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दुनिया

मोसुल को आईएस के कब्जे से छुड़ाने के लिए अभियान शुरू

इराक के प्रधानमंत्री ने मोसुल को तथाकथित इस्लामिक स्टेट के नियंत्रण से मुक्त कराने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने की घोषणा की है. 2011 में अमेरिकी सेनाओं के इराक छोड़ने के बाद ये देश में सबसे बड़ा सैन्य अभियान है.

सोमवार को इराकी प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने सरकारी टीवी पर घोषणा की, "जीत का समय आ गया है और मोसुल को आजाद कराने के लिए अभियान शुरू हो गया है. आज मैं इस विजयी अभियान के शुरू होने की घोषणा करता हूं जो आपको दाएश (आईएस) की हिंसा और आतंकवाद से मुक्त करेगा.”

इराक के दूसरे सबसे बड़े शहर मोसुल पर 2014 से इस्लामिक स्टेट का नियंत्रण है. माना जाता है कि उसके पास छह हजार सैनिक हैं जो मोसुल में इराकी सेना का सामना करने को तैयार हैं. इराकी सेना ने रविवार को तड़के मोसुल में हजारों पर्चे गिराए जिनमें वहां रहने वाले लोगों से कहा गया कि शहर को फिर से हासिल करने के लिए अभियान की तैयारियां अंतिम दौर में हैं. इनके मुताबिक सेना की टुकड़ियां और हवाई हमले आम लोगों को निशाना नहीं बनाएंगे.

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इस अभियान की तैयारियां लगभग एक महीने से चल रही थीं. पिछले हफ्ते आईएस के गढ़ मोसुल को 60 हजार सैनिकों वाली सेना ने पूरी तरह घेर लिया. माना जा रहा है कि 2011 में इराक से अमेरिकी सैनिकों के चले जाने के बाद ये देश में सबसे बड़ा सैन्य अभियान है. सरकार समर्थक इराकी कुर्द पेशमर्गा बल शहर के पूर्वी हिस्से से वहां पहुंचे रहे हैं जबकि अमेरिकी नेतृत्व वाला गठबंधन अभियान के लिए हवाई और जमीनी मदद मुहैया कराएगा. अमेरिकी रक्षा मंत्री एश्टन कार्टर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय गठबंधन ‘इराकी सेना, पेशमर्गा लड़ाके और इराकी लोगों' के साथ है.

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इस बीच संयुक्त राष्ट्र ने मोसुल में रहने वाले आम लोगों को लेकर चिंता जताई है. संयुक्त राष्ट्र में मानवीय सहायता और आपात सेवाओं के लिए उप महासचिव स्टेफान ओ'ब्रायन ने कहा, "मैं मोसुल में रहने वाले 15 लाख लोगों की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हूं, जो शहर को आईएसआईएस से वापस लेने के सेना के अभियान से प्रभावित होंगे.” इससे पहले, रविवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका और उसके सहयोगी पूरी कोशिश करेंगे कि हमले में आम लोगों की मौतें न हों.

एके/वीके (रॉयटर्स, एएफपी)

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