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दुनिया

चीन के चक्कर में पाक 150 अरब का नुकसान झेलने को तैयार

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर परियोजना से जुड़े चीनी निवेशकों को पाकिस्तान सरकार ने टैक्स में छूट देने की घोषणा की है. जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान को इस कदम से टैक्स वसूली में लगभग 150 अरब रुपये का नुकसान होगा.

पाकिस्तान सरकार की राय में चीनी निवेशकों को टैक्स छूट देने के बावजूद पाकिस्तान के स्थानीय कारोबारियों और निवेशकों को नुकसान नहीं होगा. पिछले दिनों पाकिस्तान की संसद में अपने लिखित जवाब में वित्त मंत्री इसाक डार ने चीनी निवेशकों को टैक्स में आंशिक और पूरी तरह छूट देने के बारे में जानकारी दी.

दूसरी तरफ, विश्लेषकों का कहना है कि सरकार चीनी निवेशकों को टैक्स के संबंध में कुछ ज्यादा ही रियायतें दे रही हैं. डॉन अखबार के पत्रकार खलीक कयानी ने डीडब्ल्यू को बताया, ''पिछले दस वर्षों से पाकिस्तान में आई सरकारों की नीति रही है कि भेदभावपूर्ण करों को समाप्त किया जाए. वर्ल्ड बैंक के साथ भी पाकिस्तान का यही समझौता हुआ है. यानी सरकार सभी निवेशकों को एक नजर से देखे.''

खलीक कयानी कहते हैं कि भविष्य में हो सकता है कि चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर परियोजना से फायदा हो लेकिन अभी तो इससे पाकिस्तान को नुकसान ही हो रहा है. वह कहते हैं कि इस साल पाकिस्तान को टैक्स वसूली के लक्ष्य से 170 अरब रुपये कम मिलने की आशंका है. उनके अनुसार कोरिडोर समझौते के तहत पाकिस्तान चीनी निवेशकों को टैक्स के मामले में कुछ ज्यादा ही प्राथमिकता दी जा रही है.

अर्थशास्त्री डॉक्टर अशफाक अहमद ने डीडब्ल्यू बताया, ''मैं भेदभाव के खिलाफ हूं अगर चीनी निवेशकों को फायदा पहुंचाया जाए और अपने देश और चीन के अलावा अन्य देशों के निवेशकों को हतोत्साहित किया तो यह ठीक नहीं है. सबसे के साथ बराबरी वाला सलूक होना चाहिए.''

डॉक्टर अशफाक कहते हैं कि टैक्स की कम वसूली से आर्थिक रूप से तो पाकिस्तान को नुकसान पहुंचेगा ही, साथ ही इससे स्थानीय उद्योगों को भी नुकसान होगा. उन्होंने कहा, ''चीनी कंपनियां दुनिया भर में कर देती हैं तो हम क्यों उन्हें इतना अधिक फायदा और मौके दे रहे हैं. पाकिस्तान में विदेशी निवेशक आम तौर पर टैक्स देते हैं और हमें लाभ मिलता है. लेकिन अगर हम किसी एक को ज्यादा भाव देंगे तो फिर दूसरे विदेशी निवेशक पाकिस्तान में निवेश नहीं करना चाहेंगे."

चीन-पाकिस्तान आर्थिक कोरिडोर पर गहरी नजर रखने वाली पत्रकार सारा हसन कहती हैं अगर निवेश एक ऐसे उद्योग में हो रहा है जहां कुछ हो रहा है या जिससे पाकिस्तानी लोगों को नौकरियां मिल रही हैं, तो उसे टैक्स में छूट देना समझ आता है लेकिन अगर ट्रेडिंग और सर्विसेज के क्षेत्र में निवेश हो रहा है तो ऐसे में टैक्स की छूट देने का कोई फायदा नहीं.

सारा कहती हैं, ''अब तक मैंने कोई ऐसी खबर नहीं सुनी है जिसके अनुसार कोई चीनी कंपनी आईटी में निवेश कर रही हो, सीमेंट या किसी और क्षेत्र में अपना उत्पादन प्लांट लगा रही है.''

सारा के मुताबिक चीनी कंपनियां अधिकांश इकॉनोमिक जोन बना रहे हैं जहां बड़े वेयर हाउसेज बनाए जाएंगे ताकि यहां से वह अपने उत्पादों का निर्यात कर सकें. सारा ने कहा, ''अगर चीनी निवेशक यहां बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित करते हैं तो टैक्स में छूट देना सही है क्योंकि इस तरह सरकार भी अपना निर्यात बढ़ा सकती है. इसकी एक मिसाल कपड़ा उद्योग है. पाकिस्तान ने कपड़ा कंपनियों को टैक्स छूट दी हुई है जिसकी वजह से पाकिस्तानी कपड़े बड़े पैमाने पर निर्यात होते हैं.''

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