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दुनिया

जर्मनी में इस साल मुसलमानों पर हमले घटे

जर्मनी में फिर एक मुस्लिम महिला पर हमला हुआ है. हालांकि ऐसे मामलों में काफी कमी देखी जा रही है. बीते साल के मुकाबले मुसलमानों पर इस साल कम हमले हुए हैं.

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में बस स्टॉप पर खड़ी एक बुर्कानशीं पर एक व्यक्ति ने हमला कर दिया. आरोपी ने महिला का स्कार्फ फाड़ डालने की कोशिश की और उसे घूंसे मार-मार कर घायल कर दिया. पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक 41 साल की यह महिला सीरिया से आई एक रिफ्यूजी मुसलमान है. वह बर्लिन के शोनबर्ग बस स्टॉप इंतजार कर रही थी कि उसके बगल में खड़ा शख्स उस पर टूट पड़ा. उसने महिला के सिर से स्कार्फ फाड़ने की कोशिश की. पहले तो महिला अपना बचाव कर गई. लेकिन आरोपी ने उसे धक्का देकर नीचे गिरा दिया और घूंसे बरसाने लगा. वहां खड़े लोग महिला को बचाने के बजाय भाग गए.

महिला को बाजू, टांग और सिर पर चोट आई है. घटना मंगलवार की है जबकि पुलिस में रिपोर्ट बुधवार को लिखाई गई.

जुलाई महीने में कील शहर में भी एक मुस्लिम महिला पर इसी तरह का हमला हुआ था. तब हमलावर ने महिला को मारने के साथ-साथ इस्लाम विरोधी नारे भी लगाए थे.

जर्मन समाज की उथल-पुथल समझनी है तो ये तस्वीरें देखिए

हालांकि मुसलमानों के खिलाफ हिंसा का यह पहला मामला नहीं है लेकिन एक रिपोर्ट बताती है कि 2016 कमोबेश शांत रहा है. पहले छह महीनों में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के मामलों में कमी आई है. राइनिषे पोस्ट की एक एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक 2015 की तुलना में 2016 में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के कम मामले दर्ज हुए हैं. इस रिपोर्ट के हिसाब से प्रवासियों के लिए बनाए गए कैंप अब भी मुसलमानों के खिलाफ हिंसा के ठिकाने बने हुए हैं.

राइनिषे पोस्ट ने बताया है कि 2016 के पहले छह महीनों में मस्जिदों पर या मुसलमानों पर कुल 29 हमले हुए हैं. बीते साल के आखिरी छह महीनों में 44 ऐसे हमले हुए थे. हालांकि प्रवासियों के खिलाफ, खासकर इस्लाम के खिलाफ प्रदर्शनों में कोई कमी नहीं आई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 2016 की पहली छमाही में ऐसी 129 रैलियां हुईं. पहले तीन महीने में 80 रैलियां हुई थीं जबकि बाद के तीन महीने कमोबेश शांत रहे. इस दौरान 49 रैलियां हुईं.

तस्वीरें: कोई सरहद ना इन्हें रोके

जर्मनी में एक के बाद एक कई ऐसे जानलेवा हमले हुए हैं जिनमें प्रवासियों ने सार्वजनिकों जगहों पर गोलियां चलाकर या बम धमाके करके मासूम लोगों को अपना शिकार बनाया. ऐसे ज्यादातर मामलों में मुसलमान ही आरोपी थे. हालांकि हर मामला आतंकवादी हमला नहीं था लेकिन इससे समाज में एक तरह का डर महसूस किया जा सकता है. और यह डर दोनों तरफ है. स्थानीय लोग भी डरे हुए हैं और प्रवासी भी कह रहे हैं कि वे असुरक्षित महसूस कर रहे हैं.

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