′काबुल के कसाई′ के साथ अफगानिस्तान की डील | दुनिया | DW | 22.09.2016
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दुनिया

'काबुल के कसाई' के साथ अफगानिस्तान की डील

अफगानिस्तान की सरकार ने गुलबुद्दीन हिकमतयार के साथ एक शांति समझौता किया है, जिन्हें कई बार काबुल का कसाई कहा जाता है.

अफगानिस्तान की सरकार ने बड़े युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार माने जाने वाले गुलबुद्दीन हिकमतयार के साथ एक शांति समझौता किया है, जिन्हें अकसर 'काबुल का कसाई' कहा जाता है. इस तरह कई साल से छिप कर रहे इस नेता की राजनीति में वापसी हो सकती है.

हिकमतयार फिलहाल शिथिल पड़े हिज्ब-ए-इस्लामी चरमपंथी समूह के प्रमुख हैं. हिकमतयार भी उन लोगों की सूची में शामिल हो गए हैं जिनके पुराने अपराधों को माफ कर अफगान सरकार उनके साथ मेलमिलाप का प्रयास कर रही है. अफगानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े चरमपंथी गुट के प्रमुख के साथ इस समझौते को अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की जीत माना जा रहा है. ये समझौता ऐसे समय पर हुआ है जब गनी तालिबान के साथ शांतिवार्ता को बहाल करने के लिए प्रयास कर रहे हैं.

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शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले हिज्ब-ए-इस्लामी के प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख मोहम्मद अमीन करीम ने कहा, “ये सिर्फ अफगान सरकार और हिज्ब-ए-इस्लामी के बीच फैसला नहीं है बल्कि ये पूरे देश में शांति के नए दौर की शुरुआत है.” हालांकि इस मौके पर खुद हिकमतयार मौजूद नहीं थे. किसी समय में हिकमतयार को 'काबुल का कसाई' कहा जाता था और वो 1980 के दशक में एक अहम सोवियत विरोधी कमांडर थे. उन पर 1992 से 1996 के बीच गृहयुद्ध के दौरान अफगान राजधानी काबुल में हजारों लोगों की हत्या के आरोप हैं. माना जाता है कि वो इस समय पाकिस्तान में छिपे हैं लेकिन उनके गुट का कहना है कि वह अफगानिस्तान में ही मौजूद हैं.

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शांति समझौते के बाद हिकमतयार की मुख्यधारा की राजनीति में वापसी की उम्मीद है. इससे पहले अब्दुल रशीद दोस्तम भी इसी तरह वॉरलॉर्ड रहे हैं और फिलहाल वो देश के उपराष्ट्रपति हैं. लेकिन मानवाधिकार समूह और गृहयुद्ध में अपने परिजनों को खोने वाले परिवार राजनीति में इस तरह वॉरलॉर्ड के प्रवेश का विरोध कर रहे हैं. काबुल में कार्यकर्ताओं ने हिकमतयार से शांति समझौता होने का विरोध किया. इस दौरान उन्होंने एक तख्ती उठा रखी थी जिसमें हिकमतयार के मुंह से खून टपकता दिख रहा है और नाक में एक रॉकेट लगा है. और तस्वीर के नीचे लिखा है, “हम काबुल के कसाई को माफ नहीं कर सकते हैं.”

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उधर, अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि वो हिज्ब-ए-इस्लामी के साथ बातचीत नहीं कर रहा है लेकिन वो हिमकतयार के साथ समझौता होने का स्वागत करता है. वहीं तालिबान ने पश्चिम के समर्थन वाली अफगान सरकार से बात करने से इनकार कर दिया है और उनके हमले भी हाल के दिनों में बढ़े हैं.

एके/वीके (एएफपी, एपी)

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