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दुनिया

देश के लगभग आधे वकील फर्जी हैं!

बार काउंसिल ने देश के मुख्य न्यायाधीश को दी जानकारी में कहा कि देश के करीब आधे वकील फर्जी हैं, काउंसिल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े सरकारी दस्तावेज को जारी करने में हो रही देरी का भी जिक्र किया है.

लोगों के सच और झूठ की पैरवी करने वाले वकीलों को लेकर बार काउंसिल ने एक हैरतअंगेज जानकारी दी है. अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, अपनी दो साल की वेरिफिकेशन ड्राइव में बार काउंसिल ने पाया कि देश में 40 से 45 फीसदी वकील फर्जी हैं. मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान काउंसिल के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने बताया कि संस्था को इस वेरिफिकेशन ड्राइव के लिए सिर्फ 6.5 लाख आवेदन मिले थे. हालांकि साल 2012 में मिले आंकड़ों मुताबिक करीब 14 लाख मतदाता वकील हैं.

मिश्रा ने कहा कि इन तथ्यों की मदद से उन वकीलों तक पहुंचा जा सकेगा जो गैरकानूनी ढंग से इस पेशे में जुड़े हैं. उन्होंने कहा कि इन कदमों के चलते ही देश में इस पेशे का स्तर सुधरेगा.

इस रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस खेहर ने काउंसिल से इस मामले की जड़ तक जाने के लिए कहा और साथ ही जमीनी स्तर पर जांच की सलाह दी है. मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इस ड्राइव से सिर्फ ये साफ नहीं होगा कि किसके पास गलत डिग्री है बल्कि उनके बारे में भी पता चलेगा जिनके पास कोई डिग्री ही नहीं है. वे लोग जो बिना किसी लाइसेंस के काम कर रहे हैं, जो रोज अदालत जाते हैं और बिना किसी अथॉरिटी के काम कर रहे हैं."

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मिश्रा ने इस दौरान न्यायाधीशों की नियुक्ति से जुड़े सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले डॉक्यूमेंट में हो रही देरी पर भी चिंता व्यक्त की.

एए/वीके (एएफपी)

 

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