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दुनिया

पुराना विवाद, नए रिश्ते और मजबूत भविष्य, क्या चुनेंगे भारत-चीन?

भारत चीन से लगती सीमा पर सैन्य तैनाती बढ़ा रहा है. चीन की ओर से इस पर तीखी प्रतिक्रिया आई है. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद दशकों पुराना है और आर्थिक रिश्ते नए हैं.

भारत-चीन सीमा पर खासी हलचल है. वहां भारतीय टैंक पहुंच रहे हैं. 100 से ज्यादा टैंक पहुंच गए हैं. जवानों की तैनाती तेजी से बढ़ रही है. उत्तर में कराकोरम दर्रे से लेकर 826 किलोमीटर लंबी लाइन ऑफ ऐक्चुअल कंट्रोल पर भारतीय सेना के बढ़ते जमावड़े ने चीन को भी परेशान कर दिया है.

मीडिया में इस तरह की रिपोर्ट्स हैं कि सीमा पर भारतीय सैनिकों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. एनडीटीवी ने अपने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आने वाले महीनों में यह तादाद और ज्यादा बढ़ने वाली है. लद्दाख और उसके अगल-बगल के इलाकों में भारत और चीन का सीमा पर छिटफुट विवाद चलता रहता है. दोनों देश एक दूसरे के इलाकों पर दावे करते हैं और कोई तय सीमा नहीं है. जिसे फिलहाल सीमा कहा जाता है, वह सिर्फ नियंत्रण रेखा है. हालांकि हाल के सालों में दोनों के बीच किसी तरह का हिंसक विवाद नहीं हुआ है लेकिन ऐसा कई बार हो चुका है कि चीन के सैनिक भारतीय इलाके में घुस आए और वहां अपने कैंप तक बना लिए. भारत अब तक इस तरह की घटनाओं पर मौखिक आपत्ति ही जताता रहा है लेकिन पहली बार है कि भारत ने सैन्य आक्रामकता दिखाई है.

चीन की ओर से इस आक्रामकता पर तीखी प्रतिक्रिया आ रही है. चीन के सरकारी मीडिया ने कहा है कि इस हरकत का असर भारत में चीन के निवेश पर पड़ेगा. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स में छपे एक लेख में कहा गया है, "चीन की और ज्यादा कंपनियां भारत में निवेश के बारे में विचार कर रही हैं. ऐसे में मीडिया में इस तरह की रिपोर्ट्स आ रही हैं कि भारत-चीन सीमा पर करीब 100 भारतीय टैंक तैनात हो गए हैं ताकि किसी भी तरह की कार्रवाई का जवाब दिया जा सके. इस तरह की हरकतें लोगों का ध्यान खींच रही हैं. लेकिन यह बात परेशान करने वाली है कि एक तरफ तो भारत सीमा पर टैंक तैनात कर रहा है और दूसरी ओर चीन से निवेश के लिए कंपनियों को लुभाना चाहता है."

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चीनी मीडिया ने स्पष्ट तौर पर लिखा है कि भारत के इस कदम से निवेश प्रभावित हो सकता है. अखबार लिखता है, "भारत-चीन सीमा पर टैंकों की तैनाती चीन के व्यापारिक समुदाय को परेशान कर सकती है. निवेश के लिए फैसला करते वक्त वे लोग राजनीतिक अस्थिरता की आशंकाओं को भी ध्यान में रखेंगे."

भारत सीमा पर ना सिर्फ ज्यादा सैनिक और टैंक तैनात कर रहा है बल्कि हथियारबंद मशीनरी को सीमा के और नजदीक ले जाया गया है. एनडीटीवी की रिपोर्ट कहती है कि 1962 में इस सीमा पर जितनी फौज तैनात थी, मौजूदा संख्या उससे कई गुना है.

भारत और चीन के बीच इस सीमा पर विवाद करीब चार दशक पुराना है. 1962 में दोनों मुल्कों के बीच एक युद्ध हो चुका है जिसमें भारत हार गया था. लेकिन उसके बाद से भारत ने सीमा पर कोई खास निर्माण नहीं किया है. इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अब तक चंद बटालियनों के हाथ में ही रही है जिन्हें भारत-तिब्बत बॉर्डर पुलिस और लद्दाख स्काउट्स की मदद मिलती है. लेकिन 2005 के बाद से हालात बदले हैं. तब भारत के विदेश सचिव रहे श्याम सरन ने कहा था कि भारत-चीन सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के मद्देनजर निर्माण करना जरूरी है.

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ताजा कदम पर चीन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी नहीं आई है लेकिन सरकारी मीडिया ने आर्थिक कारणों का हवाला दिया है. ग्लोबल टाइम्स लिखता है, "भारत और चीन के बीच एक लंबे और सफल आर्थिक रिश्ते की बहुत संभावनाएं हैं. खासकर निर्माण के क्षेत्र में बड़ी साझेदारियां हो सकती हैं. इन संभावनाओं को हकीकत में बदलने के लिए दोनों देशों को गलतफहमियां दूर करने की ओर खासी मेहनत करनी होगी. तभी दोनों के बीच आर्थिक विकास की मजबूत नींव बन सकेगी."

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