1. Inhalt
  2. Navigation
  3. Weitere Inhalte
  4. Metanavigation
  5. Suche
  6. Choose from 30 Languages

विज्ञान

मंगल पर पहली इंसानी बस्ती बसाने के काम को धक्का

एक ब्रिटिश-डच कंपनी मंगल पर इंसान को बसाने की कोशिशों में जुटी थी. उसकी योजनाओं को बड़ा धक्का पहुंचा है. कंपनी ने कहा कि उसकी परियोजना में कई साल की देरी होगी.

इस संस्था ने मंगल पर इंसानों की बस्ती बसाने का काम शुरू कर दिया था. उसका कहना था कि 2026 में उसका पहला मानव मिशन मंगल पर पहुंच जाएगा. लेकिन अब कंपनी ने कहा है कि यह काम पूरा होने में 2031 तक का वक्त लगेगा. मानव मिशन से पहले मानव रहित मिशन भेजा जाना था. इसकी भी तय तारीख चार साल खिसका दी गई है. पहले यह मिशन 2018 तक मंगल पर पहुंचना था.

ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि वित्तीय दिक्कत होने वाली है. मिशन के लिए जरूरी अंतरिक्ष यान मार्स वन की खरीद में सहयोग कर रही स्विट्जरलैंड की कंपनी इनफिन इनोवेटिव फाइनैंस एजी ने अपनी नई वित्तीय रणनीति पेश की है. यह ऐलान दिसंबर के पहले हफ्ते में किया गया जिसके बाद मंगल पर बस्ती बसाने का मिशन कई साल आगे खिसका दिया गया.

देखिए, मंगल को खंगालने की इंसानी कोशिशें

फिलहाल मार्स वन के दो हिस्सेदार हैं. ब्रिटेन की कंपनी मार्स वन वेंचर्स और नीदरलैंड्स की संस्था मार्स वन फाउंडेशनय वैसे मार्स वन एक विवादास्पद परियोजना है. इसके तहत उन लोगों को मंगल पर भेजा जाना था जो वहां जाकर इंसानी बस्तियां बसाएंगे. यह एकतरफा मिशन है. यानी इस मिशन पर जाने वाले लोगों को सदा के लिए धरती को विदा कहना होगा. ऐसा करने के लिए 140 देशों के करीब दो लाख लोगों ने फॉर्म भर दिया था. इस पूरी प्रक्रिया पर एक टीवी शो भी बनना है. दो लाख अर्जियों में 100 लोगों को चुना गया है. इनमें से सिर्फ 24 लोगों को ही मंगल के एकतरफा मिशन के लिए चुना जाएगा. योजना के मुताबिक चुने हुए उम्मीदवार सात महीने लंबी मंगल यात्रा के लिए चार-चार लोगों के छह समूहों में धरती से रवाना होंगे. इन लोगों का काम होगा कि मंगल पर पहुंचकर पानी खोजें, ऑक्सीजन पैदा करें और फिर अपने लिए खाना तैयार करेंगे.

जानिए, धधकते आग के गोले सूरज की तस्वीरें

अभी तक सिर्फ नासा ने मंगल पर एक मानवरहित मिशन भेजा है. अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा मंगल पर भेजने के लिए तीन अभियानों की तैयारी कर रही है. लेकिन 2030 से पहले किसी इंसान को मंगल पर भेजने की नासा की कोई योजना नहीं है.

वीके/एके (एएफपी)

DW.COM

संबंधित सामग्री