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दुनिया

तैयारी में जुटे कराची के कब्रिस्तान और मुर्दाघर

कराची में गर्मी 44 डिग्री के पार हो चुकी है. 1981 के बाद सबसे ज्यादा. और पिछली बार इतनी जानें गई थीं कि इस बार लोग डरे ही नहीं हुए हैं, वे मौत के लिए तैयार भी हो रहे हैं.

कब्र खोदने का काम करने वाले शाहिद बलोच इस बार कोई खतरा नहीं उठाना चाहते. पिछले साल तो बहुत मुश्किल हो गई थी. गर्मी ने कराची में 1300 से ज्यादा लोगों की जानें ले ली थीं और कब्र खोदने वाले कम पड़ गए थे. इस बार उन्होंने पहले ही एक और खुदाई वाला रख लिया है. वे लोग एक लंब्री कब्र खोद रहे हैं. इतनी लंबी जिसमें 300 लोगों को दफनाया जा सकेगा.

अपने तीन भाइयों के साथ कराची के बड़े से कब्रिस्तान में काम करने वाले 28 साल के बलोच कहते हैं, "खुदा का शुक्र है कि इस बार हम पिछले साल से ज्यादा तैयार हैं." 2015 में जब गर्मी का प्रकोप शुरू हुआ तो अस्पताल, मुर्दाघर और कब्रिस्तान के लिए मुश्किल हो गई थी. वे इतने सारे मुर्दों को संभालने के लिए तैयार ही नहीं थे. लेकिन इस बार सबने तैयारी कर रखी है.

तापमान अभी से 44 के पार जा चुका है. 1981 के बाद से सबसे ज्यादा. और सामान्य से तो कहीं ज्यादा क्योंकि इस वक्त का औसत तापमान 37 डिग्री होना चाहिए था. इसका सबसे बुरा असर होता है भिखारियों, बेघरों और सड़कों पर घूमने वाले नशे के आदी लोगों पर. लेकिन सेना और समाजसेवी संस्थाएं भी कमर कसे बैठी हैं ताकि शहर को पिछले साल जैसे हाहाकार से बचाया जा सके. वैसे तापमान बढ़ने के साथ ही पाकिस्तान के आपातकालीन सेवाओं की पोल खुलनी भी शुरू हो गई है. और इसलिए बलोच जैसे लोग पहले से तैयारी करके बैठे हैं.

कराची के कमिश्नर आसिफ हैदर शाह कहते हैं, "पिछली बार की तरह इस बार चीजें बेकाबू नहीं होंगी. 60 अस्पतालों में 1850 अतिरिक्त लोगों के इलाज के प्रबंध किए गए हैं." पिछले साल हालात ऐसे थे कि लोगों को अस्पतालों के बरामदों में फर्श पर सोना पड़ा था. कराची के मुख्य अस्पताल में कतारें इतनी लंबी थीं कि संभालना नामुमकिन हो गया था. शाह बताते हैं कि पूरे शहर में 200 केंद्र स्थापित किए गए हैं जो संकट पर सबसे पहले कार्रवाई करेंगे. वे लोग हीट-स्ट्रोक के लिए शुरुआती इलाज करेंगे ताकि मरीज को फौरन आराम मिले. 700 राहत केंद्र भी बनाए गए हैं जहां पीने का पानी और डिहाईड्रेशन सॉल्ट उपलब्ध है.

रेहड़ी चलाने वाले मोहम्मद ऐसे ही एक सेंटर पर पानी पीने के लिए रुके थे. 32 साल के मोहम्मद ने कहा कि इससे जिंदगी बच जाएगी, यही राहत की बात है.

ईदी फाउंडेशन की भी कोशिश है कि गर्मी से हालात को बिगड़ने से रोका जा सके. उसने एंबुलेंस बढ़ा दी हैं. मुर्दाघर के फ्रीजर के लिए आइस मशीनें भी खरीदी जा रही हैं. पिछले साल ईदी फाउंडेशन का मुर्दाघर 650 शवों में भर गया था और उसके बाद आए शवों को धूप में बाहर ही छोड़ना पड़ा था. कब्र खोदने वालों ने भी गर्मी की वजह से काम करने से इनकार कर दिया था और जो करने को तैयार थे वे पांच-पांच गुना पैसे मांग रहे थे. ईदी फाउंडेशन के फैसल ईदी बताते हैं, "लोग इतनी महंगी कब्र नहीं खरीद पा रहे थे. उन्हें लाशों को अपने रिश्तेदारों की कब्रों में ही दफनाना पड़ा था."

लोगों को डर इसलिए भी लग रहा है क्योंकि रमजान शुरू होने वाला है. अगर उस दौरान गर्मी बढ़ी तो हालात और खराब हो सकते हैं. रमजान के दौरान सावर्जनिक स्थानों पर खाना-पीना पाकिस्तान में गैरकानूनी है. धार्मिक स्तर पर भी गर्मी से निपटने की तैयारी हो रही है. सिंध प्रांत के मुख्यमंत्री के धार्मिक मामलों के सलाहकार अब्दुल कयूम सूमरो कहते हैं, "अधिकारी मौलवियों से मिलकर इस तरह का एक फतवा जारी करने पर विचार करेंगे कि स्वास्थ्य कारणों से उपवास तोड़ा जा सकता है."

एक फल बेचने वाला तो रोजा तोड़ने में परहेज नहीं करेगा. वह कहता है कि अगर हालात ज्यादा खराब हुए तो मैं रोजा तोड़ लूंगा क्योंकि अल्लाह कहता है कि जिंदगी सबसे कीमती है. पिछले साल उसके बेटे को लू लग गई थी और उसका इलाज कराने के लिए अस्पतालों में जगह नहीं मिल रही थी. तीन अस्पतालों में भटकने के बाद उसका इलाज हुआ था. इसलिए उसे लगता है कि कब्र तैयार करने से बेहतर होगा जिंदगी संभाल ली जाए.

वीके/एमजे (रॉयटर्स)

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