नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा | दुनिया | DW | 26.07.2017
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दुनिया

नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद छोड़ा

अपनी सहयोगी पार्टी आरजेडी के साथ खींचतान के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इस्तीफा दे दिया है.

बुधवार को जेडीयू की अहम बैठक हुई. इसके बाद नीतीश कुमार राज्यपाल से मिलने गये और उन्होंने इस्तीफा देने का एलान किया. नीतीश कुमार ने कहा कि अंतरआत्मा की आवाज पर उन्होंने यह कदम उठाया है और मौजूदा हालात में उनके पास कोई और चारा नहीं था.

इससे पहले आरजेडी ने भी अपने विधायकों की एक बैठक बुलायी. इसके बाद पार्टी मुखिया लालू प्रसाद यादव ने कहा कि उनके बेटे तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे क्योंकि नीतीश कुमार ने उनसे ऐसा करने को नहीं कहा है. भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे तेजस्वी यादव पर काफी समय से इस्तीफे के लिए दबाव बनाया जा रहा है. 

नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने किसी का इस्तीफा नहीं मांगा लेकिन लालू यादव और तेजस्वी यादव से आरोपों के बारे में स्पष्टीकरण देने को कहा था. उन्होंने कहा, "आरोप लगे हैं तो उनका उत्तर दिया जाना चाहिए." नीतीश कुमार ने कहा कि उन्होंने काफी इंतजार करने के बाद इस्तीफा देने का कदम उठाया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को उनके इस कदम पर बधाई दी है.

 

जेडीयू, राष्ट्रीय जनता और कांग्रेस ने 2015 में महागठबंधन बनाकर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा और स्पष्ट बहुमत हासिल किया था. 80 सीटों के साथ आरजेडी सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन वादे के मुताबिक मुख्यमंत्री पद 71 सीटें जीतने वाली जेडीयू के मुखिया नीतीश कुमार को दिया गया. तेजस्वी यादव उप मुख्यमंत्री बनाये गये. लेकिन तेजस्वी पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद गठबंधन में महीनों से खींचतान चल रही थी.

Indien Ramzan (UNI)

नीतीश और लालू के एक साथ आने को बड़ी सियासी कवायद माना गया था

अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नीतीश कुमार फिर से भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन कर सरकार बनायेंगे जिसके राज्य विधानसभा सभा में 53 विधायक हैं. बरसों तक दोनों पार्टियों की राज्य में गठबंधन सरकार रह चुकी है. लेकिन 2014 के आम चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ अपना गठबंधन तोड़ दिया था. राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 27 विधायक हैं.

हालिया राष्ट्रपति चुनाव में नीतीश कुमार ने विपक्षी उम्मीदवार मीरा कुमार की बजाय एनडीए के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन किया. इससे पहले वह मोदी सरकार के बहुचर्चित नोटबंदी के फैसले का भी समर्थन कर चुके हैं. ऐसे में, उनके भारतीय जनता पार्टी के फिर करीब जाने को लेकर लगातार अटकलें लगती रही हैं.

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