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दुनिया

इस साल ईरान के लोग हज पर जा पाएंगे?

ईरान का कहना है कि इस साल की हज यात्रा के बारे में बात करने के लिए उसे सऊदी अरब की तरफ से कोई निमंत्रण नहीं मिला है. दोनों देशों की तनातनी के चलते पिछले साल ईरान के लोगों को हज पर नहीं जाने दिया गया था.

सऊदी अखबार 'अल हयात' ने शुक्रवार को खबर दी कि श्रद्धालुओं से जुड़े मामलों के सऊदी मंत्री मोहम्मद बेनतिन ने 2017 के लिए हज यात्रा की तैयारियों को लेकर 80 से ज्यादा देशों के साथ चर्चा शुरू की है और इनमें ईरान भी शामिल है. लेकिन ईरानी मीडिया में सोमवार को देश के हज संगठन के प्रमुख हामिद मोहम्मदी के हवाले से कहा गया, "ना तो हज संगठन को और ना ही ईरानी विदेश मंत्रालय को सऊदी अरब की तरफ से कोई निमंत्रण मिला है.”

उन्होंने कहा कि एक बार निमंत्रण मिलने के बाद ही ईरानी लोग हज में हिस्सा ले पाएंगे, बशर्ते "सऊदी पक्ष गरिमा और सुरक्षा की” शर्त को पूरा करने को तैयार हो. उन्होंने कहा कि ईरानी लोगों लिए हज के "बंद रास्ते” को खोलने की ईरान पूरी कोशिश कर रहा है.

देखिए हज में क्या करते हैं लोग

सऊदी अरब के शहर मक्का से शुरू होने वाली और वहीं पर खत्म होने वाली हज यात्रा को इस्लाम में हर सक्षम मुसलमान के लिए जरूरी करार दिया गया है. 2016 में दुनिया भर के 18 लाख लोगों ने हज की यात्रा की, लेकिन ईरानी लोग इसमें शामिल नहीं थे. तीन दशक में पहली बार ऐसा हुआ जब ईरानी लोग हज के लिए मक्का नहीं जा पाए. इसकी वजह है सऊदी अरब और ईरान के बीच का तनाव, जिसकी शुरुआत 2015 में हज के दौरान हुई भगदड़ के बाद तीखी बयानबाजी से हुई. ईरान का कहना है कि इस भगदड़ में उसके 464 लोग मारे गए. इस हादसे में कुल मिलाकर 2,300 से ज्यादा लोग मारे गए थे. इस घटना को लेकर ईरान ने सऊदी अरब पर हज यात्रा के प्रबंधन में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया था.

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इसके बाद जनवरी 2016 में सऊदी अरब ने ईरान के साथ अपने सभी रिश्ते खत्म कर लिए. यह कदम सऊदी अरब ने तेहरान में अपने दूतावास में आग लगाए जाने की घटना के बाद उठाया. सऊदी दूतावास पर हमला करने वाले प्रदर्शनकारी सऊदी अरब में एक शिया मौलवी को मौत की सजा दिए जाने से नाराज थे. शिया बहुल ईरान और सुन्नी बहुल सऊदी अरब के बीच मध्य पूर्व में कई मुद्दों पर तीखे मतभेद रहे हैं. मौजूदा समय में सीरिया और यमन में जारी संकटों में दोनों देश एक दूसरे के आमने सामने खड़े हैं.

एके/आरपी (एएफपी)

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