यूपी और भारत हिंदूवादी एजेंडे के लिए तैयार हैं? | दुनिया | DW | 31.03.2017
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दुनिया

यूपी और भारत हिंदूवादी एजेंडे के लिए तैयार हैं?

उत्तर प्रदेश में बात मीट की दुकानें बंद कराने की हो या फिर एंटी रोमियो दस्ते बनाने जैसे कदमों की, राज्य की सियासत पर भगवा रंग गहरा होता जा रहा है. समर्थक फूले नहीं समा रहे हैं तो आलोचक चिंता में मरे जा रहे हैं.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में धमाकेदार जीत के बाद जब भारतीय जनता पार्टी ने अपने फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री की गद्दी सौंपने का फैसला किया तो साफ हो गया कि पार्टी हिंदुत्व वाले एजेंडे को ही आगे बढ़ाना चाहती है.

प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी विकास की बात ज्यादा करते रहे हैं और हिंदूवादी एजेंडे की कम. लेकिन आबादी के लिहाज देश के सबसे बड़े राज्य की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंपे जाने से पता चलता है कि पार्टी किस दिशा में जाना चाहती हैं. योगी आदित्यनाथ अपने विवादित बयानों के लिए मशहूर रहे हैं जिनमें अकसर मुसलमानों को निशाना बनाया गया है.

अंग्रेजी अखबार 'द टेलीग्राफ' की राष्ट्रीय मामलों की संपादक मानिनी चटर्जी आदित्यनाथ की नियुक्ति को "सेक्युलर स्टेट के खिलाफ एक तरह से युद्ध की घोषणा बताती हैं.” वह कहती हैं कि बीजेपी ने यूपी में मिले जनादेश का यह मतलब निकाला है कि यूपी और पूरा देश आक्रामक हिंदूत्व के लिए तैयार है. मुख्यमंत्री बनते ही योगी ने सबसे पहले जो फैसले लिये उनमें बिना लाइसेंस वाले बूचड़खानों और मीट की दुकानों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है, जिन्हें आम तौर पर मुसलमान चलाते हैं.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मीडिया समन्वयक राजीव तुली कहते हैं, "अगर ये वैध है तो किसी को भी इन्हें रोकने का अधिकार नहीं है. लेकिन अगर ये अवैध है तो फिर इन्हें कैसे चलने दिया जा सकता है.” वहीं बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता भी योगी सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहते हैं कि यह पार्टी के घोषणापत्र का हिस्सा था. इस नेता के मुताबिक, "यहां तक कि मोदीजी ने भी 2014 के चुनावों के दौरान पिंक रिवॉल्यूशन (मीट निर्यात उद्योग) को बंद करने का वादा किया था, इसलिए अवैध दुकानों को बंद करने में कुछ भी गलत नहीं है.” झारखंड, राजस्थान, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश जैसे बीजेपी शासित अन्य राज्यों में भी अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई हो रही हो रही है

इतने बड़े पैमाने पर बूचड़खानों के बंद होने से जहां मीट की किल्लत होगी, वहीं भैंस के मीट और अन्य मीट उत्पादों के निर्यात में बाधा आ सकती है. राजनीतिक विश्लेषक नीरजा चौधरी कहती हैं, "कई राज्य सरकारों की तरफ से उठाए गए इस कदम से अल्पसंख्यक समुदाय में एक डर का माहौल है.”

भारत दुनिया भर में भैंस के मांस के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है. वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान भारत ने चार अरब अमेरिकी डॉलर का मीट बेचा. उसके सबसे बड़े खरीददारों में वियतनाम, मलेशिया और मिस्र जैसे देश शामिल हैं. भारत में उत्तर प्रदेश भैंस के मांस का सबसे बड़ा उत्पादक है और निर्यातकों का कहना है कि राज्य सरकार के हालिया फैसले से कारोबार को धक्का लगेगा.

नीरजा चौधरी कहती हैं, "बहस वैध और अवैध से बहुत आगे निकल गई है. हाल ही में गौरक्षकों ने कई बूचड़खानों को आग लगा दी, जिससे असुरक्षा का माहौल पैदा हुआ है.” उनका इशारा उत्तर प्रदेश में कई बूचड़खानों पर हुए हमलों की तरफ था. चौधरी की राय है कि उत्तर प्रदेश में इतनी बड़ी जीत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ऐसी नीतियां अपनानी चाहिए जिसमें सबको साथ लेकर चला जाए.

एके/आरपी (रॉयटर्स,एएफपी)

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