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दुनिया

पाकिस्तान का 5000 का नोट बंद करने से इनकार

पाकिस्तान की सरकार ने 5000 रुपये के नोट को बंद करने की सिफारिश मानने से इनकार कर दिया है. देश की संसद के ऊपरी सदन ने ऐसी सिफारिश की थी.

पाकिस्तान के ऊपरी सदन सीनेट ने इसी महीने एक प्रस्ताव पास करके सरकार से सिफारिश की थी कि 5000 रुपये का नोट बंद कर दिया जाए. लेकिन देश के वित्त मंत्रालय ने इसे ना मानते हुए कहा है कि इससे व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा. मंत्रालय की ओर से जारी एक बयान में कहा गया, "चूंकि देश में कैश में बहुत सारा लेन-देन होता है, लिहाजा सरकार का मानना है कि 5000 रुपये का नोट बंद कर देने से लेन-देन पर बुरा असर पड़ेगा."

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भारत ने नवंबर महीने में अपने दो सबसे बड़े 1000 और 500 रुपये के पुराने नोट बंद कर नए नोट जारी किए हैं. इसका मकसद काले धन और नकली नोटों पर लगाम लगाना बताया गया था. इस कदम से भारत में कैश करंसी की काफी कमी हो गई है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा है. अर्थशास्त्री चिंतित हैं कि इसका असर देश के विकास पर भी पड़ सकता है.

पाकिस्तान में सबसे बड़ा नोट 5000 पाकिस्तानी रुपये का होता है. वित्त मंत्रालय ने बताया कि बीते वित्त वर्ष में पाकिस्तान ने जो कुल करंसी नोट छापे थे, उनके 17 प्रतिशत 5000 रुपये के थे. भारत की तरह पाकिस्तान में भी अनौपचारिक अर्थव्यवस्था बहुत मजबूत है. बड़ी मात्रा में लेन-देन कैश में होता है. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि देश की आबादी का बड़ा हिस्सा औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा ही नहीं है. वहां काला धन एक बड़ी समस्या है और लोगों को अपना काला धन उजागर करने के लिए अक्सर योजनाओं को जरिए लुभाया जाता है. लेकिन दशकों से जारी कोशिशों के बावजूद टैक्स और जीडीपी का अनुपात 10 प्रतिशत ही है.

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पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय का कहना है कि हम चाहते हैं कैश करंसी पर भार घटे और लोग डिजिटल बैंकिंग को अपनाएं. मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, "यह अर्थव्यवस्था में दस्तावेजीकरण को प्रोत्साहित करने का रास्ता है ना कि मौजूदा नोटों को बंद करने का."

वीके/एके (रॉयटर्स)

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