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दुनिया

नॉर्वे की पीएम और फेसबुक के बीच फोटो पर विवाद

नॉर्वे के एक अखबार और फेसबुक के विवाद में प्रधानमंत्री भी कूदीं. उन्होंने शुक्रवार को नग्न तस्वीरों पर फेसबुक को चुनौती देते हुए वियतनाम में नापाम बम से भागती नंगी बच्ची की 1972 की तस्वीर पोस्ट की.

यह वह नाटकीय तस्वीर है जिसने 1972 में वियतनाम युद्ध को चेहरा दिया था. एपी के फोटोग्राफर निक उट की पुलित्सर विजेता तस्वीर नॉर्वे में प्रेस की आजादी की बहस के केंद्र में है जिसे फेसबुक ने पिछले महीने नॉर्वे के एक लेखक के पेज से डिलीट कर दिया था. तब से बहुत से नॉर्वे वासियों ने वह तस्वीर विरोधस्वरूप सोशल मीडिया पर पोस्ट की है. नॉर्वे की प्रधानमंत्री एर्ना जोलबर्ग भी शुक्रवार को विरोध करने वालों में शामिल हो गईं. जोलबर्ग की एक सहयाक जिगब्योर्न आनेस ने कहा कि फेसबुक ने कुछ ही घंटों के अंदर उनकी पोस्ट भी हटा दी. जोलबर्ग ने नॉर्वे की समाचार एजेंसी एनटीबी से कहा, "इस तरह की तस्वीर हटाकर वे, चाहे इरादा कितना भी अच्छा हो, हमारे साझा इतिहास को एडिट कर रहे हैं."

फेसबुक ने लंदन में अपने यूरोपीय मुख्यालय से बयान जारी कर कहा है कि "एक मामले में नग्न बच्चे की तस्वीर की अनुमति देने और दूसरे में नहीं देने में फर्क करना मुश्किल है." तस्वीर में दिख रही लड़की किम फुक नग्न है और रो रही है जबकि नापाम बम उसकी त्वचा की परतों को गला रहा है.

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नॉर्वे सरकार के कई सदस्यों ने प्रधानमंत्री जोलबर्ग का अनुसरण करते हुए इस तस्वीर को अपने फेसबुक पेज पर पोस्ट किया है. उनमें से एक शिक्षा मंत्री टोरब्योर्न रोइ इजाकसेन ने कहा कि यह "एक नामी फोटो है और हमारे इतिहास का हिस्सा है." जोलबर्ग ने बाद में इस तस्वीर को फिर से ब्लैक बॉक्स में डालकर पोस्ट किया लेकिन उसमें लड़की की जांघ से ऊपर के हिस्से को ढक दिया गया है. उन्होंने 1989 में चीन के तियाननानमेन चौराहे पर टैंक के सामने खड़े व्यक्ति जैसी नामी तस्वीर भी पोस्ट की जिसमें उस व्यक्ति को ब्लैक बॉक्स से ढक दिया गया है. जोलबर्ग ने लिखा है, "जब मैं ऑस्लो से ट्रोन्डहाइन के रास्ते पर थी, फेसबुक ने मेरी पोस्ट डिलीट कर दी, आज तस्वीरें प्रबाव डालने का ऐसा महत्वपूर्ण तत्त्व हैं कि यदि आप अतीत की घटना या इंसान को काट देते हैं तो आर इतिहास बदलते हैं या हकीकत बदलते हैं. "

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नॉर्वे के प्रमुख अखबार आफ्टेनपोस्टेन ने शुक्रवार को यह तस्वीर अपने पहले पेज पर प्रकाशित की थी और संपादक एस्पेन एगिल हानसेन ने फेसबुक के संस्थापक मार्क जकरबर्ग को एक खुला पत्र लिखा था जिसमें सोशल मीडिया के जार पर अपनी ताकत का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया था. हानसेन ने लिखा कि वे उससे दुखी, निराश और असल में डरे हुए हैं जो आप हमारे लोकतांत्रिक समाज के मुख्य आधार के साथ करने जा रहे हैं. फेसबुक ने अपने बयान में कहा है, "हम अपने वैश्विक समुदाय के लिए सुरक्षित और आदरपूर्ण अनुभव बनाए रखते हुए लोगों को खुद को अभिव्यक्त करने के बीच सही संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं. हमारे समाधान हमेशा सही नहीं होंगे लेकिन हम अपनी नीतियों और उन्हें लागू करने के तरीकों को बेहतर बनाने की कोशिश करते रहेंगे. "

समाचार एजेंसी एपी के वाइस प्रेसिडेंट पॉल कोलफोर्ड ने कहा, "एसोसिएटेड प्रेस को निक उट की फोटो पर गर्व है और वह उसे ऐतिहासिक असर को स्वीकार करता है. इसके अलावा हम इस शक्तिशाली तस्वीर पर अपने अधिकारों पर जोर देते हैं."

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