चीन को चिंता, पाक वाले प्रोजेक्ट पर 44 मौतें | दुनिया | DW | 12.09.2016
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दुनिया

चीन को चिंता, पाक वाले प्रोजेक्ट पर 44 मौतें

पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार उन्होंने बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात बेहतर बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. लेकिन चीन चिंतित है क्योंकि उसके लोग मर रहे हैं.

चरमपंथी चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर परियोजना में हर मुमकिन रुकावट डालना चाहते हैं. अभी तक इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले 44 लोग मारे जा चुके हैं और चीन इस बात से चिंतित है. सीपैक कही जाने वाली इस परियोजना के तहत पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनचियांग प्रांत से जोड़ा जाएगा. इस पर 46 अरब डॉलर की रकम खर्च की जाएगी. इसके तहत सड़कों का जाल, रेलवे और गैस और तेल पाइपलाइनें बिछाई जाएंगी. यह कोरिडोर पाकिस्तान के अशांत प्रांत बलूचिस्तान से गुजरता है और इस प्रांत के चरमपंथी इसकी राह में रुकावट माने जाते हैं.

पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार उन्होंने बलूचिस्तान में सुरक्षा हालात बेहतर बनाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं. बलूचिस्तान पाकिस्तान का प्राकृतिक संसाधनों से मालामाल इलाका है और यहां अलगाववादी बलोच नेता सीपैक का विरोध कर रहे हैं.

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पाकिस्तानी सेना की निगरानी में काम करने वाली निर्माण कंपनी फ्रंटियर वर्क्स ऑर्गेनाइजेशन (एफडब्ल्यूओ) के एक प्रवक्ता कर्नल जफर इकबाल का कहना है कि मारे जाने वाले सभी कर्मचारी पाकिस्तानी हैं और इनमें से ज्यादातर सड़क किनारे रखे गए बमों या निर्माण स्थलों पर होने वाले हमलों का शिकार बने.

उन्होंने बताया कि बलूचिस्तान में सन 2014 के बाद सड़कों के निर्माण के दौरान 44 कर्मचारी मारे गए हैं जबकि सौ से ज्यादा घायल हुए हैं. ऐसे में चीनी अधिकारियों ने पाकिस्तान से सुरक्षा के हालात को बेहतर बनाने की अपील की है. चीन की आशंकाओं को दूर करे के लिए पाकिस्तान ही ने पिछले साल आर्मी की एक नई डिवीजन बनाई थी, जिसमें दस हजार से भी ज्यादा जवान शामिल हैं और इनका काम सीपैक के निर्माण कार्य और उसमें लगे कर्मचारियों की सुरक्षा करना है.

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एफडब्ल्यूओ कंपनी की मालिक पाकिस्तानी फौज है और बलूचिस्तान, गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तानी कश्मीर में इसी कंपनी को ज्यादातर सड़कों और अन्य निर्माण कार्यों के ठेके दिए गए हैं. पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक बलूचिस्तान में सुरक्षा चिंताएं बदस्तूर मौजूद हैं, लेकिन सीपैक परियोजना का काम योजना के मुताबिक आगे बढ़ रहा है. पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि बलूचिस्तान में अलगाववादी तत्वों को विदेशों से मदद मिल रही है, लेकिन वह सभी समस्याओं से परिचित हैं.

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