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दुनिया

पाकिस्तान में हिंदू मैरिज बिल संसद में पास

पाकिस्तानी संसद के निचले सदन ने एक अहम बिल पास किया जिसमें हिंदुओं को अपनी शादी का पंजीकरण कराने का अधिकार दिया गया है. इससे पाकिस्तान में हिंदू शादियों को मान्यता मिलेगी.

मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि अब तक पाकिस्तान में हिदुओं शादियों का रजिस्ट्रेशन न होने के कारण उन्हें मान्यता नहीं थी, ऐसे में अकसर हिंदू महिलाओं का अपहरण कर उनके बलात्कार और जबरन धर्म परिवर्तन की खबरें आती रहती थीं. नेशनल असेंबली ने दस महीनों तक विचार विमर्श करने के बाद सोमवार को इस बारे में एक अहम बिल पास किया. उम्मीद है कि पाकिस्तानी सीनेट भी इसे जल्द ही हरी झंडी दिखा देगा.

पाकिस्तान की 19 करोड़ की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी 1.6 प्रतिशत है. लेकिन 1947 में पाकिस्तान बनने के बाद ही वहां रह रहे हिंदुओं के पास कानूनी तौर पर ऐसा तरीका नहीं था जिससे वो अपनी शादी का रजिस्ट्रेशन करा सकें. हालांकि पाकिस्तान के एक अन्य अल्पसंख्यक समुदाय ईसाई लोगों के लिए शादी से जुड़ा 1879 का एक कानून है.

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नए बिल में हिंदुओं के लिए शादी की न्यूनतम उम्र 18 साल रखी गई है. वहीं अन्य धर्मों में शादी के लिए लड़के की उम्र कम से कम 18 जबकि लड़की की उम्र 16 होनी चाहिए. इससे कम उम्र में शादी करने पर पाकिस्तान में छह महीने की जेल और पांच हजार रुपये के जुर्माने का प्रावधान है. हालांकि पाकिस्तान में अकसर कम उम्र में बच्चियों की शादी के मामले सामने आते हैं.

पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग की प्रमुख जोहरा यूसुफ कहती हैं कि शादी के पंजीकरण से हिंदू महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, "एक बार शादी का पंजीकरण हो जाए तो कम से कम उनके कुछ अधिकारों की रक्षा तो हो पाएगी.” नए बिल के तहत उन महिलाओं को फिर से शादी करने की अनुमति भी दी गई है जिनके पति की मौत को छह महीने या उससे ज्यादा समय हो गया है. साथ ही इसमें तलाक देने का प्रावधान भी है.

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हालांकि कार्यकर्ताओं का मानना है कि हिंदू महिलाओं के अपहरण और जबरन धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर अभी बहुत काम किया जाना बाकी है. यूसुफ के मुताबिक, "जहां भी जबरन शादी का संदेह हो, वहां जांच होनी चाहिए. अभी तो हिंदू समुदाय के लोगों का कहना है कि उनकी कोई नहीं सुनता है, यहां तक कि अदालतें भी नहीं.”

रिपोर्ट: एके/ओएसजे (रॉयटर्स)

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