′अन्याय′ से मुस्लिम महिलाओं को बचाना चाहते हैं नरेंद्र मोदी | दुनिया | DW | 24.10.2016
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दुनिया

'अन्याय' से मुस्लिम महिलाओं को बचाना चाहते हैं नरेंद्र मोदी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक की आलोचना की है. मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक के बारे में उन्होंने कहा है कि धार्मिक आधार पर महिलाओं के साथ भेदभाव नहीं हो सकता.

तीन तलाक मुस्लिम समुदाय की परंपरा है जिसके तहत मुस्लिम पुरुष तीन बार तलाक शब्द बोल कर पत्नियों से अलग हो सकते हैं. मुस्लिम महिलाएं भी इस परंपरा का विरोध कर रही हैं. हाल ही में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामे में कहा था वह तीन तलाक के खिलाफ है. इस पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आपत्ति जताई थी.

तस्वीरों में जानिए, क्या है समान नागरिक संहिता

सोमवार को उत्तर प्रदेश में एक रैली में नरेंद्र मोदी ने कहा, "मेरी मुसलमान बहनों का क्या गुनाह है? कोई ऐसे भी फोन पर तीन तलाक दे दे और उसकी जिंदगी तबाह हो जाए. क्या मुसलमान बहनों को समानता का अधिकार मिलना चाहिए या नहीं. कुछ मुस्लिम बहनों ने अदालत में अपने हक की लड़ाई लड़ी. उच्चतम न्यायालय ने हमारा रुख पूछा. हमने कहा कि माताओं और बहनों पर अन्याय नहीं होना चाहिए. साम्प्रदायिक आधार पर भेदभाव नहीं होना चाहिए." उन्होंने कहा कि धर्म या समुदाय के आधार पर हमारी मांओं और बहनों के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए.

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नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के महोबा में बोल रहे थे. यूपी में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं. राज्य की 20 करोड़ आबादी के 20 फीसदी मुसलमान हैं. भारतीय जनता पार्टी देश में समान आचार संहिता की पक्षधर है. लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि समान आचार संहिता मुसलमानों के साथ भेदभाव का आधार बन सकता है. मोदी ने कहा कि जब महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा की बात होती है तो हमें धर्म के बारे में नहीं सोचना चाहिए. उन्होंने कहा, "चुनाव और राजनीति अपनी जगह पर होती है लेकिन हिन्दुस्तान की मुसलमान औरतों को उनका हक दिलाना संविधान के तहत हमारी जिम्मेदारी है."

एके/वीके (एएफपी)

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