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विज्ञान

आसमान से आएगा खनिज

तेजी से बढ़ रही वैज्ञानिक ताकत के साथ अब असल में तारे तोड़ना भी नामुमकिन नहीं होगा. कुछ ही दशकों में रोबोट अंतरिक्ष में खुदाई करेंगे और वहां से जरूरी खनिज धरती तक पहुंचाएंगे.

यिट्रियम, लैंथेनियम जैसे दुर्लभ खनिज पदार्थ सहित 15 अन्य खनिज पवनचक्की से लेकर हाइब्रिड कार, मिसाइलों या हर जगह इस्तेमाल हो रहे स्मार्टफोन के लिए भी बड़े काम की हैं. तकनीक के विकास के साथ इन खनिजों की मांग भी बढ़ती जा रही है. हालांकि ये बहुमूल्य तत्व हैं, लेकिन इन खनिजों को पहाड़ों से निकालना और उन्हें साफ करना बहुत महंगा और मेहनत का काम है. वैज्ञानिक इन्हें अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. ऑस्ट्रेलियाई शहर सिडनी में हुए पहले 'ऑफ अर्थ माइनिंग फोरम' में वैज्ञानिकों ने कहा कि भविष्य में तत्वों की आपूर्ति चांद और अंतरिक्ष के दूसरे उल्का पिंडों पर की जाने वाली खुदाई से हो सकेगी.

सिडनी के सेमिनार में खनन कंपनी रियो टिंटो, इंजीनियरिंग कंपनी सैंडविक, अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा, जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा के अलावा दुनिया भर की दूसरी प्रमुख संस्थाओं से अंतरिक्ष वैज्ञानिक और जानकार इकट्ठा हुए. मंगल ग्रह के क्यूरियोसिटी मिशन पर काम कर रही नासा के वैज्ञानिक रेने फ्रैडेट के अनुसार अंतरिक्ष का खनन संभव है और इसमें 20 से 30 साल लग सकते हैं. वहीं कई अन्य वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह इससे कम समय में संभव हो सकेगा.

क्या हैं चुनौतियां

कई बार तकनीक तो मौजूद होती है लेकिन इस्तेमाल के लिए बाकी बातों की तैयारी में ज्यादा समय लग जाता है. जैसे उन्हें निकालना जितनी बड़ी चुनौती होती है उतना ही उस पर खर्च भी आता है. उदाहरण के लिए चांद पर एक किलोग्राम का भार भेजने का खर्च एक लाख डॉलर आता है और इसमें इस्तेमाल होने वाली कोई भी मौजूदा तकनीक सस्ती नहीं है. नासा से संबंध रखने वाले दक्षिणी कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय में पढ़ा रहे प्रोफेसर बेरोक खोश्नेविस ने ऐसी तकनीक तैयार की है, जिसके जरिए मंगल और चांद पर मौजूद मलबे से जलरहित सल्फर की सीमेंट बनाई जा सकती है.

ऑस्ट्रेलिया की सरकारी रिसर्च संस्था सीएसआईआरओ में काम करने वाले मैथ्यू डनबाबिन अंतरिक्ष पिंडों पर खनन के लिए मशीन बनाने पर काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि सबसे बड़ी दिक्कत विद्युतीय ऊर्जा की है. गुरुत्वाकर्णष, तापमान, वायुमंडलीय दबाव और विकिरण सभी इस दिशा में अलग अलग समस्याएं पैदा करते हैं. इन सबसे एक साथ निबटने के लिए खनन रोबोटिक तरीके से ही संभव है.

किसका है चांद

अंतरिक्ष खनन और ऐसी दूसरी योजनाओं के बारे में सुनकर रोमांच तो होता है लेकिन जब चांद की खुदाई की बात आती है तो सवाल यह भी उठता है कि इन संसाधनों पर किसका अधिकार है?

अंतरराष्ट्रीय दूर संचार और तकनीकी संस्था सिंगटेल ऑपटस के वकील डोना लॉलर ने इसकी महासागरों से जुड़े कानून से तुलना की है. वह कहते हैं यह उसी तरह है जैसे कि अंतरराष्ट्रीय पानी में कोई किसी का क्षेत्र नहीं होता और उस पर कोई दावा नहीं कर सकता. 1967 में 100 देशों ने बाह्य अंतरिक्ष संधि बनाई, जिस पर हस्ताक्षर करने वाले सभी देश अंतरिक्ष में मनुष्य से होने वाली गतिविधियों की जिम्मेदारी लेंगे. हो सकता है जल्द ही खुदाई के साथ ही मनुष्य की चांद यात्रा भी शुरू हो जाए और यथार्थ और सपने के बीच कोई अंतर न रह जाए.

एसएफ/एजेए (एएफपी)

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