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दुनिया

इस्राएल के पनडुब्बी खरीदने से कैसे होगा ईरान को फायदा

इस्राएल अपने प्रतिद्वंद्वी ईरान से अपनी रक्षा के लिए जर्मनी से आधुनिक पनडुब्बियां खरीद रहा है. लेकिन इस डील का आर्थिक रूप से फायदा ईरान को ही होगा.

नवंबर में अपनी कैबिनेट की बैठक में इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतान्याहू ने जोर देकर कहा कि इस्राएल के अस्तित्व की रक्षा के लिए नई पनडुब्बियां बहुत जरूरी हैं. इन डॉल्फिन-क्लास पनडुब्बियों को जर्मन कंपनी थिसेनक्रुप मैरीन सिस्टम (टीकेएमएस) बनाती है और इन्हें ईरान के तटीय इलाकों के आसपास की टोह लेने के काम में लगाया जाएगा. और अगर दोनों देशों के बीच कभी सैन्य टकराव होता है तो इन पनडुब्बियों से कार्रवाई भी की जा सकती है.

इस्राएल को ईरान से खतरा महसूस होता है. ईरान इस्राएल का अस्तित्व मानने से इनकार करता है. इसीलिए इस्राएल ने ईरान के साथ विश्व शक्तियों के परमाणु समझौते का भी विरोध किया जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस समझौते को दुनिया को सुरक्षित बनाने की दिशा में अहम कदम बताया था.

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इस्राएली प्रधानमंत्री को पक्का विश्वास है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिश में आगे बढ़ रहा है. इस्राएल की नई डॉल्फिन-क्लास पनडुब्बियां परमाणु हथियार ले जाने में भी सक्षम हैं. नेतान्याहू ने कहा, "यह एक रणनीतिक हथियार प्रणाली है जो आने वाले दशकों में इस्राएल के भविष्य और अस्तित्व को सुनिश्चित करेगी.”

लेकिन इन पनडुब्बियों की खरीद से ईरान को ही फायदा होगा क्योंकि वह थिसेनक्रुप के निवेशकों से एक है. ईरानी शाह के दौर में ईरान और इस्राएल दोस्त थे. दोनों ही अमेरिका के सहयोगी थे. 1970 के दशक के तेल संकट के बाद जब ईरान का खजाना लबालब भर गया तो उसने दुनिया में बहुत सारी चीजें खरीद डालीं. उसी समय ईरान ने जर्मनी के क्रुप कॉर्पोरेशन में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद ली.

ईरान में 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान और इराक के बीच लंबा युद्ध चला. ईरान को नगदी की जरूरत पड़ी तो उसने अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेच दिया. लेकिन फिर भी इस जर्मन कंपनी में ईरान की आठ फीसदी हिस्सेदारी रह गई थी.

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लेकिन 2003 में यह हिस्सेदारी और घट गई. उस वक्त अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के महानिदेशक मोहम्मद अल बारादेई ने एक रिपोर्ट में आरोप लगाया कि ईरान अपनी कुछ परमाणु सामग्रियों और गतिविधियों को छिपा रहा है. अमेरिका के दबाव में थिसेनक्रुप को ईरान से कुछ और हिस्सेदारी वापस लेनी पड़ी. इसके तहत कंपनी में ईरान की हिस्सेदारी को पांच फीसदी से कम कर दिया गया. इसके लिए थिसेन क्रुप ने ईरान को 40.6 करोड़ यूरो की राशि चुकाई.

फिलहाल कंपनी के कुल शेयरों में ईरान के पास 4.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है. डीडब्ल्यू की तरफ से पूछे गए सवाल पर थिसेनक्रुप ने कहा कि ईरान या किसी अन्य निवेशक को कंपनी के बिक्री सौदों के बारे जानकारी हासिल करने का हक नहीं है और ना ही उन्हें प्रभावित करने का. थिसेनक्रुप का कहना है कि निवेशकों को सिर्फ मुनाफे में से उनका हिस्सा दे दिया जाता है.

इस्राएल के लिए तैयार होने वाली तीन पनडुब्बियों की कीमत 1.2 अरब यूरो होगी. यह साफ नहीं है कि इसमें से ईरान को कितना हिस्सा मिलेगा. लेकिन इस्राएली अखबार "हारेत्स" का अनुमान है कि ईरान को पिछले दस वर्षों के दौरान थिसेनक्रुप में अपने निवेश से लगभग 10 करोड़ डॉलर का फायदा हुआ है.

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