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दुनिया

चीन की चिंता को भारत ने बताया धता, अरुणाचल जाएंगे दलाई लामा

चीन की चिंता की परवाह न करते हुए भारत ने दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश जाने का स्वागत किया है. दलाई लामा को राज्य के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने आमंत्रित किया है.

अरुणाचल प्रदेश में दलाई लामा का कार्यक्रम अगले साल मार्च में है. हाल ही में अमेरिकी राजदूत रिचर्ड वर्मा भी अरुणाचल प्रदेश गए थे और चीन को इस पर सख्त आपत्ति थी. इसी महीने की शुरुआत में तवांग उत्सव के कार्यक्रम का ऐलान हुआ था.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने इस बारे में कहा कि तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा भारत के मेहमान हैं और देश में कहीं भी जाने के लिए स्वतंत्र हैं. उन्होंने कहा, "दलाई लामा एक आध्यात्मिक व्यक्तित्व हैं, अरुणाचल प्रदेश में उनके बहुत सारे बौद्ध अनुयायी हैं जो उनसे आशीर्वाद लेना चाहेंगे. वह पहले भी वहां जा चुके हैं और उनके दोबारा वहां जाने में भी कोई दिक्कत नहीं है."

दलाई लामा के प्रवक्ता ने भी उनके अरुणाचल प्रदेश जाने की पुष्टि की है. तेनजिन तकला ने कहा, "हिज होलीनेस ने मुख्यमंत्री और अरुणाचल के लोगों का निमंत्रण स्वीकार कर लिया है. वह मार्च के दूसरे हिस्से में वहां जाएंगे." जब तकला से चीन की प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया. 

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अरुणाचल प्रदेश के एक बड़े हिस्से पर चीन अपना दावा जताता है. इसलिए जब भी वहां कोई भारतीय गतिविधि होती है तो उसे आपत्ति होती है. वैसे दलाई लामा पहले भी अरुणाचल जा चुके हैं और तब भी चीन ने आपत्ति दर्ज की थी. लेकिन इस बार यह मुद्दा ज्यादा विवादों में घिर सकता है क्योंकि अमेरिकी राजदूत वर्मा के दौरे को लेकर भी चीन ने नाराजगी जाहिर की है. लेकिन दलाई लामा को भारत की प्रतिक्रिया से जाहिर है कि वह चीन की चिंताओं की ज्यादा परवाह नहीं कर रहा है. अमेरिकी राजदूत को तवांग बुलाने को लेकर चीन ने कहा था, "अमेरिका का यह कदम चीन-भारत सीमा पर बहुत मेहनत से अर्जित की गई शांति को नुकसान पहुंचा सकता है."

तवांग बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए विशेष स्थान रखता है. 1959 में जब चीन ने तिब्बत पर हमला किया तो गिरफ्तारी से बचकर भागते हुए दलाई लामा और उनके समर्थक तवांग ही पहुंचे थे. तवांग का बौद्ध मठ एशिया के सबसे बड़े मठों में है.

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