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दुनिया

पाकिस्तान में जनसंख्या के नये आंकड़ों पर खींचतान

पाकिस्तान में 19 साल बाद हुई जनगणना सियासी खींचतान की वजह बन रही है. कराची के कई नेता जनगणना के शुरुआती नतीजों को संसद में उनका प्रभाव कम करने की कोशिश बता रहे हैं.

पाकिस्तान में लंबी खींचतान के बाद इस साल आखिरकार जनगणना हुई. उनके शुरुआती नतीजों के मुताबिक बीते दो दशक में 57 प्रतिशत की वृद्धि के साथ पाकिस्तान की आबादी 20 करोड़ को पार कर गयी है. आबादी के नये आंकड़े कई पार्टियों को परेशान कर रहे हैं. उन्हें चिंता सता रही है कि एक तरफ तो उनकी राजनीतिक अहमियत घट सकती है तो वहीं उनके इलाके को संघीय सरकार से आवंटित होने वाली रकम भी प्रभावित हो सकती है.

पाकिस्तान में 1998 में हुई पिछली जनगणना के मुताबिक, लाहौर की आबादी 51 लाख थी. लेकिन पाकिस्तानी सांख्यिकी ब्यूरो की तरफ से जारी 2017 की जनगणना के शुरुआती नतीजे बताते हैं कि अब इस शहर की आबादी 116 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़ कर 11,126,285 करोड़ हो गयी है. यानी अब लाहौर ने आबादी के मामले में पुर्तगाल को भी पीछे छोड़ दिया है.

आधिकारियों के अनुसार आबादी के इस आंकड़े में दो प्रतिशत तक का अंतर हो सकता है. फिर भी इससे पंजाब सूबे की राजधानी लाहौर के सियासी चरित्र पर पड़ने वाले प्रभावों से इनकार नहीं किया जा सकता. पंजाब पाकिस्तान का सबसे अमीर प्रांत है और उसे सत्ताधारी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) का गढ़ माना जाता है.

दूसरी तरफ, विपक्षी पार्टियां जनगणना के आंकड़ों पर सवाल उठा रही हैं. खासकर सिंध प्रांत से ऐसी आवाजें खूब सुनने को मिल कर रही हैं, जिसकी राजधानी कराची में जनसंख्या बढ़ने की रफ्तार शुरुआती नतीजों में धीमी बतायी गयी है. कराची पाकिस्तान का सबसे बड़ा शहर और देश की आर्थिक राजधानी है. 1998 में शहर की आबादी 93 लाख थी और अनुमान है कि हाल के सालों में यह बढ़ कर दो करोड़ या उससे भी ज्यादा हो गयी है. लेकिन जनगणना के शुरुआती नतीजे बताते हैं कि शहर की आबादी 59 प्रतिशत बढ़ कर 14,910,352 हो गयी है. इस तरह कराची की आबादी अफ्रीकी देश सेनेगल के बराबर बतायी गयी है, लेकिन उससे काफी कम है, जितनी समझी जा रही थी.

पाकिस्तान सांख्यिकी ब्यूरो को प्रवक्ता हबीबुल्लाह खट्टक का कहना है कि आंकड़ों में कोई हेराफेरी नहीं की गयी है. उनका कहना है कि दोनों शहरों में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अलग अलग नियमों की वजह से आंकडों में अंतर हो सकता है. लेकिन विपक्षी पार्टियों का कहना है कि आंकड़ों में "गड़बड़ी" की गई है ताकि अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले नवाज शरीफ की पीएमएल (एन) का गढ़ पंजाब सबसे आगे रहे.

कराची और सिंध के कई शहरों में दशकों तक राज करने वाली मुत्तेहिदा कौमी मूवमेंट के प्रमुख फारूक सत्तार ने जनगणना के शुरुआती नतीजों को "बड़ी नाइंसाफी" बताया है. कराची में पत्रकारों के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "जनगणना में धांधली हुई है. अगर हमारी संख्या कम गिनी गयी है तो फिर संसद में हमारी सीटें पहले जितनी ही रहेंगी."

कराची की पाक सरजमीन पार्टी के महासचिव रजा हारून ने ट्वीट किया, "शहरी केंद्रों के लिए जनगणना के आंकड़े विवादास्पद लगते हैं, खास कर कराची के लिए जिसकी आबादी 2.2 करोड़ से ज्यादा मानी जाती है."

अगर पाकिस्तानी आबादी के 20.7 करो़ड़ के आंकड़े की पुष्टि हो गयी तो फिर वह ब्राजील को पीछे छोड़ दुनिया में पांचवां सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन जाएगा. चीन इस मामले में पहले जबकि भारत दूसरे नंबर पर है.

पाकिस्तान में जनगणना के नये आंकड़ों के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन, राष्ट्रीय चुनाव से पहले संसदीय सीटों और वित्तीय मदद का आवंटन होगा. मिसाल के तौर पर पंजाब की राजनीतिक पकड़ कमजोर हो सकती है क्योंकि लाहौर में बंपर जनसंख्या वृद्धि के बावजूद पूरे सूबे की आबादी अन्य प्रांतों के मुकाबले कम रफ्तार से बढ़ रही है.

एके/आरपी (एएफपी)

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