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मनोरंजन

पाकिस्तान ने बॉलीवुड दोफाड़ कर डाला है

पाकिस्तानी कलाकारों को लेकर बॉलीवुड बंटा हुआ है. कुछ पाकिस्तानी कलाकारों पर प्रतिबंध के समर्थन में हैं तो कुछ सीमा के तनाव से कला को मुक्त रखने के पक्ष में.

पाकिस्तानी एक्टर फवाद खान को लेकर बनाई गई फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव के देखते हुए फिल्म निर्माताओं के सबसे बड़े संगठन 'इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन' ने पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने का फैसला किया है तो वहीं सिनेमा ऑनर्स एंड एग्जिबिटर्स असोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा है कि देश के माहौल को देखते हुए फिल्म को महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात के सिंगल स्क्रीन थिएटरों में प्रदर्शित नहीं किया जाएगा.

सिनेमापरहमलाक्यों?

फिल्मकार अनुराग कश्यप और उनके जैसे कुछ लोग सिनेमा पर हमला किये जाने को लेकर तार्किक सवाल भी उठा रहे हैं. अनुराग ने प्रधानमंत्री मोदी की पकिस्तान यात्रा को ढाल बनाते हुए फिल्मों पर प्रतिबन्ध का विरोध किया है. अनुराग के कहने का अर्थ यही है कि खुद प्रधानमंत्री मोदी को यह अंदाजा नहीं था कि पकिस्तान के साथ रिश्ते बिगड़ने वाले हैं. 'ऐ दिल है मुश्किल' या अन्य दूसरी फिल्मों में पाक कलाकारों को उन्ही दिनों फिल्मों में लिया गया था जब दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच रिश्ता अच्छा था. फिल्म ‘पार्च्ड' में अपने अभिनय को लेकर चर्चा में आईं अभिनेत्री राधिका आप्टे का मानना है कि पाकिस्तानी कलाकारों को भारतीय फिल्मों में काम करने से नहीं रोका जाना चाहिए. अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और सलमान खान जैसे सितारे भी पाक कलाकारों पर बैन को गलत बता चुके हैं. सैफ अली खान भी पाकिस्तानी कलाकारों का बॉलीवुड में काम करने को पर समर्थन कर चुके हैं.

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फिल्म के विरोध को लेकर बॉलीवुड दो खेमों में बंटा हुआ नजर आ रहा है. अभिनेता नाना पाटेकर, गायक अभिजीत और फिल्मकार अशोक पंडित जैसे कई ऐसे लोग भी हैं जो सीमा पर तनाव का असर बॉलीवुड पर पड़ने को स्वाभाविक मानते हैं.

'इम्पा' काबैन

फिल्म निर्माताओं के सबसे बड़े संगठन 'इंडियन मोशन पिक्चर्स प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन' यानी इम्पा ने पाकिस्तानी कलाकारों को बैन करने का फैसला किया है. ‘इम्पा' का कहना है कि जब तक दोनों देशों के बीच हालात समान्य नहीं हो जाते तब तक पाकिस्तानी कलाकारों, गायक और तकनीशियनों पर प्रतिबंध रहेगा. ‘इम्पा' के अध्यक्ष टीपी अग्रवाल का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से आतंकवाद को बढ़ावा देने के खिलाफ देश भर में बढ़ रहे आक्रोश के चलते यह फैसला किया गया है.

राज ठाकरे की पार्टी ‘मनसे' और उद्धव ठाकरे की पार्टी ‘शिवसेना' ने उन सभी फिल्मों का विरोध कर रही हैं जिनमें पाकिस्तानी कलाकार हैं. ‘मनसे' का विरोध ‘शिवसेना' के मुकाबले अधिक मुखर है. ‘मनसे' नेता अमे खोपकर मल्टीप्लेक्स ऑपरेटरों को धमकाते हुए कहा है कि उनकी पार्टी पाकिस्तानी कलाकारों को काम देने और उन्हें बढ़ावा देने का समर्थन नहीं करती, इसलिए ऐसी फिल्मों का विरोध जारी रहेगा.

फिल्मकारोबारपरअसर

पाकिस्तानी कलाकारों पर भारत में प्रतिबन्ध लगाये जाने का असर दोनों देशों के फिल्म उद्योग पर पड़ेगा. 'ऐ दिल है मुश्किल' और शाहरुख खान की फिल्म 'रईस' प्रदर्शन को तैयार है. पाकिस्तानी कलाकारों के चलते इन फिल्मों के प्रदर्शन में अगर रुकावट आती है तो निर्माताओं को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ सकता है. वहीं पाकिस्तान ने भी अपने यहां पर भारतीय फिल्मों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. पाकिस्तान, हिंदी फिल्मों के लिए बॉक्स ऑफिस पर सबसे अधिक कारोबार करने वाला विश्व का तीसरा देश है. पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों को बेहद पसन्द किया जाता है. बॉलीवुड सितारे शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान, ऋतिक रोशन और अमिताभ बच्चन की फिल्में पकिस्तान में औसतन 2 करोड़ से 10 करोड़ तक का कारोबार कर लेती हैं.

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सीमा पर तनाव का सबसे बुरा असर पाकिस्तान के फिल्म उद्योग पर पड़ेगा. बॉलीवुड फिल्मों की लोकप्रियता के चलते पिछले कुछ साल में पाकिस्तान का फिल्म व्यापार तेजी से बढ़ा है. वहां का फिल्म कारोबार मुख्य रूप से बॉलीवुड और हॉलीवुड फिल्मों के प्रदर्शन पर निर्भर करता है. पकिस्तान में बहुत कम संख्या में फिल्में बनती हैं और अपने बूते पर वह सिनेमाघरों को चालू रख पाने की स्थिति में नहीं है. यदि दोनों देशों के बीच संबंध लम्बे समय तक खराब रहते हैं तो दोनों देशों के फिल्म उद्योग को करोड़ों का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा.

पकिस्तान के साथ सांस्‍कृतिक और अभिनय से जुड़ी साझेदारी खत्‍म कर लेने की सलाह, बॉलीवुड के एक वर्ग को समझ नहीं आ रही है. अनुराग कश्यप या प्रियंका चोपड़ा जैसे लोग राजनीतिक नेताओं के सुर में सुर नहीं मिला पा रहे हैं. ये लोग सवाल भी पूछ रहे हैं कि आखिर कलाकारों पर प्रतिबंध से आतंकवाद का खात्मा कैसे होगा. एक गंभीर लेकिन वाजिब सवाल यह भी है कि नॉन स्टेट एक्टर्स की करतूतों पर कलाकारों को निशाना क्यों बनाया जाता है? उद्द्योगपतियों और नेताओं को निशाना क्यों बख्श दिया जाता है?

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