी किसी न किसी रूप में सामने आते रही है और इस बार बहस का केंद्र हैं डॉ. शकील अफरीदी हैं.

जेल में बंद डॉ. शकील अफरीदी को पाकिस्तान न तो रिहा करेगा और न ही उन्हें अमेरिका के हवाले करेगा. पाकिस्तान के कानून मंत्री जाहिद हमीद ने सांसदों को संबोधित करते हुए इस बात की जानकारी दी. डॉक्टर अफरीदी पर आरोप है कि उन्होंने अल कायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन की तलाश में अमेरिकी एजेंसी सीआईए की मदद की थी.

साल 2011 में अमेरिकी सेना ने ओसामा को एक गुप्त मिशन के तहत उत्तरी पाकिस्तान के एबटाबाद में मार गिराया गया था जिसके बाद इस डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया था. हालांकि इस अमेरिकी कार्रवाई के बाद अमेरिका और पाकिस्तान दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी काफी हद तक प्रभावित हुई और अब इनके बीच पहले जैसी गर्माहट नहीं रही.

यह भी देखिए, अमेरिका ने कहां कितने बम गिराये

पाकिस्तान के डॉक्टर अफरीदी पर आरोप है कि उन्होंने एक फर्जी वैक्सीनेशन कैंप चलाया था जिसके तहत उन्होंने डीएनए सैंपल जुटाए और लादेन की मौजूदगी की जानकारी सीआईए को दी.

अफरीदी को लादेन पर हुई इस कार्रवाई के बाद हिरासत में ले लिया गया. उन पर इस्लामिक आंतकवादियों के साथ संबंध होने के आरोप लगे, जिन्हें अफरीदी ने खारिज किया.

डेली टाइम्स अखबार ने जाहिद हमीद का हवाला देते हुए लिखा है कि कानून अपना काम कर रहा है और अफरीदी के मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी.

उन्होंने कहा कि अफरीदी, कानून और देशहित के खिलाफ काम कर रहे थे और पाकिस्तान हमेशा अमेरिका से यह कहता आया है कि हमारे कानून के तहत अफरीदी ने अपराध किया है, लिहाजा वह अब कानूनी हिरासत में हैं.

तस्वीरों में, आतंकवाद से सबसे ज्यादा कौन डरा है

अफरीदी को लश्कर-ए-इस्लाम नामक आतंकवादी संगठन के सदस्य होने का दोषी पाया गया था जिसके चलते उन्हें वर्ष 2012 में 33 वर्ष जेल की सजा भी सुनाई गई थी. हालांकि यह सजा वर्ष 2013 में उलट गई लेकिन तब अफरीदी पर आठ साल पहले एक मरीज की हत्या का आरोप लगा और अब तक इस मामले की सुनवाई पूरी नहीं हुई है जिसके चलते वह अब भी जेल में हैं.

पिछले साल मई में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति ट्रंप के उस बयान की भी भारी आलोचना की थी जिसमें ट्रंप ने कहा था कि वह पाकिस्तान से अफरीदी को दो मिनट में छोड़ने के लिए कह सकते हैं.

साल 2001 में अमेरिका पर हुए आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान ने आतंकवाद से लड़ने के लिए अमेरिका के साथ हाथ मिलाया था.

एए/वीके (रॉयटर्स)

DW.COM

संबंधित सामग्री