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दुनिया

सोते हुए विकलांगों का कत्ल क्योंकि उन्हें 'जीने का हक नहीं'

जापान में एक व्यक्ति रात को विकलांगों के लिए बनाए गए एक अस्पताल में घुस गया और चाकू से सोते हुए लोगों पर हमला कर दिया. इस हमले में 19 लोगों की मौत हो गई और 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए.

अधिकारियों ने बताया कि बीते कई दशकों में जापान में यह सबसे बुरा हत्याकांड है. 19 सोते हुए विकलांग लोगों को कत्ल कर दिया गया. यह हमला राजधानी टोक्यो के सागामिहार कस्बे में हुआ. वहां के सुकूई यामायुरी-इन अस्पताल में घुसकर हत्या करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया गया है. चीफ कैबिनेट सेक्रेटरी योशिहिडे सुगा ने बताया, "यह एक दिल तोड़ देने वाली घटना है जिसमें मासूम लोग शिकार बन गए." उन्होंने बताया कि हत्यारा 26 साल का एक युवक है जो इसी अस्पताल में काम करता था. स्तोशी उएमात्सू नाम के इस युवक ने फरवरी में कुछ पत्र लिखे थे जिनमें उसने 470 विकलागों को जान से मार देने की बात कही थी. क्योडो समाचार एजेंसी के मुताबिक उसने यहां तक लिखा था कि वह अस्पातल के दो अलग-अलग इलाकों में भर्ती 260 लोगों की जान लेगा लेकिन कर्मचारियों को नुकसान नहीं पहुंचाएगा. संसद के निचले सदन के स्पीकर को दिए गए पत्रों में उसने लिखा था, "मेरा मकसद ऐसी दुनिया बनाना है जिसमें बहुत ज्यादा विकलांग लोगों को इच्छा मृत्यु का हक हो. अगर वे अपने घरों में रह ना सकें या समाज में सामान्य जीवन न बिता सकें तो उन्हें उनके अभिभावकों की सहमति से इच्छा मृत्यु का हक होना चाहिए." इन चिट्ठियों के बाद स्तोशी को अस्पताल में भर्ती करा दिया गया था. एक डॉक्टर ने जब उसे ठीक घोषित कर दिया तो उसे 2 मार्च को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई.

घटना स्थानीय समय के अनुसार रात करीब ढाई बजे हुई. अस्पताल के स्टाफ ने पुलिस को फोन करके बताया कि छुरा लिए एक आदमी अस्पताल में घुस आया है. वह काली टी शर्ट और पैंट पहने हुए था.

करीब साढ़े सात एकड़ में फैला यह अस्पताल स्थानीय प्रशासन ने बनाया था. यह पहाड़ियों से घिरा हुआ है और इसके किनारे सगमी नदी बहती है. यहां हर तरह की विकलांगता से पीड़ित लोगों का इलाज होता है. इसकी क्षमता 160 लोगों की है जिसमें स्टाफ भी शामिल है.

देखिए, जापान में लाशों का होटल

सागामिहारा के लोग इस घटना से सदमे में हैं. इस इलाके में पिछली बार कोई हत्या 10 साल पहले हुई थी. घटना की जानकारी मिलने पर लोग अस्पताल के बाहर जमा हो गए. एक व्यक्ति ओशिकाजू शिमो ने बताया, "यह एक शांत सा कस्बा है. मैं तो सोच भी नहीं सकता था कि यहां ऐसा कुछ हो सकता है." एक अन्य व्यक्ति सुजूमू फुजिमुरा ने कहा, "वे लोग तो विकलांग थे, अपने लिए लड़ने के वास्ते खड़े भी नहीं हो सकते थे. किसी ने उनकी हत्या कर दी, यह सोचकर ही आंसू निकल जाते हैं."

यह है नास्तिकों का देश

मरने वाले 19 से लेकर 70 साल तक के हैं. इनमें 9 पुरुष और 10 महिलाएं हैं. पुलिस को युवक के पास से एक बैग मिला जिसमें कई छुरे थे. एक छुरा खून से सना हुआ था. घायलों को आसपास के छह अस्पतालों में भर्ती कराया गया है.

जापान में इस तरह के सामूहिक नरसंहार ना के बराबर होते हैं. खासकर छुरे से कत्ल की घटनाएं बहुत कम सुनने में आती हैं. वहां हथियारों को लेकर भी सख्त कानून हैं और नागरिकों को हथियार ना के बराबर मिलते हैं. 2001 में एक ऐसी घटना हुई थी जब ओसाका शहर के एक स्कूल में सफाईकर्मी ने 8 बच्चों को मार डाला था. 2008 में एक व्यक्ति ने भीड़ पर ट्रक चढ़ा दिया था और फिर लोगों पर चाकू से भी हमला किया था. उस घटना में सात लोगों की जान गई थी. इस घटना के बाद कानून में बदलाव किए गए. 2009 में बनाए गए नए कानून के मुताबिक दोधारी हथियार रखने पर पाबंदी है.

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