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दुनिया

आईएस लड़ाकों की वो 1400 विदेशी पत्नियां और बच्चे

इराक में सुरक्षा बल आतंकवादी संगठन आईएस के लड़ाकों को तो खदेड़ रहे हैं, लेकिन उनके सामने यह सवाल बना हुआ है कि पीछे छूटे आईएस लड़ाकों की विदेशी पत्नियों और बच्चों का क्या करें.

मोसुल में आईएस के बचे खुचे ठिकानों में से एक ठिकाने को चरमपंथियों से मुक्त कराने के बाद इराकी अधिकारियों ने लगभग 1,400 लोगों को हिरासत में रखा हुआ है. इनमें आईएस के संदिग्ध लड़ाकों की पत्नियां और बच्चे शामिल हैं. ऐसे बहुत से लोगों का कहना है कि उनका संबंध रूस, तुर्की और मध्य एशिया से है, लेकिन अधिकारी बताते हैं कि इनमें से कुछ लोग यूरोप के देशों से भी हैं. ये लोग 30 अगस्त से मोसुल के एक कैंप में रह रहे हैं.

एक इराकी खुफिया अधिकारी का कहना है कि इन लोगों के मूल देशों से बात हो रही हैं ताकि उनकी राष्ट्रीयता की पुष्टि की जा सके क्योंकि इनमें से ज्यादातर महिलाओं के पास अब कोई मूल दस्तावेज नहीं है.

जब से इराकी सुरक्षा बलों ने मोसुल और उसके आसपास के इलाकों को आईएस से मुक्त कराने का अभियान शुरू किया है तब से हिरासत में लिये गये विदेशी लोगों का यह सबसे बड़ा समूह है. सीरिया और इराक में बहुत से विदेशी इस्लामिक स्टेट के लड़ाके के तौर पर लड़ रहे हैं.

वरिष्ठ इराकी सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि जब तक इन लोगों को उनके देश भेजने का इंतजाम नहीं हो जाता, तब तक इन्हें रखने के लिए सुरक्षित घरों की तलाश की जा रही है. अभी इन लोगों को कैंप छोड़ कर जाने की अनुमति नहीं है.

रॉयटर्स के रिपोर्टरों ने तंबुओं में चटाई पर बैठे सैकड़ों महिलाओं और बच्चों को देखा है जो तुर्की, फ्रेंच और रूसी समेत कई भाषाएं बोल रहे थे. चेचन मूल की एक महिला ने फ्रेंच ने बताया कि इससे पहले वह पेरिस में रहती थी. उसने बताया, "मैं वापस (फ्रांस) जाना चाहती हूं, लेकिन पता नहीं कैसे जा पाऊंगी." उसके मुताबिक वह नहीं जानती कि उसके पति का क्या हुआ. वही उसे इस्लामिक स्टेट में भर्ती होने के लिए इराक लेकर पहुंचा था.

सुरक्षा अधिकारी का कहना है कि इन महिलाओं और बच्चों में से ज्यादातर ने उत्तरी शहर तल अफार के पास कुर्दिश पेशमर्गा लड़ाकों के सामने आत्मसमर्पण किया था. उनके साथ उनके पति भी थे. लेकिन कुर्दों ने महिला और बच्चों को इराकी अधिकारियों के हवाले कर दिया जबकि पुरुषों को अपनी हिरासत में रख लिया. माना जाता है कि यह सभी आईएस लड़ाके थे.

इराकी बलों ने जब 30 अगस्त को मोसुल से आईएस को निकाल बाहर किया तो बहुत से परिवार तल अफार की तरफ भाग गये. इराकी बलों ने इस बीच तल अफार पर भी नियंत्रण कर लिया है.

सहायता कर्मियों को आशंका है कि इन नये लोगों का उन इराकी लोगों से टकराव हो सकता है जिन्होंने युद्ध में अपने घर खो दिये हैं और कैंपों में रहने को मजबूर हैं. बहुत से लोग आईएस के राज में अपने साथ हुए सलूक का बदला लेना चाहते हैं. मोसुल और उसके आसपास के इलाकों पर आईएस ने 2014 में कब्जा किया था. इराकी सेना के एक खुफिया अधिकारी ने बताया, "इन परिवारों को सुरक्षा कारणों से कैंप के एक तरफ रखा गया है." इनमें से 541 बच्चों और महिलाओं की मदद कर रही नॉर्वेजियन रिफ्युजी काउंसिल (एनआरसी) का कहना है इराकी सरकार को जल्द ही तय करना होगा कि इन लोगों के भविष्य को लेकर उसकी क्या योजना है.

दूसरी तरफ, पश्चिमी देशों को आशंका है कि इस्लामी स्टेट की "खिलाफत" का अंत होने के बाद अगर आईएस के लड़ाके और उनके परिवार अपने मूल देशों में वापस आएंगे तो इससे समाज में कट्टरपंथ बढ़ने का खतरा पैदा हो सकता है. फ्रांस के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जो भी नागरिक आईएस के साथ जुड़े पाये जाएं उनके खिलाफ इराक में ही मुकदमा चलाया जाये.

वहीं कैंप में अल्जीरियाई मूल की एक 27 वर्षीय फ्रांसीसी महिला कहती है कि उसका पति धोखे से उसे आईएस में भर्ती कराने के लिए लेकर आया. उसने बताया, "मेरी मां को पता भी नहीं है कि मैं कहां हूं." उसका कहना है कि वह पिछले साल तुर्की के रास्ते पहले सीरिया पहुंची और उसके बाद उसे इराक लाया गया था. अपनी गोद में बच्चे को लिये हुए इस महिला ने बताया, "तीन महीने पहले ही मैंने इस बच्ची को जन्म दिया है."

एके/एमजे (रॉयटर्स)

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