बांग्लादेशी ब्लॉगर सलाखों के पीछे | दुनिया | DW | 04.04.2013
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दुनिया

बांग्लादेशी ब्लॉगर सलाखों के पीछे

अभिव्यक्ति की आजादी का सपना भले ही सब देखते हों लेकिन सभी देशों में ये मिल जाए, जरूरी नहीं. अक्सर लोकतांत्रिक देशों में भी, अघोषित तौर पर विचार व्यक्त करने की आजादी नहीं होती. ऐसी ही स्थिति फिलहाल बांग्लादेश की है.

देश के के मशहूर ब्लॉगर आसिफ मोहिउद्दीन को इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के लिए जेल की सजा दे दी गई है. नास्तिक आसिफ पर जनवरी में संदिग्ध इस्लामी कट्टरपंथियों ने चाकू से हमला भी किया था. उन्हें ढाका में किसी रिश्तेदार के घर से पकड़ा गया.

उनकी गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के आधार पर तीन अन्य ब्लॉगरों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है. सरकार ने चेतावनी दी है कि वह इस्लामी कट्टरपंथियों की रैली से पहले नास्तिकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेगी.

कट्टरपंथी विचारधारा वालों ने सरकार से अपील की है कि वह इंटरनेट पर इस्लाम के बारे में अभद्र टिप्पणी करने वालों को सजा दे. मोहिउद्दीन ने अपनी वेबसाइट पर 'नास्तिकता जिंदाबाद' लिखा था.

ब्लॉगर अहमद राजिब हैदर के मारे जाने के बाद ऑनलाइन विषय वस्तु की जांच के लिए बांग्लादेश की सरकार ने मार्च में एक कमेटी बनाई. संदेह है कि हैदर को इस्लामिस्ट पार्टी के किसी कार्यकर्ता ने मारा था.

अधिकारियों ने बांग्लादेश में कुछ ब्लॉगों और फेसबुक पेजों पर रोक लगा दी है. क्योंकि हैदर की मौत के बाद नास्तिक लोगों और इस्लामपंथियों ने इंटरनेट पर एक दूसरे के खिलाफ अभियान चलाया.

अहमद राजिब हैदर उन विरोध प्रदर्शनों के आयोजन में शामिल थे, जिनमें युद्ध अपराध के लिए जमात ए इस्लामी पार्टी के नेता को मौत की सजा देने की मांग की जा रही थी.

एएम/एजेए (डीपीए)

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