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दुनिया

भारत के बारे में मीडिया परसेप्शन सच से दूर: हर्षवर्धन

भारत से सहयोग बढ़ाने को लेकर जर्मनी में उत्साह है, पर दूसरी तरफ सामाजिक असमानता और हिंसा भी सुर्खियों में हैं. केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन कहते हैं कि खबरों के आधार पर जर्मनी में भारत के बारे में गलतफहमी नहीं फैलनी चाहिए.

केंद्रीय विज्ञान और प्रोद्योगिकी मंत्री डॉ हर्षवर्धन भी हाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जर्मनी के दौरे पर आए. इस दौरे में जर्मनी की राजधानी बर्लिन में जर्मनी-भारत अंतर-सरकारी परामर्श बैठक हुई जिसमें दोनों पक्षों के बीच परिवहन, शिक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग के समझौते हुए. केंद्रीय विज्ञान, तकनीक और पर्यावरण मंत्री हर्षवर्धन जर्मनी के साथ सहयोग को बहुत अहम मानते हैं. पेश हैं बर्लिन में उनके साथ हुई खास बातचीत के अंश:

प्रधानमंत्री मोदी के जर्मनी दौरे को आप कैसे देखते हैं?

मैं समझता हूं कि यह असाधारण रूप से सफल दौरा है. मैंने जर्मनी के लोगों में और यहां रह रहे भारतीयों में बहुत उत्साह देखा. भारत में भी लोगों को इस बात की खुशी हो रही होगी. यह सिर्फ दौरे के लिए दौरा नहीं था. इतने विषयों पर दोनों देशों के बीच इतनी गहरी बातचीत होना बहुत अहम है. दोनों देशों के संबंधों और उनकी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के हिसाब से मिल जुलकर काम करने की प्रवृत्ति के साथ जो यात्रा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में शुरू हुई, वह और ज्यादा तेजी से गति पकड़ रही है. यह बहुत स्पष्ट दिखता है. मोदी जी के साथ साथ यहां की चासंलर के अंदर भी हमें बहुत उत्साह और खुशी दिखाई दी. मुझे कोई ऐसा क्षेत्र नहीं दिखाई दिया जहां गहरा सहयोग न शुरू हुआ हो. साइंस एंड टेक्नोलोजी से लेकर पर्यावरण तक, जलवायु परिवर्तन से लेकर परिवहन और सुरक्षा, स्टार्ट अप मूवमेंट, स्किल डेवलपमेंट, स्वच्छ ऊर्जा, सोलर एलायंस, स्मार्ट सिटी. इन सब विषयों पर हम मिलकर काम कर रहे हैं. मोदी जी ने भारत को और नई ऊंचाइयों पर ले जाने और एक नया इंडिया बनाने संकल्प लिया है. कारोबार करने के लिए सहज माहौल बनाने की बात हो या विकास और वृद्धि के संदर्भ में अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग हों या फिर उद्योग के लिए बेहतर माहौल बनाने की बात, सभी तरह से हम लोग काफी आगे आ गए हैं.

भारत और जर्मनी के बीच विकास की जितनी संभावनाएं हैं, क्या भारत और जर्मनी के रिश्ते उसी रफ्तार से आगे जा रहे हैं? क्या उसने संतुष्ट हुआ जा सकता है या उसमें कितनी तेजी लाने की जरूरत है?

जैसे मैंने कहा, असाधारण तेजी पहले से ही है. प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मनी के निवेशकों के लिए या किसी भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए बहुत रास्ते खोले हैं. ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के अलावा भारत में जर्मनी के लिए फास्ट ट्रैक डेवलपमेंट शुरू हुआ है. इसके तहत कोशिश हो रही है कि जर्मनी के निवेशक, कारोबारी और छोटे बड़े हर तरह के लोग भारत में जाकर मेक इन इंडिया कार्यक्रम, डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी को सफल बनाने के लिए योगदान दें. यहां हमें जर्मनी के निवेशकों और बड़ी बड़ी कंपनियों के सीइओ को सुनने का मौका मिला. हमने देखा कि उनके भीतर भारत को लेकर अभूतपूर्व उत्साह है. उन्हें लगता है कि भारत के साथ बड़ी संभावनाएं हैं. भारत के लिए भी यह बहुत बड़ा अवसर है. आज भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जो किसी भी निवेश के लिए पसंदीदा जगह माने जाते हैं. इसके अलावा भारत और जर्मनी के वैज्ञानिकों के बीच हर तरह के सहयोग हो रहे हैं. सहयोग के बहुत से नए क्षेत्र हैं जैसे साइबर सिक्योरिटी, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग, ऊर्जा, जल, जलवायु परिवर्तन के साथ जुड़ी हुई रिसर्च, तटीय इलाकों में पैदा हो रही चुनौतियां, क्रोनिक वायरल इंफेक्शन, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस और मेडिकल सिस्टम्स के अंदर इफॉर्मेटिक्स. मौजूदा दौरे में भारत और जर्मनी के बीच अलग-अलग क्षेत्रों में आठ समझौते हुए हैं, जिनके जरिए इन कामों को और तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा.

चीन की वन बेल्ट वन रोड परियोजना को लेकर भारत की आपत्तियों के साथ साथ जर्मनी भी उसकी पारदर्शिता पर सवाल उठाता है. तो क्या इससे दोनों के बीच नए स्तर पर सहयोग बढ़ेगा?

देखिए यह तो चीजों की टेक्नीकल इंटरप्रेटेशन आप लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करते हैं, मैं तो केवल इतना कह सकता हूं कि भारत और जर्मनी के बीच में जो एक आदर्श रिश्ता हो सकता है, वह साफ तौर पर दिखता है. उस पर गंभीरता और गहराई से काम हो रहा है. मुझे विश्वास है कि उस पर हम बहुत तेजी से आगे बढ़ने वाले हैं.

ईयू-भारत मुक्त व्यापार समझौते के लिए जर्मनी काफी समय से प्रयास कर रहा है. क्या उस दिशा में कोई प्रगति हुई है?

मैं समझता हूं कि यह विषय भी रखा गया है और हमारी सरकार भी इस बारे में गंभीरता से काम कर रही है. चांसलर मैर्केल ने भी अपने भाषण में इसका जिक्र किया है. जहां तक प्रधानमंत्री मोदी जी को मैं जान और समझ पाया हूं, वह बहुत उदार, खुले हैं और भारत को ऊंचाइयों तक ले जाना चाहते हैं. भारत में ही उन्होंने एक एक नियम की समीक्षा की है और एक हजार से ज्यादा कानून खत्म कर दिए है. वीआईपी कल्चर उन्होंने खत्म कर दिया है. मोदी जी के पास एक बड़ा विजन और जज्बा है और वह भारत को विश्व गुरु के रूप में प्रतिष्ठित करना चाहते हैं.

ब्रिटेन यूरोपीय संघ से बाहर निकलने की तैयारी कर रहा है. यूरोपीय संघ में अब से पहले भारत की बहुत तवज्जो ब्रिटेन पर रहती थी. अब कुछ नया देखने को मिलेगा?

मोदी जी किसी भेदभाव की दृष्टि से संबंध बनाने के बारे में विचार नहीं करते हैं. उनके लिए उतना ही महत्व इंग्लैंड का है और उतना ही यूरोप के देशों का और जर्मनी का है. वह सबके साथ भारत को गहराई से जोड़ना चाहते हैं. भारत की तो यह सांस्कृतिक विरासत और सोच है कि वह पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखता है. सभी उस परिवार के अंग हैं. मानवीय मूल्य, मानवीय दृष्टिकोण और हमारी सांस्कृतिक विरासत, इन सब बातों को हम लोग हमेशा से तवज्जो देते आए हैं. ये मोदी जी की सोच और कामों में भी स्पष्ट रूप से दिखता है.

भारत को लेकर यहां मानवाधिकार का मुद्दा अकसर उठता है. खास कर दलित और गाय का मुद्दा. उस दिशा में चिंताओं को दूर करने की क्या कोशिश है?

देखिए मैं आपको यह बात विश्वास के साथ कह सकता हूं कि खबरों के आधार पर एक वातारण बनाने की जो कोशिश कभी कभी मीडिया में होती है, जो परेसेप्शन बनाया जाता है, उसमें और जमीनी सच्चाई में बहुत फर्क होता है. मोदीजी एक स्टैट्समैन हैं. जिस सब चीजों का आपने जिक्र किया, वो इनसे बहुत ऊपर हैं. इसलिए जो भी आप मीडिया में देखते हैं उनके आधार पर जर्मनी के अंदर गलतफहमी नहीं होनी चाहिए. भारत का दृष्टिकोण वृहद है. चाहे दलित हो, मुस्लिम भाई हो या कोई भी भारतवासी हो, हम लोग किसी को वोट बैंक की नजर से नहीं देखते. जो उन्हें वोट बैंक के नजरिए देखते हैं वो इस तरह की राजनीति भारत में करते हैं और उन्हीं के कारण झूठे परसेप्शन बनते हैं. सर्वधर्म समभाव की संस्कृति के अनुरूप ही हम लोग राजनीति में भी काम करते हैं. हमारी सोच है कि "सबको न्याय और तुष्टिकरण किसी का नहीं". सबका साथ सबका विकास. कई बार मीडिया में ऐसी घटनाओं को लेकर सही दृष्टिकोण ना देकर एक परसेप्शन बनाने की कोशिश की जाती है. कई बार ऐसा लगता है कि सरकार की छवि को बिगाड़ने का प्रयास होता है. लेकिन मोदी जी का व्यक्तित्व इन सब चीजों से बहुत ऊंचा है.

इंटरव्यू - अशोक कुमार

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