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दुनिया

52 सेकंड के राष्ट्रगान पर अब देखिए 52 घंटे की बहस

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि सिनेमा हॉल्स में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाया जाएगा. इसके साथ ही पर्दे पर राष्ट्रीय ध्वज दिखाया जाएगा. सोशल मीडिया पर लोग इस पर खूब टिप्पणी कर रहे हैं.

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब सिनेमा में राष्ट्रगान बजेगा, तो वहां मौजूद सभी लोगों को उसके सम्मान में खड़ा होना होगा. अदालत ने कहा, "राष्ट्रगान प्रतिबद्ध राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रवाद की भावना का संचार कर सकता है.”

सर्वोच्च अदालत ने सरकार से कहा है कि इस आदेश पर एक हफ्ते के भीतर अमल होना चाहिए और इस बारे में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अवगत करा दिया जाना चाहिए. केंद्र सरकार इसके लिए सहमत हो गई है.

यही विषय भारत में सोशल मीडिया पर भी छाया है. कई लोग इसका समर्थन कर रहे हैं तो कइयों को इस पर आपत्ति है. अज्ञेया नाम के एक ट्वीट यूजर ने लिखा है कि सिनेमा में राष्ट्रगान को अनिवार्य बना देना इसकी अहमियत को कम करने जैसा है.

सोनी रेक्स ने लिखा है कि अब सुप्रीम कोर्ट लोगों को सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान के दौरान को ‘अपना सम्मान' दिखाने के लिए खड़ा होने पर मजबूर कर रहा है. उन्होंने इसे बुनियादी अधिकारों को प्रभावित करने वाला फैसला बताया है.

इंद्रनील लिखते हैं कि राष्ट्रगान सिर्फ 52 सेकंड का होता है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इसे सिनेमा में चलना अनिवार्य बना दिया है तो इस पर हर चैनल पर कम से कम 52 घंटे बहस होगी.

वहीं ट्विटर यूजर तरुण कश्यप ने इस फैसले का स्वागत किया है.

आदित्य राज कहते हैं कि लोगों को राष्ट्रगान के प्रति सम्मान दिखाना ही चाहिए.

रोफी गांधी नाम के ट्वीटर यूजर ने चुटकी लेते हुए लिखा है कि राष्ट्रगान सिनेमा में नहीं बल्कि एटीएम पर बजना चाहिए जहां मर्जी हो या न हो, आपको खड़ा होना ही पड़ेगा.

कुल मिलाकर इस मुद्दे पर सभी लोग अपनी अपनी राय रख रहे हैं और यह बहस कई दिनों तक गर्म रहने की उम्मीद है.

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