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दुनिया

फ्रांस में क्यों हो रहे हैं इतने आतंकी हमले!

सवाल यह है कि फ्रांस में अचानक इतने हमले क्यों हो रहे हैं. 2015 की जनवरी से अब तक यूरोप के इस बेहद खूबसूरत देश में अलग-अलग हमलों में 235 लोग मारे जा चुके हैं.

मंगलवार को फिर फ्रांस में हमला हुआ. दो हथियारबंद लोगों ने एक बूढ़े पादरी को मार डाला. आईएस ने इस हमले की जिम्मेदारी ली. इस तरह फ्रांस में आतंक का एक और पड़ाव पूरा हुआ. लेकिन सवाल यह है कि फ्रांस में अचानक इतने हमले क्यों हो रहे हैं. 2015 की जनवरी से अब तक यूरोप के इस बेहद खूबसूरत देश में अलग-अलग हमलों में 235 लोग मारे जा चुके हैं. किसी भी यूरोपीय देश में यह सबसे ज्यादा संख्या है.

ऐसा नहीं है कि सारे हमले विदेशियों ने ही किए हैं. फ्रेंच बोलने वाले या फ्रांसीसी नागरिक बड़ी संख्या में हमलों में शामिल रहे हैं. और ज्यादातर हमले खुदकुश थे यानी हमलावर सिर पर कफन बांधकर ही आए थे और मारे गए. राष्ट्रपति फ्रांसोआ ओलांद कहते हैं कि फ्रांस आतंकवादियों का सबसे बड़ा दुश्मन है क्योंकि यहां मानवाधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान होता है. नीस में हुए ट्रक हमले के बाद ओलांद ने कहा, "अगर आतंकवादी हम पर हमला करते हैं तो ऐसा इसलिए है क्योंकि वे जानते हैं कि फ्रांस किस बात का प्रतीक है."

विशेषज्ञ मानते हैं कि ओलांद की बात काफी हद तक ठीक है. फ्रांस की अपनी एक जीवनशैली है जो लोकतांत्रिक मूल्यों, अभिव्यक्ति की आजादी और धर्मनिरपेक्षता पर टिकी है. लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं है. फ्रांस का औपनिवेशिक इतिहास भी उसके वर्तमान के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है. साथ ही, जनसंख्या की विषमताएं और विदेशी जमीन पर इस्लामिक आतंकवादियों के खिलाफ हमले भी बड़ी वजह हैं.

यूरोप में मुसलमानों की सबसे बड़ी आबादी फ्रांस में ही है. यहां 50 लाख से ज्यादा मुसलमान रहते हैं. देश की कुल आबादी छह करोड़ 60 लाख है. मुसलमानों की इतनी बड़ी आबादी की वजह अफ्रीकी और मध्य-पूर्व के देशों में फ्रांस के वे उपनिवेश हैं जहां पिछली सदी में फ्रांसीसियों का राज था. इन उपनिवेशों में रहने वाले लोग बड़ी तादाद में फ्रांस आए और अपनी मादरी जबान के साथ-साथ फ्रेंच भी सीखकर बड़े हुए. फिलहाल वे फ्रांस के जिन हिस्सों में रहते हैं वे देश के सबसे गरीब और अलग-थलग पड़े इलाके हैं.

अब हो यह रहा है कि फ्रांस के सैनिक उन्हीं इलाकों में आतंकवाद के खिलाफ युद्ध में शामिल हैं जहां कभी फ्रांसीसी उपनिवेश होते थे. जैसे मध्य पूर्व में या अफ्रीका में भी. जैसे इराक और सीरिया में फ्रांसीसी वायु सेना आईएस के ठिकानों पर हमले कर रही है. लेकिन अपने यहां फ्रांस धर्मनिरपेक्षता को बढ़ावा देने में सख्ती की हद तक जा रहा है. मसलन, मुस्लिम आबादी को मुख्य धारा में शामिल करने के नाम पर कई ऐसे नियम-कानून लागू किए गए हैं जिन्हें कट्टरपंथी लोग ज्यादती कहकर प्रचारित करते हैं. जैसे कि 2010 में देश में मुंह ढकने वाले नकाब पहनने पर रोक लगा दी गई. 2004 में स्कूलों में सिर ढकने पर रोक लगा दी गई थी.

द न्यू यॉर्क टाइम्स में एक लेख में फ्रांसीसी समाजविज्ञानी फरहाद खोसरोखवार लिखते हैं, "सिद्धांत में तो फ्रांस का समेकन का मॉडल बहुत उदार है लेकिन असल जमीन पर यह काफी कठोर है. हालांकि फ्रांस ने बड़ी संख्या में प्रवासियों को समेकित करने में कामयाबी पाई है लेकिन जो हाशिए पर छूट गए हैं उनमें कड़वाहट भर गई है. और यह कड़वाहट जर्मनी या ब्रिटेन में रहने वाले अल्पसंख्यकों की कड़वाहट से कहीं ज्यादा है." खोसरोखवार इस बात पर जोर देते हैं कि मोरक्को, ट्यूनीशिया और अल्जीरिया जैसे देशों के मुसलमानों में हाशिये पर छूटने की संभावना ज्यादा दिखती है. यही मुस्लिम देश फ्रांस के सबसे नजदीक भी हैं. ये तीनों देश फ्रांस के अधीन रहे हैं और 1950 और 1960 के दशक में यहां भयंकर युद्ध हो चुके हैं जिनके बाद फ्रांस यहां से निकल गया था. लेकिन उसका प्रभाव हमेशा यहां बना रहा. यहां बनने वाली सरकारें फ्रांस के पक्ष में रहीं और उन पर फ्रांस के कहे पर चलने के आरोप लगते रहे हैं. 1990 के दशक में अल्जीरिया में एक हथियारबंद संगठन आर्म्ड इस्लामिक ग्रुप ऑफ अल्जीरिया खड़ा हो गया जो फ्रांस समर्थक सरकार को सत्ता से हटाना चाहता था. उसने देश में कई विदेशियों की हत्याएं की. ओलांद के राष्ट्रपति बनने के बाद पश्चिम अफ्रीकी देशों में फ्रांसीसी सेना का दखल और ज्यादा बढ़ा है. मसलन 2013 में उसने माली में हो रहे युद्ध में दखल दिया था.

विशेषज्ञों का मानना है कि अब जो लोग फ्रांस में आतंकी हमले कर रहे हैं उनकी जड़ें उन्हीं पश्चिम अफ्रीकी देशों में हैं. ये हमलावर मध्य पूर्व से नहीं आ रहे हैं जबकि उन इलाकों से आ रहे हैं जहां फ्रांस अभी या दशकों पहले सैन्य कार्रवाइयां कर चुका है. उन देशों के प्रवासियों के ये बच्चे अब इस्लामिक स्टेट जैसे संगठनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. देश के कम से कम एक हजार नागरिक सीरिया की यात्रा कर चुके हैं. इनमें से ज्यादातर अफ्रीकी मूल के मुसलमान हैं. सीरिया भी कभी फ्रांस के अधीन था.

हाल ही में एक वीडियो इंटरनेट पर जारी हुआ. इस वीडियो में एक फ्रेंच गाना है जो कहता है कि फ्रांस में रहने वाले आईएस के समर्थक देश की जड़ें हिला दें. गाने के बोल कुछ यूं हैं कि सूअरों का खून बहा दो, उनकी आत्माएं मिटा दो, फ्रांस को हिला दो. और फ्रांस सच में हिल रहा है. एक लाख से ज्यादा सुरक्षा बल इस वक्त देश की सड़कों पर पहरा दे रहे हैं.

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